प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...
इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति| The Glorious Revolution The Glorious Revolution गौरवपूर्ण क्रांति, जिसे प्रायः 1688 का अंग्रेजी पुनर्जागरण भी कहते हैं। इसे रक्तहीन क्रांति भी कहा जाता है। इंग्लैंड में 1688 से लेकर 16 से 89 के बीच हुई थी। इस क्रांति का प्रमुख कार्य ब्रिटेन के कैथोलिक राजा जेम्स द्वितीय को उनकी प्रोटेस्टेंट बेटी मेरी और उसके पति विलियम ऑफ़ ऑरेंज जो कि डच थे के द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना है। किसी भी क्रांति की तरह इस क्रांति ने भी वर्षों पुरानी चली आ रही राजशाही, राजा के अधिकारों, एवं राजसत्ता पर सीधा प्रभाव डाला। संवैधानिक संसद की स्थापना एवं उसका क्रियान्वयन इस क्रांति का प्रमुख योगदान है। राजा की निरंकुशता पर लगाम लगाने के लिए इंग्लैंड में सबसे पहला प्रयास 1215 ईस्वी में किया गया था। तब ब्रिटेन के सामंत लोगों ने आपस में मिलकर तात्कालिक राजा को टैक्स में मनचाही वृद्धि करने से रोक लगाने के लिए मैग्नाकार्टा लाया था। मैग्ना कार्टा को किसी भी देश की प्रथम संविधान का एक ड्राफ्ट कहा जा सकता है। इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति : पृष्ठभूमि 1685 में इंग्लैंड के राज सिंहासन ...