"रामायण के लक्ष्मण या महाभारत के कर्ण में से शक्तिशाली कौन थे?" आदर के साथ कहना चाहूंगा कि आपका ये प्रश्न ही अनुचित है। पौराणिक पात्रों की तुलना करते समय हम जो सबसे बड़ी गलती करते हैं, वो वही है जो आपने अपने इस प्रश्न में की है। सदा स्मरण रखें कि कभी भी किसी दो के योद्धाओं की तुलना आपस मे ना करें क्योंकि वो तर्कसंगत नही है। बात यहाँ लक्ष्मण और कर्ण की नहीं है, बात ये भी नहीं है कि कर्ण के स्थान पर यहाँ अर्जुन होते, द्रोण होते, भीष्म होते या कोई और। बात ये है कि एक त्रेतायुग के योद्धा की तुलना एक द्वापरयुग के योद्धा से करना ही गलत है। आपको मेरे उत्तर से निराशा हो सकती है क्यूंकि मैं यहाँ लक्ष्मण और कर्ण का कोई भी तुलनात्मक अध्ययन नहीं करने वाला हूँ। इसका एक कारण ये भी है कि लक्ष्मण से कर्ण या अर्जुन की तुलना करना भी वीरवर लक्ष्मण का अपमान होगा। मैं बस ये साफ़ करना चाहता हूँ कि इस प्रकार के कपोलकल्पना से भरे प्रश्न क्यों अनुचित हैं। अगर आप मुझसे सहमत ना हों तो क्षमा चाहूँगा। जब हम अपने धर्मग्रंथों को पढ़ते हैं तो कई ग्रंथों, विशेषकर पुराणों में अलग-अलग युगों के व्यक्तियों के ...
महेंद्र सिंह धोनी ने छुपने के लिए वो जगह चुनी, जिस पर करोड़ों आँखें लगी हुई थीं! वो जीज़ज़ की इस बात को भूल गए कि "पहाड़ पर जो शहर बना है, वह छुप नहीं सकता!" ठीक उसी तरह, आप आईपीएल में भी छुप नहीं सकते। कम से कम धोनी होकर तो नहीं। अपने जीवन और क्रिकेट में हर क़दम सूझबूझ से उठाने वाले धोनी ने सोचा होगा, एक और आईपीएल खेलकर देखते हैं। यहाँ वे चूक गए। क्योंकि 20 ओवर विकेट कीपिंग करने के बाद उनके बूढ़े घुटनों के लिए आदर्श स्थिति यही रह गई है कि उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा ही न मिले, ऊपरी क्रम के बल्लेबाज़ ही काम पूरा कर दें। बल्लेबाज़ी का मौक़ा मिले भी तो ज़्यादा रनों या ओवरों के लिए नहीं। लेकिन अगर ऊपरी क्रम में विकेटों की झड़ी लग जाए और रनों का अम्बार सामने हो, तब क्या होगा- इसका अनुमान लगाने से वो चूक गए। खेल के सूत्र उनके हाथों से छूट गए हैं। यह स्थिति आज से नहीं है, पिछले कई वर्षों से यह दृश्य दिखाई दे रहा है। ऐसा मालूम होता है, जैसे धोनी के भीतर अब खेलने की इच्छा ही शेष नहीं रही। फिर वो क्यों खेल रहे हैं? उनके धुर-प्रशंसक समय को थाम लेना चाहते हैं। वे नश्वरता के विरुद्ध...