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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

आखिर Indian Students MBBS करने यूक्रेन ही क्यों जाते हैं? Why Ukraine is the prominent choice of Indian Medical Students| #Russiakraineconflict

पिछले 5 दिनों से चली आ रही रूस यूक्रेन युद्ध की बड़ी घटनाओं में भारत के लिए सबसे बुरी खबर यह है कि यूक्रेन की सरकार अब भारतीय छात्रों को यूक्रेन से निकलने के लिए प्रताड़ित कर रही है। यूक्रेन के लिए यह बहुत शर्म की बात है कि जस देश से सबसे ज्यादा विद्यार्थी उनके यहां पढ़ने आते हैं उन्हीं विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया जा रहा है लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर भारतीय छात्र यूक्रेन में ही अपनी मेडिकल की पढ़ाई क्यों करना चाहते हैं?

Why Indian goes Ukraine
Why Indian Medical Students go Ukraine

यूक्रेन की सरकार के दस्तावेजों की माने तो यूक्रेन में तकरीबन 23% विद्यार्थी भारत के हैं। जो एक छोटे देश के लिए बहुत बड़ा आंकड़ा है। और इन 23% विद्यार्थियों में सबसे ज्यादा विद्यार्थी मेडिकल के क्षेत्र के हैं। आखिर ऐसा क्यों क्यों भारतीय मेडिकल के छात्र यूक्रेन को अपनी पहली पसंद बनाते हैं भारत को नहीं आज के इस ब्लॉग में हम आपको इन्हीं कारणों के बारे में बताएंगे

  • Low Fee:-
    यूक्रेन में 6 साल के मेडिकल कोर्स की पढ़ाई का तकरीबन खर्चा लगभग 17 लाख रुपए आता है। वहीं भारत में यही खर्चा 70 लाख से 1 करोड़ भी आ जाता है। भारत में मेडिकल की पढ़ाई का खर्चा अत्यधिक होने के कारण भारत के विद्यार्थी यूक्रेन से MBBS करना अधिक उचित समझते हैं। इससे उनके और उनके परिवार को आर्थिक मदद ही मिलती है। गौरतलब है कि भारत में MBBS के लिए एक साल की फीस लगभग 7 से 10 लाख रुपए आती है वहीं यूक्रेन में यही फीस 3 लाख से 4 लाख के बीच ही होती है।

  • No Entrance Exam :-

भारत के मेडिकल कॉलेजेस में प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थियों को जहां NEET की परीक्षा पास करना अनिवार्य है, वहीं यूक्रेन में ऐसा कुछ भी नही है। यूक्रेन में विद्यार्थी बिना प्रवेश परीक्षा के ही मेडिकल कॉलेजेस में प्रवेश पा सकते हैं। वहीं भारतीय कॉलेजेस के आरक्षण और फीस का अंतर भारतीय विद्यार्थियों के लिए यूक्रेन एक बेहतर विकल्प उपलब्ध करवाता है।

  • Language:-

भारत में मेडिकल की पढ़ाई English Language में ही हो सकती है, वहीं यूक्रेन में विद्यार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार भाषा चुनने का अवसर मिलता है। विद्यार्थी English, Ukrainian aur Russian में से किसी भी भाषा में पढ़ाई कर सकता है। भारतीय विद्यार्थियों को जब भारत में रह कर इंग्लिश में ही पढ़ाई करनी है तो वो यूक्रेन में रहकर कम खर्चे में वो इंग्लिश में पढ़ाई करने को अधिक तवज्जो देता है।

  • यूक्रेन अपने विद्यार्थियों को अलग-अलग छात्रवृत्ति भी प्रदान करता है। विदेशी छात्र भी आसानी से स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी वजह से यूक्रेन एक बेहतर विकल्प साबित होता है।
  • यूक्रेन से डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद यूरोप के किसी भी देश की नागरिकता मिलने में आसानी होती है, और स्वयं यूक्रेन ही अपने देश की नागरिकता देने को प्राथमिकता देता है। जिस कारण यूक्रेन भारतीय विद्यार्थी अधिक जाते हैं।
  • यूक्रेन में पढ़ाई करने आने वाले छात्रों को यूक्रेन सरकार 50% तक यात्रा किराया में छूट देती है।

  • यूक्रेन में पढ़ाई का माहौल यात्रा का टिकट और रहने के लिए स्थान तीनों ही बहुत सस्ते हैं इसीलिए छात्रों को भारत के बजाय यूक्रेन में पढ़ाई करना अधिक पसंद है।

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