सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

What is Russia- Ukraine Conflict |यूक्रेन और रूस के बीच का सारा लफड़ा क्या है?

Russia Ukraine Conflict
Russia-Ukraine Conflict
  • History of Russia- Ukraine Conflict बवाल की जड़ -

बात है सन 1991 की। उस समय दुनिया का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा देश हुआ करता था सोवियत संघ रूस, यानी कि यू एस एस आर यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक। जिसे 1922 की बेलचोविक क्रांति के बाद व्लादिमीर लेनिन ने दुनिया के सामने लाया था। लेकिन 1991 आते-आते दुनिया का सबसे बड़ा देश 15 अलग-अलग देशों में टूट गया। अब देश कौन-कौन से थे, एक बार जरा इन पर नजर डाल लेते हैं
सबसे पहले और सबसे बड़ा भाग बना-
  1. रूस
  2. इस्टोनिया
  3. लातविया 
  4. लिथुआनिया 
  5. बेलारूस 
  6. यूक्रेन 
  7. माल्टोवा 
  8. जॉर्जिया 
  9. आर्मेनिया 
  10. अज़रबैजान 
  11. कजाकिस्तान 
  12. उज़्बेकिस्तान 
  13. तुर्कमेनिस्तान 
  14. किर्गिस्तान 
  15. और ताजिकिस्तान
ussr

अगर आप मैप को समझ पा रहे हैं तो आप देखेंगे कि छठे नंबर का जो देश है वह है यूक्रेन। और यूक्रेन भौगोलिक दृष्टि से रूस से टूटकर बनने वाला वह देश है जो आधा यूरोप में आता है और आधा एशिया में आता है। यूरोप में आने वाले सभी देशों को यूरोपीय संघ एवं नाटो की सदस्यता प्राप्त करने के योग्य होते हैं।

  • NATO क्या है Role of NATO in Russia- Ukraine Conflict-

अब आप पूछेंगे कि नाटो क्या है तो NATO नाटो का मतलब है नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन जिससे नॉर्थ अटलांटिक गठबंधन भी कहते हैं यह अंतर राज्य सैन्य गठबंधन है जिसमें यूरोप की 27 देश आते हैं दो नॉर्थ अमेरिका के देश आते हैं और एक यूरेशियन देश भी आता है। यह गठबंधन इसलिए बनाया गया था कि 27 यूरोपीय देशों के साथ साथ बाकी के 3 देशों पर भी यदि कोई अन्य देश आक्रमण करता है, तो ऐसा माना जाएगा कि उसने उन सभी 30 देशों पर आक्रमण किया है। जिस कारण इन सभी छोटे देशों की सुरक्षा की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। सुरक्षा के साथ-साथ इन सभी देशों ने अपने देशों में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करने के लिए भी एक संगठन बनाया हुआ है जिसके अंतर्गत यदि किसी संसाधन की किसी देश को आवश्यकता है तो वह उसे कम कीमत पर प्राप्त कर सकता है।

  • अब थोड़ा यूक्रेन के बारे में भी जान लेते हैं Where is Ukraine-

यूक्रेन एक संप्रभु राज्य है जो 233000 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करता है। यूक्रेन USSR सोवियत संघ के घटक गणराज्य में से एक था, और 30 दिसंबर 1922 को सोवियत संघ में भर्ती कराया गया था। सोवियत यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य भी था लेकिन ऑल यूनियन राज ने अन्य देशों से संबंधित मामलों में अपने कानूनी प्रतिनिधि के रूप में काम किया जो यूएसएसआर का हिस्सा नहीं थे। सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन एसएसआर का नाम बदलकर यूक्रेन कर दिया गया और इसके नए संविधान को 28 जून 1996 को अनुमोदित किया गया।
ukraine map
अपनी स्वतंत्रता के बाद यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सीट बरकरार रखी और अपनी विदेशी संपत्ति हिस्सेदारी की वसूली की उम्मीद में रूसी संघ के खिलाफ विदेशी अदालतों में आरोपों को जारी रखा। जिसकी वजह से दोनों नए देशों रूस और यूक्रेन के बीच संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया।

