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प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

The Real issue with Tissue Papers| टिशू पेपर इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी दिक्कत क्या आने वाली है?

The Real issue with Tissue Papers | टिशू पेपर इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी दिक्कत क्या आने वाली है? क्या आप जानते हैं कि दुनिया में रोज़ कम से कम 27000 पेड़ काटे जाते हैं। यानी की एक साल में 1 करोड़ पेड़ काट दिए जाते हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पेड़ों से सबसे ज्यादा क्या प्राप्त किया जाता है? अगर आप लकड़ी, फल या दवाइयों की बात कर रहे हैं तो शायद आप गलत हैं। जितने भी पेड़ काटे जाते हैं उन का 75% हिस्सा पेपर बनाने में इस्तेमाल होता है। यानी कि साल में अगर एक करोड़ पेड़ काटे जाते हैं तो 75 लाख पेड़ों से सिर्फ कागज बनाया जाता है। और कागजों के मामले में भी सबसे ज्यादा टिशू पेपर बनाया जाता है। क्या आप Tissue Paper का इस्तेमाल करते हैं? वैसे तो शुरुआत में केवल मृत पेड़ों से ही कागज बनाया जाता था। लेकिन इंसान के लालच और अंधा पैसा इकट्ठा करने की लोलुपता ने हरे पेड़ों को भी काटने पर मजबूर कर दिया। एक शोध के मुताबिक, दुनिया में जितने हरे पेड़ काटे जाते हैं, यदि उसी रफ्तार से पेड़ कटते रहे तो दुनिया के सारे पेड़ आने वाले 100 सालों से पहले ही खत्म हो जाएंगे। और उसके बाद दुनिया का अंजाम बहु...