*आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...
वीर हकीकत राय का जन्म 1719 में पंजाब के सियालकोट नगर में हुआ था। वे अपने पिता भागमल के इकलौते पुत्र थे। श्री भागवत व्यापारी थे पर उनकी इच्छा थी कि उनका पुत्र पढ़ लिखकर बड़ा अधिकारी बने। इसीलिए उन्होंने हकीकत राय को एक मदरसे में फारसी सीखने भेजा। वीर हकीकत राय इस मदरसे में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र मुसलमान थे और पढ़ाने वाले मौलवी जी थे। अपनी प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि के कारण हकीकत राय ने मौलवी जी का मन जीत लिया। अतः वह उसकी पढ़ाई में विशेष ध्यान देने लगे जिस कारण इसके अन्य साथी उससे ईर्ष्या करने लगे। इनमें रशीद और अनवर प्रमुख थे। वह मौका मिलने पर हकीकत को तंग करते और जान से मारने की धमकी देते। एक दिन रशीद और अनवर ने मदरसे से लौटते समय हकीकत की पिटाई करनी चाही। उसके कपड़े फाड़ दिए। भागमल ने दूसरे दिन इस घटना की शिकायत मदरसे में जाकर मौलवी जी से की मौलवी जी ने अनवर तथा रशीद को सजा दी। दूसरे दिन फिर प्रतिशोध लेने की भावना से अनवर और रसीद ने मदरसे से लौटते समय रास्ते में हकीकत को छेड़ने की गरज से उसे कबड्डी खेलने का निमंत्रण दिया। हकीकत में खेलने के प्रति अपनी अनिच्छा प्रकट की। पर जब वे द...