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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

India's Stand on Russia- Ukraine Conflict| Russia Ukraine Conflict में भारत किसका साथ दे रहा है

India's stand on Russia-Ukraine Conflict
India's stand on Russia-Ukraine Conflict

कहते हैं अगर किसी इंसान को अपने आने वाले वक्त के हालात जानने हूं तो उसे अपने अतीत में किए हुए कर्मों को याद करना चाहिए। आज जब रूस और यूक्रेन में भयंकर युद्ध चल रहा है उसी समय दुनिया के चौधरी बने अमेरिका को अचानक से विश्व शांति की चिंता सताने लगी है। चिंता इसीलिए क्योंकि यूक्रेन को अमेरिका अपने पाले में लेना चाहता है और रूस ऐसा होने नहीं देना चाहता। इसीलिए रूस को रोकने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूनाइटेड नेशंस के सिक्योरिटी काउंसिल में एक प्रस्ताव लेकर आया जिसके अंतर्गत रूस पर प्रतिबंध एवं युद्ध समाप्त करने की चेतावनी दी थी। प्रस्ताव को पारित करवाने के लिए उसे विभिन्न देशों का सहयोग चाहिए था जिसमें भारत भी एक था। लेकिन भारत ने अमेरिका की उम्मीदों को धता बताते हुए नाही अमेरिका के पक्ष में और ना ही रूस के पक्ष में मतदान किया। यानी कि भारत अब औपचारिक रूप से तटस्थ की भूमिका निभा रहा है। भारत के साथ-साथ चीन और यूएई ने भी तटस्थ की भूमिका को ही चुना है। आइए देखते हैं कि इन 3 देशों की रणनीति इस दो द्रव्य युद्ध पर क्या होने वाली है-
 
चीन China
अपनी आजादी से लेकर आज तक चीन ने हमेशा ही रूस के पद चिन्हों का पालन किया है। जब रूस में समाजवाद आया उसके बाद पूरी दुनिया में सबसे स्थाई एवं मजबूत तरीके से जहां समाजवाद आया है वह चीन ही है। अपनी व्यापक रणनीति कूटनीतिक रिश्ते एवं व्यापारिक समझता को चीन हमेशा ही रूस के पक्ष में करता हुआ आया है इसीलिए चीन द्वारा रूस का विरोध ना करना पहले से ही ज्ञात था।

यूएई UAE
वर्ष 2019 से यूनाइटेड अरब एमिरेट्स रूस के साथ होने वाले हथियारों के सौदे में बहुत बड़ी वृद्धि कर चुका है। वर्ष 2019 में यूएई ने 710 मिलीयन डॉलर के एंटी टैंक हथियार रूस से खरीदे थे जिस कारण यूएई भी रूस का विरोध ना करने की स्थिति में है।
इसके साथ ही ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर भी यूएई रूस का मुंह देखता है। मध्य एशिया में सऊदी अरब और यूएई हमेशा से यह चाहते हैं कि रूस के द्वारा ईरान को दी जाने वाली उसकी मदद में कमी आए जिस कारण मध्य एशिया में यह दोनों देश अपनी शक्तियां बड़ा पाएं। ईरान के साथ रूस के संबंधों को कच्चा करने के लिए यूएई ने रूस के साथ रक्षा सौदे किए हैं जिसकी वजह से रूस भी यूएई को निराश नहीं करना चाहेगा।
इसके साथ ही यूएई रूस के साथ मिलकर पूरी दुनिया में तेल के दाम तय करता है। जिसकी वजह से दोनों देशों को बहुत फायदा होता है यदि यूएई भी रूस का विरोध करेगा तो निश्चित तौर पर उसके अपने फायदे में कमी आएगी।

भारत India
1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध। शायद पाकिस्तान से तकनीकी रणनीति को आंख में में कुछ कमी हुई थी इसी वजह से होने लगा कि वह भारत को युद्ध में हरा सकते हैं। लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तो दुनिया का मानचित्र बदलने की तैयारी से ही बैठी हुई थी। जैसे ही पाकिस्तान ने भारत पर युद्ध घोषित किया भारत के सेना ने भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू किया और देखते ही देखते पाकिस्तान को यह पता चल गया कि शायद उन्हें अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की है। भारत से पढ़ने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई। अमेरिका को जब यह पता चला कि भारत की सैन्य शक्ति पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है और वह पाकिस्तान में चले आ रहे पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के उपद्रव को शांत कर देना चाहता है जिसके लिए वह पाकिस्तान का विभाजन भी कर देगा तो इसे रोकने के लिए अमेरिका ने यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में साफ तौर पर यह लिखा था कि भारत तुरंत ही युद्धविराम करें और पाकिस्तान को माफ कर दे। लेकिन इस प्रस्ताव पर तात्कालिक सोवियत सरकार ने अपनी वीटो पावर का प्रयोग करते हुए वीटो लगा दिया। सोवियत संघ के वीटो करने के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और भारत युद्ध जीत गया। अब भारत रूस के खिलाफ वोट करें भी तो करें किस मुंह से। लेकिन भारत की रणनीति सदैव सही गुटनिरपेक्ष रहने की रही है जिस कारण वह रूस का समर्थन भी नहीं कर सकता और रूस का विरोध भी नहीं कर सकता इसीलिए भारत ने इस समय तटस्थ रहने की भूमिका चुनी है। वैश्विक समाज रूस के खिलाफ वोट ना देने को रूस का समर्थन करना ही समझता है। आगामी कुछ हफ्तों में ही जापान में QUAD की एक बैठक होने वाली है जिसमें जापान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ साथ भारत भी प्रतिभाग करेगा। तब भारत को इन सभी देशों के सामने रूस का समर्थन करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। आने वाले समय में देखते हैं कि भारत किस प्रकार की रणनीति अपनाता है। 

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