सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

पैसा बड़ा या सोच? How to think big and positive by Abiiinabu

 पैसा बड़ा या सोच? How to think big and positive by Abiiinabu

अभी थोड़ी देर पहले ही एक किताब पढ़ रहा था। पढ़ क्या रहा था, ये समझ लो चाट रहा था (literally नहीं लेना है)।  पढ़ते पढ़ते कई चीज़ें सामने आईं, कई मुद्दे सामने आये, कई समाधान भी आये दिमाग में, सो सोचा बता दूँ आप लोगों को भी।  वैसे तो मैं फिक्शन पढ़ने का बहुत शौक़ीन हु लेकिन लाइफ रिलेटेड बुक्स पढ़ कर काफी अच्छा लगने लगा है।  वो इसलिए की जो ये किताबें कहती हैं, वो सब हमको पहले से मालूम है।  लेकिन क्या आप लोगों को मालूम है ? ज़िन्दगी में कई बार हम ऐसी जगह खुद को खड़ा पते हैं जहां हमको बेबसी और लाचारी महसूस होने लगती है। और मैंने खुद ये अनुभव किया है कि किताबें सच में हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं।  क्यूंकि वो हमको कभी छोड़ कर नहीं जा सकतीं।


      इंसान की ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा महत्तव क्या रखता है ? जब पापा ने मुझसे पूछा तो मैंने हस कर लापरवाही से कहा " पैसा "।  बदले में पापा भी मुस्कुराये लेकिन बाद में समझाते हुए बोले, ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा ज़रूरी अगर कुछ है तो वो है "इंसान की सोच "।  मैं हैरान, गणित और भौतिकी के मास्टर पिताश्री हमारे आज कैसे दर्शन और चिंतन की बातें कर रहे हैं ? पापा को शायद समझ आ गया की लड़का कनफुजिया गया है।  ज़्यादा कुछ बोले नहीं बस ये बोले जब भी किसी से मिलो तो उसकी बातों से ये पता लगाने की कोशिश करो कि उसकी सोच कैसी है? वो अपनी स्थिति के बारे में क्या सोचता है ? वो बाकि परिवेश के बारे में क्या सोचता है? अगर उसकी सोच अच्छी हुई, तो उसकी संगत से तुमको भी फायदा होगा और तुम्हारी संगत से उसको। अपनी सोच को भी अच्छा रखो, जितना पॉजिटिव रखोगे उतना लोग तुम्हारे दोस्त बनते जायेंगे।  अगर कोई अच्छा नहीं भी है तो भी अच्छे बनो क्या पता तुमसे मिलकर किसी की तलाश पूरी हो जाये।  
    भारतीय माता पिता अपने बच्चों को लेकर कुछ ज़्यादा ही सचेत रहते हैं ये तो पता था, लेकिन ये बात समझाने का तरीका मुझे बड़ा सही लगा।  बोले तो एकदम स्ट्रैट फॉरवर्ड।  बात पुरानी है, तब समझ नहीं आई थी, आज जब घर से दूर, मम्मी पापा से दूर , ज़िन्दगी की उलझनो से जूझ रहा हू, तब समझ आ रही है।  एक एक बात, जो पापा कहते हैं वो सच होती है।  "दोस्ती से ज़्यादा ज़रूरी सोच का सकारात्मक होना है।  अगर तुम्हारी सोच पॉजिटिव है, तो लोग खुद तुम्हारे पास आएंगे, और अगर तुम्हारी सोच ही अगर बेकार है तो लोग तुमसे दूर भागेंगे।  इसलिए किताबें पढ़ा करो, क्यूंकि किताबें सोच बदलने में, अलग अलग पहलु से सोचने में दिमाग खोलने में मदद करती है। पैसा बहुत ज़्यादा ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी हैं सोच का ज़्यादा ऊंचा होना। "
    बात आजमाई गई, कई बार सच साबित हुई। और सच साबित हुए पापा। हिंदुस्तानी बाप को लड़के के गले लगते देख शायद थानोस चाचा भी चुटकी न बचाएं। ये दुनिया का वो सबसे कठिन काम है जिसको करने के लिए आपको भावनात्मक रूप के साथ शारीरिक रूप से भी मजबूत बनना होगा।  क्यूंकि 90% लड़के अपने पिता को देख कर डरते हैं ( मुंबई और सूरत वालो आप लोग एक्सेप्शनल हो ) ।आधा उत्तर भारत अपने पिता को शायद कभी गले न लगा पाया हो कभी लेकिन पिता हमेशा बच्चों के लिए खुद को आगे रखता है। अब फिर से पॉइंट पर आते हैं बात आउट ऑफ़ टॉपिक हो रही है। हाँ तो किताबें ज़रूर पढ़ना चाहिए।  आपको लाइफ में कॉन्फिडेंस बढ़ाना है तो किताब पढ़िए और पैसा कमाना है तो किताबें पढ़िए और अगर अपनी सोच अगर बढ़ानी है तो हमारे ब्लोग पढ़िए (खींखीं खीं खीं)।  आज इतना ही; ज़्यादा नहीं लिखूंगा बस कुछ किताबें बता रहा हूँ, मन करे तो पढियेगा।

