मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ। कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ। मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...
| India's stand on Russia-Ukraine Conflict |
चीन China
अपनी आजादी से लेकर आज तक चीन ने हमेशा ही रूस के पद चिन्हों का पालन किया है। जब रूस में समाजवाद आया उसके बाद पूरी दुनिया में सबसे स्थाई एवं मजबूत तरीके से जहां समाजवाद आया है वह चीन ही है। अपनी व्यापक रणनीति कूटनीतिक रिश्ते एवं व्यापारिक समझता को चीन हमेशा ही रूस के पक्ष में करता हुआ आया है इसीलिए चीन द्वारा रूस का विरोध ना करना पहले से ही ज्ञात था।
यूएई UAE
वर्ष 2019 से यूनाइटेड अरब एमिरेट्स रूस के साथ होने वाले हथियारों के सौदे में बहुत बड़ी वृद्धि कर चुका है। वर्ष 2019 में यूएई ने 710 मिलीयन डॉलर के एंटी टैंक हथियार रूस से खरीदे थे जिस कारण यूएई भी रूस का विरोध ना करने की स्थिति में है।
इसके साथ ही ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर भी यूएई रूस का मुंह देखता है। मध्य एशिया में सऊदी अरब और यूएई हमेशा से यह चाहते हैं कि रूस के द्वारा ईरान को दी जाने वाली उसकी मदद में कमी आए जिस कारण मध्य एशिया में यह दोनों देश अपनी शक्तियां बड़ा पाएं। ईरान के साथ रूस के संबंधों को कच्चा करने के लिए यूएई ने रूस के साथ रक्षा सौदे किए हैं जिसकी वजह से रूस भी यूएई को निराश नहीं करना चाहेगा।
इसके साथ ही यूएई रूस के साथ मिलकर पूरी दुनिया में तेल के दाम तय करता है। जिसकी वजह से दोनों देशों को बहुत फायदा होता है यदि यूएई भी रूस का विरोध करेगा तो निश्चित तौर पर उसके अपने फायदे में कमी आएगी।
भारत India
1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध। शायद पाकिस्तान से तकनीकी रणनीति को आंख में में कुछ कमी हुई थी इसी वजह से होने लगा कि वह भारत को युद्ध में हरा सकते हैं। लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तो दुनिया का मानचित्र बदलने की तैयारी से ही बैठी हुई थी। जैसे ही पाकिस्तान ने भारत पर युद्ध घोषित किया भारत के सेना ने भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू किया और देखते ही देखते पाकिस्तान को यह पता चल गया कि शायद उन्हें अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की है। भारत से पढ़ने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई। अमेरिका को जब यह पता चला कि भारत की सैन्य शक्ति पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है और वह पाकिस्तान में चले आ रहे पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के उपद्रव को शांत कर देना चाहता है जिसके लिए वह पाकिस्तान का विभाजन भी कर देगा तो इसे रोकने के लिए अमेरिका ने यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में साफ तौर पर यह लिखा था कि भारत तुरंत ही युद्धविराम करें और पाकिस्तान को माफ कर दे। लेकिन इस प्रस्ताव पर तात्कालिक सोवियत सरकार ने अपनी वीटो पावर का प्रयोग करते हुए वीटो लगा दिया। सोवियत संघ के वीटो करने के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और भारत युद्ध जीत गया। अब भारत रूस के खिलाफ वोट करें भी तो करें किस मुंह से। लेकिन भारत की रणनीति सदैव सही गुटनिरपेक्ष रहने की रही है जिस कारण वह रूस का समर्थन भी नहीं कर सकता और रूस का विरोध भी नहीं कर सकता इसीलिए भारत ने इस समय तटस्थ रहने की भूमिका चुनी है। वैश्विक समाज रूस के खिलाफ वोट ना देने को रूस का समर्थन करना ही समझता है। आगामी कुछ हफ्तों में ही जापान में QUAD की एक बैठक होने वाली है जिसमें जापान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ साथ भारत भी प्रतिभाग करेगा। तब भारत को इन सभी देशों के सामने रूस का समर्थन करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। आने वाले समय में देखते हैं कि भारत किस प्रकार की रणनीति अपनाता है।
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