  • पुतिन की चिंता Russia's Side in Russia Ukraine Conflict-

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लगता है कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बन गया तो नाटो के सदस्य देशों जैसे अमेरिका जो कि रूस का धुर विरोधी है, उसके साथ यूक्रेन की सीमा बहुत अधिक पास आ जाएगी जो निकट भविष्य में युद्ध की स्थिति में रूस के लिए चिंता का विषय होगा। इसीलिए रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन नाटो का सदस्य बने। नाटो का सदस्य बनने के साथ ही यूक्रेन के पास अपने प्राकृतिक संसाधनों को अन्य देशों को बेचने की अतिरिक्त क्षमता भी मिल जाएगी। जोकि रूस जैसे देशों को जो प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने के साथ-साथ सस्ती दरों पर अपने पड़ोसी राज्यों से प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध करते हैं, दिक्कत हो जाएगी। इसीलिए रूस ने सन 2014 में यूक्रेन के हिस्से क्रीमिया पर अपना आधिपत्य कर लिया और उसे अपने हिस्से में मिला लिया। जिसके बाद रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ G-8 के देशों ने उसे अपने संगठन से निकाल भी दिया था। लेकिन रूस कहां मानने वाला है। इसीलिए अब जब यूक्रेन ने स्वयं को फिर से नाटो का सदस्य बनाने की पेशकश की तो रूस भड़क गया। उसने नाटो के सदस्यों और विशेषकर अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बना तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। और इस बार आक्रमक कार्यवाही करने के उद्देश्य से रूस ने पिछले हफ्ते ही यूक्रेन में रूस के समर्थकों को एक अलग देश बना दिया। 
ukraine new countries

  • Importance of Ukraine, Why Putin wants Ukraine-

यूक्रेन, यूरोप में रूस के बाद क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। जिसके पास अकेले काला सागर ब्लैक सी में 4 बड़े बंदरगाह हैं, इसके साथ साथ यूक्रेन नाटो के चार सदस्य देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। रूस चाहता है कि नाटो की सेनाएं यूक्रेन कभी न पहुंचे जिस कारण यूक्रेन, रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक बफर स्टेट बन कर रहे।

  • Effect of War on Ukraine-

अगर युद्ध होता है, तो रूस के आगे यूक्रेन टिक ही भी पाएगा और रूस बड़ी आसानी से यूक्रेन को अपने में मिला लेगा। लेकिन उसके बाद उत्पन्न होने वाली समस्याएं दुनिया की मुश्किलें बढ़ा देंगी।
यूक्रेन यूरोप में मक्का और गेंहू का बड़ा निर्यातक है, यदि यूक्रेन अनाज का निर्यात नहीं करेगा तो यूरोपीय देशों की स्थिति खराब हो सकती है।
अभी यूक्रेन से आने वाली प्राकृतिक गैस तुर्की, और भूमध्यीय देशों को सस्ती पड़ती है, यदि इन संसाधनों पर रूस का अधिपत्य हो गया, तो प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।

  • Demands of Russia to avoid War-

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि यदि नाटो के देश उनकी तीन शर्तें मान लें तो युद्ध टाला जा सकता है.
  • क्रीमिया, जिसे रूस ने 2014 में यूक्रेन से ही कब्जा किया था, को रूस का हिस्सा माना जाए।
  • यूक्रेन कभी भी नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा।
  • और
  • पश्चिमी देश अपनी सेना और हथियार यूक्रेन भेजना बंद करें।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubt please let me know.

Best From the Author

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Book Review: Chitralekha by Bhagwati Charan Verma

 चित्रलेखा – एक दार्शनिक कृति की समीक्षा लेखक: भगवती चरण वर्मा   प्रस्तावना   हिंदी साहित्य के इतिहास में *चित्रलेखा* एक ऐसी अनूठी रचना है जिसने पाठकों को न केवल प्रेम और सौंदर्य के मोह में बाँधा, बल्कि पाप और पुण्य की जटिल अवधारणाओं पर गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित किया। भगवती चरण वर्मा का यह उपन्यास 1934 में प्रकाशित हुआ था और यह आज भी हिंदी गद्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। इसमें दार्शनिक विमर्श, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और सामाजिक यथार्थ का ऐसा संलयन है जो हर युग में प्रासंगिक बना रहता है । मूल विषय और उद्देश्य   *चित्रलेखा* का केंद्रीय प्रश्न है — "पाप क्या है?"। यह उपन्यास इस अनुत्तरित प्रश्न को जीवन, प्रेम और मानव प्रवृत्तियों के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करता है। कथा की बुनियाद एक बौद्धिक प्रयोग पर टिकी है जिसमें महात्मा रत्नांबर दो शिष्यों — श्वेतांक और विशालदेव — को संसार में यह देखने भेजते हैं कि मनुष्य अपने व्यवहार में पाप और पुण्य का भेद कैसे करता है। इस प्रयोग का परिणाम यह दर्शाता है कि मनुष्य की दृष्टि ही उसके कर्मों को पाप या पुण्य बनाती है। लेखक...

