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In this blog we talk about Islamic scholar and Wide man Tariq Fateh. लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

Tarik Fateh

तारिक़ फतेह चल बसे उनके प्रोग्राम और डिबेट देखे काफी सुलझे हुए लेखक, मृदुभाषी और पढ़े लिखे आदमी थे,पाकिस्तान से निकले हुए मुस्लिम थे लेकिन पाकिस्तान और मुस्लिम कट्टरपंथियों को जम कर लताड़ते थे।  भारत और भारत की संस्कृति से प्रेम व्यक्त करते थे। खुद को इंडियन कहते थे । वो विदेशी आक्रमणकारियों को अपना पूर्वज ना मान कर खुद को हिंदुओं से निकला हुआ ही बताते थे। शायद इसी कारण उनकी मौत पर हंसने वालों में अधिकतर मुस्लिम कट्टरपंती थे ही हैं । कमेंट इस तरह के हैं कि - वो मुस्लिम के भेष में काफ़िर था अच्छा हुआ जो .... लेकिन मैंने किसी डिबेट में उनको इस्लाम के विरुद्ध कुछ गलत बोलते हुए नहीं सुना । काफी प्रोग्रेसिव थे। भले ही भारत की नागरिकता पाने के लिए सही .. या कोई अन्य वजह भी रही हो ..  पर वो भारत के लिए हमेशा स्टैंड लेते थे। उसी स्टैंड के लिए हम और हमारा देश हमेशा आपके आभारी रहेंगे।  ओम शांति  🙏 हम सब ईश्वर के हैं और अंत में हम उसी की ओर लौटेंगे