किताबें जो पढ़नी चाहियें -

Attitude is Everything by Jeff Keller -Attitude is Everything by Jeff Keller

Rich Dad poor Dad ( English) by Robert T. Kiyosaki- https://amzn.to/3pbkh6R

Rich Dad poor Dad (Hindi) - https://amzn.to/2S2dY9F

Richest Man in Babylon Hindi by George S. Clason - https://amzn.to/3cbQiGF

बाद में बताइयेगा कि कैसी लगी, यहीं नीचे कमेंट सेक्शन में।  पिता पुत्र वाली संवाद  अगर पसंद आई हो और आगे सुननी हो तो वो भी बताइयेगा।  आज चलता हूँ, जल्दी आऊंगा 

- Abiiinabu




Follow the Author:-

Instagram :-  www.instagram.com/abiiinabu
Twitter:- www.twitter.com/aabhinavno1

टिप्पणियाँ

  1. सही है महाराज हमसे ज्यादा सकारात्मक तो हुए तुम भाई। 😉

    जवाब देंहटाएं
  2. अति सुन्दर पंक्तियां
    वास्तव में हर एक पुत्र का स्वप्न होता है अपने पिता के गले लगना

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubt please let me know.

Best From the Author

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Middle Class Log

यार देखिये हम मिडिल क्लास लोग हैं। जब हम गोवा नहीं जा पाते तो चुप मार के अपने गाँव चले जाते हैं! एक उमर तक ना हम ढेर आस्तिक हैं ना कम नास्तिक। कुछ कुछ मौक़ापरस्त! पीड़ा में होते हैं तो भगवान को याद करते हैं। जब सब कुछ तबाह हो जाए तो भगवान को दोष देते हैं! और जब मनोकामना पूरी हो जाए तो भगवान को किनारे कर देते हैं। हम नेताओं को गरियाते हैं! और एक्टरों को पूजते हैं। हम अपने नेता चुनते हैं पर उनसे सवाल नहीं कर पाते। उनको ना कोस के ख़ुद को कोसते हैं। अमिताभ और सचिन हमारे भगवान होते हैं। हमको अटल बिहारी बाजपेयी, सुष्मा जी और मोदीजी के अलावा कोई और नेता लीडर लगता ही नहीं!  हम वो हैं जो कभी कभी फटे दूध की चाय बना लेते हैं। एक ईयर फ़ोन में दोस्त के साथ रेडियो पे नग़मे सुन लेते हैं। गरमी हो या बारिश हमें विंडो सीट ही चाहिए होती है। १५ ₹/किलो आलू जब हम मोलभाव करके १३ में और धनिया फ़्री मे लेके घर लौटते हैं तो सीना थोड़ा चौड़ा कर लेते हैं। हम कभी कभी फ़ेरी वाला समान अनायास ही ख़रीद लेते हैं। हम पैसे उड़ाते तो हैं पर हिसाब दिमाग़ में रखते हुए चलते हैं। हम दिया उधार जल्दी वापस नहीं माँग पाते ना ...