*आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...
सौ दिन की पराजय एक क्षण की कायरता से बेहतर होती है.. 18 साल के IPL में, कभी भी मैने, धोनी के क्रीज पर रहते हुए,चेपक को इतना खामोश नहीं देखा था, जितना खामोश चेपक आज था। बहुत से लोग धोनी को शायद इसलिए पसंद करते होंगे क्योंकि उसने ट्रॉफियां जिताई है, रन बनाए है, छक्के मारे है। पर मुझे धोनी सिर्फ और सिर्फ अपनी दिलेरी की वजह से पसंद रहा है। वो बांग्लादेश वाला मैच, जब एक रन बराबरी के लिए चाहिए था,कोई और विकेटकीपर होता तो थ्रो मार देता, पर हाथ में गेंद लेकर स्प्रिंट नहीं लगाता। क्योंकि थ्रो मारने पर थ्रो लगे न लगे,मामला फिफ्टी फिफ्टी का रहता है, कोई धोनी को ब्लेम करने नहीं जाता, पर हाथ में गेंद लेकर दौड़ने पर अगर एक दो सेकंड का फासला भी रहता तो सारा ब्लेम धोनी पर ही आना था, पर धोनी को कभी डर नहीं लगा इन बातों से। इसी तरह वर्ल्डकप फाइनल में, खुद को युवराज की जगह प्रमोट करना,वहां धोनी के पास पाने को कम और खोने को ज्यादा था। पर ये बन्दा उतरा, खेला, और जिताया भी।कई लोग धोनी को उस दिन के लिए ट्रॉल करते है, जब धोनी ने अंबाती रायडू को आधी पिच से लौटा दिया था इस कॉन्फिडेंट में कि लास्ट बॉल पर मै...