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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

Book Review: Chitralekha by Bhagwati Charan Verma

 चित्रलेखा – एक दार्शनिक कृति की समीक्षा लेखक: भगवती चरण वर्मा   प्रस्तावना   हिंदी साहित्य के इतिहास में *चित्रलेखा* एक ऐसी अनूठी रचना है जिसने पाठकों को न केवल प्रेम और सौंदर्य के मोह में बाँधा, बल्कि पाप और पुण्य की जटिल अवधारणाओं पर गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित किया। भगवती चरण वर्मा का यह उपन्यास 1934 में प्रकाशित हुआ था और यह आज भी हिंदी गद्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। इसमें दार्शनिक विमर्श, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और सामाजिक यथार्थ का ऐसा संलयन है जो हर युग में प्रासंगिक बना रहता है । मूल विषय और उद्देश्य   *चित्रलेखा* का केंद्रीय प्रश्न है — "पाप क्या है?"। यह उपन्यास इस अनुत्तरित प्रश्न को जीवन, प्रेम और मानव प्रवृत्तियों के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करता है। कथा की बुनियाद एक बौद्धिक प्रयोग पर टिकी है जिसमें महात्मा रत्नांबर दो शिष्यों — श्वेतांक और विशालदेव — को संसार में यह देखने भेजते हैं कि मनुष्य अपने व्यवहार में पाप और पुण्य का भेद कैसे करता है। इस प्रयोग का परिणाम यह दर्शाता है कि मनुष्य की दृष्टि ही उसके कर्मों को पाप या पुण्य बनाती है। लेखक...