सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

National Mathematics Day 2021 - Remembering S. Ramanujan, The Man who knew ' The Infinity'

National Mathematics Day 2021 - Remembering S. Ramanujan, The man who knew 'The Infinity'

Ramanujan
The Man Who Knew The Infinity

22 दिसंबर को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है-जो देश में सभी चीजों में  गणित का चेहरा बने हुए हैं. 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आधिकारिक घोषणा के बाद 2012 में पहला राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया गया ।

S. Ramanujan भारत का अपना जीनियस

1887 में भारत की अपनी प्रतिभा, रामानुजन का जन्म तमिलनाडु के इरोड में हुआ था. और बच्चे होने के बाद से ही उनके पास गणित के लिए एक कुशाग्रता थी, लेकिन माध्यमिक विद्यालय में ही रामानुजन ने खुद की क्षमता और गणित के अनुशासन को समझा।


स्कूल स्तर के गणित में महारत हासिल करने के बाद अपनी उम्र के एक छात्र की उम्मीद की सीमा को पार करते हुए रामानुजन को फिर कुंभकोणम के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली । हालांकि, यह आदमी मैथ्स का इतना जुनूनी था कि वह अपने कोर्सवर्क के हर दूसरे सब्जेक्ट वाले हिस्से को फेल कर गया । इस वजह से उनकी दावेदारी और स्कॉलरशिप रद्द करनी पड़ी।


S. Ramanujan के साथ आगे क्या हुआ 

इसके तुरंत बाद, रामानुजन  को ट्यूशन द्वारा और देश भर की पत्रिकाओं में योगदान करके, ज्यादातर दक्षिण भारत में समाप्त करना था । हालांकि, 1913को हम उनकी प्रतिभा के उद्भव के रूप में हम जानते है-गणित के राजा के रूप में चिह्नित! कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर-जीएच हार्डी  ने रामानुजन द्वारा लिखे गए नोटों पर ठोकर खाई, जिसके बाद उन्हें विश्वविद्यालय को निमंत्रण मिला।
और आगे? ईमानदारी से कहूं तो बाकी इतिहास है । यह शख्स भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में गणितीय शोध का चेहरा बन गया। इसके तुरंत बाद उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने पीएचडी से सम्मानित किया गया ।
रामानुजम  रॉयल सोसायटी में सदस्य बन गए. ब्रिटेन में अपने करियर को आगे बढ़ाने के बाद रामानुजन 1919 में भारत लौटे। स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के कारण 26 अप्रैल 1920 को तपेदिक से उनकी मौत हो गई।
उनके अधिकांश सिद्धांत और विचार मरणोपरांत सिद्ध हो गए थे, और वह दुनिया भर के गणित के लिए एक बड़ा आंकड़ा बना हुआ है, जिसमें भारतीयों के दिलों में एक विशेष स्थान है ।

S. Ramanujan की एक अद्भुत खोज- 

कई बार गणित मुश्किल हो सकता है। मालूम हो कि गणित में 1 से 10 तक के सभी नंबरों को बांटकर कोई भी नंबर नहीं दिया जा सकता है। हालांकि, यह एक नंबर बहुत अजीब है और दुनिया के सभी गणितज्ञों को उलझन में छोड़ दिया है।
महान श्री श्रीनिवास रामानुजन द्वारा खोजे गए, 2520 नंबर का अवलोकन करते हैं। रामानुजन ने गणित से अधिक संख्या में, संख्या सिद्धांत, अनंत श्रृंखला, निरंतर अंशों और बहुत कुछ में काफी योगदान दिया।
2520 नंबर कई नंबरों में से एक लगता है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है।

यह एक ऐसी  संख्या है जिसने दुनिया भर में कई गणितज्ञों को आश्चर्यचकित कर दिया है ।
इस नंबर को सम और विषम दोनों तरह से 1 से 10 तक किसी भी नंबर से बांटा जा सकता है। बाकी शून्य है।
ज़रा इस सूची पर गौर करें...
 2520 ÷ 1 = 2520
 2520 ÷ 2 = 1260
 2520 ÷ 3 = 840
 2520 ÷ 4 = 630
 2520 ÷ 5 = 504
 2520 ÷ 6 = 420
 2520 ÷ 7 = 360
 2520 ÷ 8 = 315
 2520 ÷ 9 = 280
 2520 ÷ 10 = 252
इस एक विशेष संख्या के पीछे का जादू गुणा-भाग से समझाया जा सकता है। भारतीय हिंदू वर्ष को ध्यान में रखते हुए इस नंबर की पहेली को हल कर नीचे समझाया जाता है। 
सप्ताह में 7 दिन, महीने में 30 दिन और साल में 12 महीने यानी 7 × 30 × 12=2520 होते हैं। यह पूरी तरह से समय के प्रभुत्व को दर्शाता है ।

