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Indo China war when India defeated China

  1965 में सगत सिंह की जिद से नाथू-ला पर चीनियों का कब्जा नहीं हो पाया था, जिसके कारण भारतीय सेना को टैक्टिकल एडवांटेज मिली हुई थी। चीनी चाह कर भी आगे नहीं बढ़ सकते थे। चीनियों ने बंदूक की जगह लाउडस्पीकर का सहारा लिया। वे लाउडस्पीकर पर हिंदी और अंग्रेजी में भारतीय सैनिकों को 1962 की हार की याद दिलाते, उनके कपड़ों, कम सुविधाओं, कम वेतन को लेकर ताने मारते। कहते कि देखो, तुम्हारे अफसर तो मजे में एसी ऑफिसों में बैठे रहते हैं, और तुम्हें यहां मरने के लिए भेज दिया गया है।  सगत सिंह ने लाउडस्पीकर का जवाब लाउडस्पीकर से दिया। उन्होंने मैंडेरियन चाइनीज में रिकॉर्डेड मैसेज प्रसारित करने शुरू कर दिए। वो भी लगातार, लूप में।  बात इतनी ही होती तो कोई दिक्कत नहीं थी। पर चीनी जब-तब दौरे पर निकली छोटी फौजी टुकड़ियों (पेट्रोलिंग पार्टीज) से बदसलूकी करते। एक बार तो छिपकर उन्होंने गोली भी चला दी जिससे 17 असम राइफल्स के दो जवान मारे गए। सीमा निर्धारित तो थी नहीं। चीनियों का कहना था कि ये टुकड़ी चीनी क्षेत्र में घुस आई थी। सगत सिंह ने रोज-रोज की इस चिकचिक से परेशान होकर कोर्प्स कमांडर से बात की...

What is Russia- Ukraine Conflict |यूक्रेन और रूस के बीच का सारा लफड़ा क्या है?

Russia Ukraine Conflict
Russia-Ukraine Conflict
  • History of Russia- Ukraine Conflict बवाल की जड़ -

बात है सन 1991 की। उस समय दुनिया का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा देश हुआ करता था सोवियत संघ रूस, यानी कि यू एस एस आर यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक। जिसे 1922 की बेलचोविक क्रांति के बाद व्लादिमीर लेनिन ने दुनिया के सामने लाया था। लेकिन 1991 आते-आते दुनिया का सबसे बड़ा देश 15 अलग-अलग देशों में टूट गया। अब देश कौन-कौन से थे, एक बार जरा इन पर नजर डाल लेते हैं
सबसे पहले और सबसे बड़ा भाग बना-
  1. रूस
  2. इस्टोनिया
  3. लातविया 
  4. लिथुआनिया 
  5. बेलारूस 
  6. यूक्रेन 
  7. माल्टोवा 
  8. जॉर्जिया 
  9. आर्मेनिया 
  10. अज़रबैजान 
  11. कजाकिस्तान 
  12. उज़्बेकिस्तान 
  13. तुर्कमेनिस्तान 
  14. किर्गिस्तान 
  15. और ताजिकिस्तान
ussr

अगर आप मैप को समझ पा रहे हैं तो आप देखेंगे कि छठे नंबर का जो देश है वह है यूक्रेन। और यूक्रेन भौगोलिक दृष्टि से रूस से टूटकर बनने वाला वह देश है जो आधा यूरोप में आता है और आधा एशिया में आता है। यूरोप में आने वाले सभी देशों को यूरोपीय संघ एवं नाटो की सदस्यता प्राप्त करने के योग्य होते हैं।

  • NATO क्या है Role of NATO in Russia- Ukraine Conflict-

अब आप पूछेंगे कि नाटो क्या है तो NATO नाटो का मतलब है नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन जिससे नॉर्थ अटलांटिक गठबंधन भी कहते हैं यह अंतर राज्य सैन्य गठबंधन है जिसमें यूरोप की 27 देश आते हैं दो नॉर्थ अमेरिका के देश आते हैं और एक यूरेशियन देश भी आता है। यह गठबंधन इसलिए बनाया गया था कि 27 यूरोपीय देशों के साथ साथ बाकी के 3 देशों पर भी यदि कोई अन्य देश आक्रमण करता है, तो ऐसा माना जाएगा कि उसने उन सभी 30 देशों पर आक्रमण किया है। जिस कारण इन सभी छोटे देशों की सुरक्षा की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। सुरक्षा के साथ-साथ इन सभी देशों ने अपने देशों में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करने के लिए भी एक संगठन बनाया हुआ है जिसके अंतर्गत यदि किसी संसाधन की किसी देश को आवश्यकता है तो वह उसे कम कीमत पर प्राप्त कर सकता है।