The Story of Yashaswi Jaiswal

जिस 21 वर्षीय यशस्वी जयसवाल ने ताबड़तोड़ 98* रन बनाकर कोलकाता को IPL से बाहर कर दिया, उनका बचपन आंसुओं और संघर्षों से भरा था। यशस्‍वी जयसवाल मूलरूप से उत्‍तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। वह IPL 2023 के 12 मुकाबलों में 575 रन बना चुके हैं और ऑरेंज कैप कब्जाने से सिर्फ 2 रन दूर हैं। यशस्वी का परिवार काफी गरीब था। पिता छोटी सी दुकान चलाते थे। ऐसे में अपने सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ 10 साल की उम्र में यशस्वी मुंबई चले आए। मुंबई में यशस्वी के पास रहने की जगह नहीं थी। यहां उनके चाचा का घर तो था, लेकिन इतना बड़ा नहीं कि यशस्वी यहां रह पाते। परेशानी में घिरे यशस्वी को एक डेयरी पर काम के साथ रहने की जगह भी मिल गई। नन्हे यशस्वी के सपनों को मानो पंख लग गए। पर कुछ महीनों बाद ही उनका सामान उठाकर फेंक दिया गया। यशस्वी ने इस बारे में खुद बताया कि मैं कल्बादेवी डेयरी में काम करता था। पूरा दिन क्रिकेट खेलने के बाद मैं थक जाता था और थोड़ी देर के लिए सो जाता था। एक दिन उन्होंने मुझे ये कहकर वहां से निकाल दिया कि मैं सिर्फ सोता हूं और काम में उनकी कोई मदद नहीं करता। नौकरी तो गई ही, रहने का ठिकान...

How to face problems in life ब्रह्मभोज | A problem facing blog by Abiiinabu

How to face problems in life, ब्रह्मभोज       एक बार ब्रह्मा जी ने अपने सभी बच्चों को खाने के लिए बुलाया। नियत समय पर जब सभी लोग खाने के लिए पहुंचे तो ब्रह्मा जी ने खाने के लिए एक शर्त रख दी। "अगर तुम लोग खाते समय अपनी कोहनी न मोड़ो तो तुम खाना खा सकते हो " ब्रह्मा जी ने कहा.  खाने के लिए शर्त देख कर सभी लोग विचार करने लगे कि इस समस्या का कैसे समाधान किया जाए।  सबने अलग अलग तरीके अपनाये। कुछ लोगों ने अपने सर मोड़े और खाने को चाटने लगे जिससे वो खाने का सेवन करने लगे। और शास्त्र बताते हैं की वो पशु बने।  कुछ लोग ब्रह्मा जी के इस व्यवहार से रुष्ट हो गए, वो असुर बने।  कुछ लोगों जो जब Problem का Solution समझ न आया तो वो जितना खाना समेट सकते थे उसको समेट के वहां से भाग गए, शास्त्र बताते हैं ऐसे लोग राक्षस बने।  लेकिन कुछ लोग थे जिन्होंने हार नहीं मानी समस्या का समाधान ढूंढ़ने के प्रयास में वो लोग एक दूसरे के सामने वाले को अपने हाथ से खाना खिलाने लगे, कुछ ही देर में उन सब लोगों ने खाना खा लिया और शास्त्र बताते हैं वो लोग देव कहलाये।  वो लोग देव ...

Glorified Kohli

 विराट कोहली ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर इंडियन टीम 2028 के ओलंपिक में गोल्ड मेडल खेलने के लिए उतरती है तो वो सिर्फ एक मैच के लिए रिटायरमेंट छोड़कर उस टीम का हिस्सा बनना चाहेंगे। वैसे तो ये सवाल हाइपोथेटिकल था,पर कुछ लोगो को कोहली के जवाब में निजी स्वार्थ भी दिख सकता है। पर मुझे इस जवाब में बस एक चीज दिखती है, Thirst for Glory, यानी नाम का लालच, legacy trap..अब कहने को बुद्धिजीवी लोग इस भावना में बीस कमियां निकाल सकते है, कि कैसे ये भावना टॉक्सिक है, पर असलियत में यही वो भावना है, जो दिल्ली के मामूली से क्रिकेटर को क्रिकेट का सरताज बनाती है।यही वो भावना है जिसकी वजह से रांची का टिकट कलेक्टर जमी जमाई नौकरी छोड़ देता है, यही वो भावना है जिसकी वजह से रोमांटिक फिल्मों के जमाने में एक मामूली सा आउटसाइडर एक्टर एक साइकोपैथ lover का रोल करने के लिए राजी हो जाता है। कामयाबी, पैसा, ये सब किसी न किसी तरह से मिल ही जाता है,इंसान अपने पोटेंशल का अगर 20% भी झोंक दे,तो ये सब कोई नामुमकिन चीज नहीं है। पर इंसान धोनी कोहली या शाहरुख खान तब बनता है, जब वो ग्लोरी के पीछे भागता है, लीगेसी के पीछे ...