है ना मजेदार, रामानुजन दुनिया के उन व्यक्तियों में से थे जिन्हें गणित परेशान करने वाला नहीं, बल्कि मजेदार लगता था। और ऐसा उन्होंने अपने प्रयोगों एवं शोधों में सिद्ध करके भी दिखाया है। आपको हमारी आज की यह पोस्ट कैसी लगी अगर आपको भी मजा आया तो इसे शेयर कीजिए।
इसी तरह की अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

टिप्पणियाँ

Best From the Author

Australia पर India की विजय मात्र एक Test Match में जीत नहीं है

जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मार जाता है उपरोक्त पंक्तियों का टिम पैन से कोई लेना देना नहीं है एवम् Never mess with an Indian इस पंक्ति का ऋषभ पंत से कुछ लेना देना नहीं है लेना देना तो रिकी पॉन्टिंग साहेब का है, जिन्होंने और जिनके चेलों ने एक अकेले से नहीं पूरी टीम से भसड़ लेली, फिर क्या होना था.                                फिर इतिहास रचा गया, ऐसा इतिहास जिसमे underdog समझी जाने वाली टीम जिसके आधे खिलाड़ी डेब्यू कर रहे थे, और इसी के साथ कह के लूंगा वाला गाना भारतीय चेंज रूम में बजा कर, ऑस्ट्रेलिया को आज दूसरी बार ये दिखला दिया कि भारतीय रणबांकुरे आखिर क्यों इतने ऐतिहासिक हैं।                                      पिछली बार जब पहली पारी में अच्छा प्रदर्शन ना कर पाने के एवज में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भीख के रूप में फॉलोऑन दिया, तो उनके लिए ये महज और अधिक अपमान देने का या यूं कहे...

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

Ten Dikpalas of Hindu Religion

 The 10 Dikpàlas (deities presiding over the ten directions) in Sanatan Dharm 1. Kubera - Guardian of the North Direction 2.Yamraj - Guardian of the South Direction 3. Indra - Guardian of the East Direction 4. Varuna - Guardian of the West Direction 5.Agni -Guardian of the South-East Direction 6.Nirrti - Guardian of the South-West Direction 7. Vàyu - Guardian of the North-West Direction 8. Īśāna - Guardian of the North East Direction 9. Bhagwan Brahmà - Guardian of the Zenith (Highest point in the celestial sphere) 10. Sesa - Guardian of the Nadir (The point in the celestial sphere which is directly opposite the zenith)

The History of Gujarati Calendar

प्राचीन काल से ही हिंदुओं द्वारा भारत में दो प्रकार की कालानुक्रमिक प्रणालियों का उपयोग किया जाता रहा है। पहले को किसी ऐतिहासिक घटना से गणना करने के लिए वर्षों की आवश्यकता होती है। दूसरा किसी खगोलीय पिंड की स्थिति से गणना शुरू करता है। समय-समय पर और भारत के विभिन्न हिस्सों में एक ऐतिहासिक घटना की गणना अलग-अलग रही है। गुजरात, दक्षिण के कुछ हिस्से और आसपास के क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली सबसे हालिया ऐतिहासिक घटना विक्रम युग (58 ईसा पूर्व) है। शकों पर राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिक जीत के बाद विक्रम युग की स्थापना हुई। इस युग में गिने जाने वाले वर्षों को आमतौर पर विक्रमसंवत या केवल संवत शब्द से दर्शाया जाता है। वे बरसों बीत चुके हैं। उत्तर में प्रथा हर साल चैत्र (मार्च-अप्रैल) से शुरू होती है और हर महीने पूर्णिमा से। लेकिन दक्षिण के कुछ हिस्सों में और गुजरात में साल की शुरुआत कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) से होती है और महीनों की शुरुआत अमावस्या से होती है। शक, या शालिवाहन युग (78 ईस्वी) अभी भी भारत के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है। खगोलीय पिंडों से समय की गणना मे...