मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ। कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ। मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...
आत्महत्या समाधान नही है रे... Suicide is not the solution। Abiiinabu।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जीवन की सार्थकता और संप्रभुता पर कुछ भी लिखना बिल्कुल वैसा ही है जैसे ढाई साल के बच्चे को न्यूटन की गति के नियम समझाना और उनसे यह आशा भी रखना कि वे इन नियमों को समझे भी और इनकी सार्थकता की सिद्धि हेतु आपसे स्वयं प्रश्न पूछें। अर्थात जिस प्रकार छोटे बच्चे को भौतिक संसार के नियमों का अर्थ तक न पता हो, उससे विज्ञान के गूढ़ रहस्यों के बारे में चर्चा करना व्यर्थ ही है। वर्तमान समय में भौतिक संसार की रूपरेखा कुछ इस प्रकार की जा रही है जैसे जो कुछ है अभी है, कल कुछ भी नही है। भौतिक संसाधनों का उपभोग करने के प्रयत्न में हम यह तक भूल जा रहे हैं कि यदि जान है तो जहान है। माना जीवन में कुछ पल अवसाद के आते हैं, कुछ क्षणों में ऐसा लगता है मानो सब कुछ समाप्त हो गया हो, कभी कभी जीवन समाप्त कर इहलोक पारगमन का घृणित विचार भी मस्तिष्क के किसी कोने में पुंजायमान हो सकता है। तब इसका अर्थ यह नही की आप अपना जीवन ही समाप्त करने चलें। इन सब बातों को करने के लिए मेरी स्वयं की आयु अभी बहुत कम है, लेकिन जहां तक मेरा ज्ञान, मेरा विवेक और मेरा दृष्टिकोण जा सकता है; वहां तक मैं इसी निष्कर्ष कर पहुंचा हूं कि यदि जीवन इतना ही आसान होता तो आज धरती पर मनुष्यों से ज्यादा चौपाए ना घूम रहे होते।
मनुष्य एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपना जीवन अपने हाथ से संवार सकता है, अपने जीवन का स्तर ऊंचा उठा सकता है। लेकिन इसके साथ ही मनुष्य ही केवल वह प्राणी भी है जो अपने कृत्यों से अपना जीवन समाप्त भी कर सकता है। जीवन संघर्ष का पर्याय है, यदि जो हम चाहें वह होने लगे तो शायद संसार नियत ना चले। इसलिए आवश्यक है की सामनजस्य बैठा कर अपने अस्तित्व्य को आंका जाए और यह जान लिया जाए कि आपके जीवन पर केवल और केवल आपका अधिकार नही है। मैं Right to Privacy की बात नही कर रहा, मैं बात कर रहा हूं, मैं बात कर रहा हूं, इस युवा पीढ़ी से जो केवल अधिकारों के बारे में बात करना जानती है, और जब उनसे कोई कर्तव्यों के बारे में बात करने लगता है तब यही युवा पीढ़ी अपराधी भाव से भर कर जीवन समाप्त करने को बड़ा ही साहसी कृत्य मान लेती है।मेरी मां मुझसे जब इस संबंध में बात करती है, तब हमेशा कहती है कि जीवन की चुनौतियों से भागना साहस नहीं, जीवन में डटे रहे कर विपदाओं से पार पाना साहस है। यदि आप साहसी हैं तो समस्याओं को पीठ मत दिखाओ उनका सामना करो स्वयं को शांति मिलेगी आपका परिवार भी सुखी रहेगा।
-Abiiinabu
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