  • अब थोड़ा यूक्रेन के बारे में भी जान लेते हैं Where is Ukraine-

यूक्रेन एक संप्रभु राज्य है जो 233000 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करता है। यूक्रेन USSR सोवियत संघ के घटक गणराज्य में से एक था, और 30 दिसंबर 1922 को सोवियत संघ में भर्ती कराया गया था। सोवियत यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य भी था लेकिन ऑल यूनियन राज ने अन्य देशों से संबंधित मामलों में अपने कानूनी प्रतिनिधि के रूप में काम किया जो यूएसएसआर का हिस्सा नहीं थे। सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन एसएसआर का नाम बदलकर यूक्रेन कर दिया गया और इसके नए संविधान को 28 जून 1996 को अनुमोदित किया गया।
ukraine map
अपनी स्वतंत्रता के बाद यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सीट बरकरार रखी और अपनी विदेशी संपत्ति हिस्सेदारी की वसूली की उम्मीद में रूसी संघ के खिलाफ विदेशी अदालतों में आरोपों को जारी रखा। जिसकी वजह से दोनों नए देशों रूस और यूक्रेन के बीच संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया।

  • पुतिन की चिंता Russia's Side in Russia Ukraine Conflict-

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लगता है कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बन गया तो नाटो के सदस्य देशों जैसे अमेरिका जो कि रूस का धुर विरोधी है, उसके साथ यूक्रेन की सीमा बहुत अधिक पास आ जाएगी जो निकट भविष्य में युद्ध की स्थिति में रूस के लिए चिंता का विषय होगा। इसीलिए रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन नाटो का सदस्य बने। नाटो का सदस्य बनने के साथ ही यूक्रेन के पास अपने प्राकृतिक संसाधनों को अन्य देशों को बेचने की अतिरिक्त क्षमता भी मिल जाएगी। जोकि रूस जैसे देशों को जो प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने के साथ-साथ सस्ती दरों पर अपने पड़ोसी राज्यों से प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध करते हैं, दिक्कत हो जाएगी। इसीलिए रूस ने सन 2014 में यूक्रेन के हिस्से क्रीमिया पर अपना आधिपत्य कर लिया और उसे अपने हिस्से में मिला लिया। जिसके बाद रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ G-8 के देशों ने उसे अपने संगठन से निकाल भी दिया था। लेकिन रूस कहां मानने वाला है। इसीलिए अब जब यूक्रेन ने स्वयं को फिर से नाटो का सदस्य बनाने की पेशकश की तो रूस भड़क गया। उसने नाटो के सदस्यों और विशेषकर अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बना तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। और इस बार आक्रमक कार्यवाही करने के उद्देश्य से रूस ने पिछले हफ्ते ही यूक्रेन में रूस के समर्थकों को एक अलग देश बना दिया। 
ukraine new countries

  • Importance of Ukraine, Why Putin wants Ukraine-

यूक्रेन, यूरोप में रूस के बाद क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। जिसके पास अकेले काला सागर ब्लैक सी में 4 बड़े बंदरगाह हैं, इसके साथ साथ यूक्रेन नाटो के चार सदस्य देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। रूस चाहता है कि नाटो की सेनाएं यूक्रेन कभी न पहुंचे जिस कारण यूक्रेन, रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक बफर स्टेट बन कर रहे।

  • Effect of War on Ukraine-

अगर युद्ध होता है, तो रूस के आगे यूक्रेन टिक ही भी पाएगा और रूस बड़ी आसानी से यूक्रेन को अपने में मिला लेगा। लेकिन उसके बाद उत्पन्न होने वाली समस्याएं दुनिया की मुश्किलें बढ़ा देंगी।
यूक्रेन यूरोप में मक्का और गेंहू का बड़ा निर्यातक है, यदि यूक्रेन अनाज का निर्यात नहीं करेगा तो यूरोपीय देशों की स्थिति खराब हो सकती है।
अभी यूक्रेन से आने वाली प्राकृतिक गैस तुर्की, और भूमध्यीय देशों को सस्ती पड़ती है, यदि इन संसाधनों पर रूस का अधिपत्य हो गया, तो प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।

  • Demands of Russia to avoid War-

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि यदि नाटो के देश उनकी तीन शर्तें मान लें तो युद्ध टाला जा सकता है.
  • क्रीमिया, जिसे रूस ने 2014 में यूक्रेन से ही कब्जा किया था, को रूस का हिस्सा माना जाए।
  • यूक्रेन कभी भी नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा।
  • और
  • पश्चिमी देश अपनी सेना और हथियार यूक्रेन भेजना बंद करें।

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