सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति| The Glorious Revolution

इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति| The Glorious Revolution

English Revolution
The Glorious Revolution

गौरवपूर्ण क्रांति, जिसे प्रायः 1688 का अंग्रेजी पुनर्जागरण भी कहते हैं। इसे रक्तहीन क्रांति भी कहा जाता है। इंग्लैंड में 1688 से लेकर 16 से 89 के बीच हुई थी। इस क्रांति का प्रमुख कार्य ब्रिटेन के कैथोलिक राजा जेम्स द्वितीय को उनकी प्रोटेस्टेंट बेटी मेरी और उसके पति विलियम ऑफ़ ऑरेंज जो कि डच थे के द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना है।
किसी भी क्रांति की तरह इस क्रांति ने भी वर्षों पुरानी चली आ रही राजशाही, राजा के अधिकारों, एवं राजसत्ता पर सीधा प्रभाव डाला। संवैधानिक संसद की स्थापना एवं उसका क्रियान्वयन इस क्रांति का प्रमुख योगदान है।
राजा की निरंकुशता पर लगाम लगाने के लिए इंग्लैंड में सबसे पहला प्रयास 1215 ईस्वी में किया गया था। तब ब्रिटेन के सामंत लोगों ने आपस में मिलकर तात्कालिक राजा को टैक्स में मनचाही वृद्धि करने से रोक लगाने के लिए मैग्नाकार्टा लाया था। मैग्ना कार्टा को किसी भी देश की प्रथम संविधान का एक ड्राफ्ट कहा जा सकता है।

  • इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति : पृष्ठभूमि

1685 में इंग्लैंड के राज सिंहासन पर जेम्स द्वितीय विराजे। यह वह समय था जब क्रिश्चियनिटी में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच भारी तनाव चल रहा था। और इसी समय में ही राज सिंहासन और ब्रिटिश पार्लियामेंट के साथ थोड़ी बहुत खींचातान भी चल रही थी। राजा जेम्स जो स्वयं कैथोलिक विचारधारा से प्रभावित थे उन्होंने अपने राज्य में कैथोलिक लोगों को पूजा करने की पूर्ण आजादी दे दी और सेना के प्रमुख पदों पर कैथोलिक अफसरों को नियुक्त कर दिया। इंग्लैंड जो कि एक प्रोटेस्टेंट बहुल राज्य था। इस बात से नाराज हो गया और राजा के इन निर्णयों का विरोध करने लगा। लेकिन यह विरोध प्रदर्शन कभी हिंसक और बढ़ाना हो सका क्योंकि जेम्स द्वितीय की कोई भी संतान पुत्र नहीं था.
King James II
King James II

उनकी जितनी भी लड़कियां थी वह सभी प्रोटेस्टेंट थी एवं उनके पति भी प्रोटेस्टेंट थे। इसीलिए इंग्लैंड वासी ये सोच रहे थे कि आज नहीं तो कल जेम्स द्वितीय की मृत्यु के बाद कोई ना कोई राजा प्रोटेस्टेंट धर्म को मानने वाला ही बनेगा। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तो 1688 में आया जब जेम्स द्वितीय की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। और बेटे के जन्म से प्रसन्न राजा ने ये घोषणा कर दी कि मेरा बेटा कैथोलिक होगा और आगे चलकर वही राजा बनेगा। इस घोषणा के बाद इंग्लैंड में भारी विरोध हुआ और हिंसक घटनाएं होने लगी। इंग्लैंड की संसद भी राजा के इस निर्णय से खुश नहीं थी। इसीलिए राजा जेम्स द्वितीय ने कार्यरत संसद को भंग करने की एवं उसकी जगह अपने द्वारा गठित की गई संसद बनाने का प्रयास किया, जो राजा के हर निर्णय को सही साबित करें और राजा निरंकुश बन जाए। लेकिन राजा के इस प्रयास ने इंग्लैंड में बढने वाले उपद्रव को अधिक गहरा और तेज कर दिया।
राजा के बेटे जिसका नाम जेम्स फ्रांसिस एडवर्ड स्टुअर्ट रखा गया था, के जन्म से पहले इंग्लैंड की गद्दी का वारिस जेम्स द्वितीय की बड़ी बेटी मेरी थी। जो कि एक प्रोटेस्टेंट भी थी। लेकिन बेटे के जन्म ने ना केवल मेरी से उसकी राजगद्दी का सपना भी छीन लिया, बल्कि ब्रिटेन के लोगों को कैथोलिक राजा होने का डर भी लगा दिया। जेम्स के बेटे के जन्म ने राजशाही की सत्ता को हमेशा के लिए बदल के रख दिया। क्योंकि पुत्र के रहते पुत्री कभी सिंहासन की वारिस नहीं बन सकती। प्रोटेस्टेंट लोगों को यह डर सताने लगा कि अब शायद कैथोलिक राजा हमेशा के लिए हम पर शासन करेंगे। जिसकी वजह से इंग्लैंड में जगह-जगह कैथोलिक उत्तराधिकारी का विरोध होने लगा और प्रोटेस्टेंट समर्थक गुट सिर उठाने लगे।

  • इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति : क्रांति का आगाज़

नए राजकुमार के जन्म से नाखुश जेम्स द्वितीय के सात राजाओं ने नीदरलैंड के शासक विलियम ऑफ़ ऑरेंज जो जेम्स द्वितीय की पुत्री मेरी के पति भी थे, को इंग्लैंड पर आक्रमण करने के लिए 1688 में आमंत्रित किया।
Wiliam of Orange and Mery
Wiliam of Orange and Mery

William of Orange इंग्लैंड पर आक्रमण करने की अपनी नियत बना चुके थे। लेकिन इंग्लैंड की तरफ से मिले समर्थन में उनका काम बहुत आसान कर दिया। जब यह समाचार जेम्स द्वितीय को पता चला तो उन्होंने अपनी सेना को इकट्ठा तो किया लेकिन मैं मन ही मन हार मान चुके थे। जब उन्होंने विलियम ऑफ ऑरेंज की सेना को युद्ध करने के उद्देश्य से इंग्लैंड में घुसता पाया तो वे अपनी जान बचाने के उद्देश्य से फ्रांस भाग गए। फ्रांस एक कैथोलिक राष्ट्र था। लेकिन जेम्स द्वितीय के फ्रांस तक पहुंचने का यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा। राज परिवार के कुछ सदस्य अंतिम समय में पाला बदलकर नीदरलैंड के शासक के साथ हो गए। यह देखकर जेम्स द्वितीय का दिल टूट गया और उनकी तबीयत पहले से ज्यादा खराब रहने लगी। फ्रांस में उस समय जेम्स द्वितीय के चचेरे भाई लुईस 14वें का शासन था। अपना राज्य एवं अपने परिवार को इस प्रकार जाता देख जेम्स द्वितीय की 1701 में फ्रांस में ही मृत्यु हो गई।  और जब राजा इंग्लैंड छोड़कर भाग गए तो अपने आप ही नीदरलैंड का शासक जीत गया।
इस प्रकार बिना एक भी खून की बूंद बहाए बिना इंग्लैंड में सत्ता परिवर्तन हो चुका था। इंग्लैंड की क्रांति को गौरवपूर्ण क्रांति इसीलिए कहते हैं क्योंकि यहां पर किसी की भी जान नहीं गई।
इधर इंग्लैंड में विलियम ऑफ़ ऑरेंज युद्ध जीत चुके थे, लेकिन सत्ता अब संसद ने हथिया ली थी। संसद ने युद्ध को बढ़ावा देते समय साफ कहा था कि यदि आप युद्ध जीत गए तो आप केवल नाम के राजा बनेंगे। असली शक्ति संसद के पास रहेगी। जिसे विलियम ऑफ ऑरेंज ने स्वीकार कर लिया था।

  • इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति : क्रांति के बाद

इंग्लैंड की संसद, राजा की निरंकुशता से परेशान तो थी ही। साथ ही साथ वह देशवासियों के साथ हो रहे अत्याचार के प्रति दयालु भी थी। इसीलिए 1689 में जब ब्रिटेन में सत्ता का तख्तापलट हुआ और सत्ता संसद के हाथों में आई तो संसद ने आम नागरिक को सुरक्षा एवं स्वतंत्रता प्रदान करते हुए कुछ अधिकार प्रदान किए। जिन्हें इंग्लैंड वासी बहुत समय से राजा से मांगते आ रहे थे हिंदू राजा ने उनकी एक न सुनी थी। इंग्लैंड की संसद ने अपने आम नागरिकों को जो अधिकार प्रदान किए उन्हें Bill Of Rights कहा गया। यह बिल ऑफ राइट्स बाद में पूरी दुनिया में लोकतंत्र एवं दवे कुछ लोगों को अधिकार प्रदान करने के लिए एक मानक इकाई बन गया। अमेरिका, फ्रांस, और भारत में भी Bill Of Rights का उपयोग किया जाता है, जो यहां की संविधान ने यहां के निवासियों को प्रदान किए हैं। 

टिप्पणियाँ

Best From the Author

Ten Dikpalas of Hindu Religion

 The 10 Dikpàlas (deities presiding over the ten directions) in Sanatan Dharm 1. Kubera - Guardian of the North Direction 2.Yamraj - Guardian of the South Direction 3. Indra - Guardian of the East Direction 4. Varuna - Guardian of the West Direction 5.Agni -Guardian of the South-East Direction 6.Nirrti - Guardian of the South-West Direction 7. Vàyu - Guardian of the North-West Direction 8. Īśāna - Guardian of the North East Direction 9. Bhagwan Brahmà - Guardian of the Zenith (Highest point in the celestial sphere) 10. Sesa - Guardian of the Nadir (The point in the celestial sphere which is directly opposite the zenith)

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

The History of Gujarati Calendar

प्राचीन काल से ही हिंदुओं द्वारा भारत में दो प्रकार की कालानुक्रमिक प्रणालियों का उपयोग किया जाता रहा है। पहले को किसी ऐतिहासिक घटना से गणना करने के लिए वर्षों की आवश्यकता होती है। दूसरा किसी खगोलीय पिंड की स्थिति से गणना शुरू करता है। समय-समय पर और भारत के विभिन्न हिस्सों में एक ऐतिहासिक घटना की गणना अलग-अलग रही है। गुजरात, दक्षिण के कुछ हिस्से और आसपास के क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली सबसे हालिया ऐतिहासिक घटना विक्रम युग (58 ईसा पूर्व) है। शकों पर राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिक जीत के बाद विक्रम युग की स्थापना हुई। इस युग में गिने जाने वाले वर्षों को आमतौर पर विक्रमसंवत या केवल संवत शब्द से दर्शाया जाता है। वे बरसों बीत चुके हैं। उत्तर में प्रथा हर साल चैत्र (मार्च-अप्रैल) से शुरू होती है और हर महीने पूर्णिमा से। लेकिन दक्षिण के कुछ हिस्सों में और गुजरात में साल की शुरुआत कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) से होती है और महीनों की शुरुआत अमावस्या से होती है। शक, या शालिवाहन युग (78 ईस्वी) अभी भी भारत के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है। खगोलीय पिंडों से समय की गणना मे...

Tyagpatra by Jainendra Book Review

 त्यागपत्र: एक अंतर्मुखी पीड़ा की कहानी जैनेंद्र कुमार का उपन्यास 'त्यागपत्र' भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह उपन्यास मृणाल की कहानी है, जो अपने पति प्रमोद के द्वारा त्याग दी जाती है। कहानी मृणाल के अंतर्मुखी पीड़ा, सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संघर्ष को दर्शाती है। जैनेंद्र कुमार की लेखन शैली सरल और गहरी है। उन्होंने मृणाल के मन की उलझनों और भावनात्मक जटिलताओं को बहुत ही संवेदनशील तरीके से चित्रित किया है। कहानी में सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच का द्वंद्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मृणाल का त्यागपत्र केवल एक शारीरिक त्यागपत्र नहीं है, बल्कि यह उसके आंतरिक संघर्ष और मुक्ति की खोज का प्रतीक है। उपन्यास में प्रमोद का चरित्र भी जटिल है। वह एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो सामाजिक दबावों और अपनी कमजोरियों के कारण मृणाल को त्याग देता है। यह उपन्यास उस समय के समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्षों पर प्रकाश डालता है। 'त्यागपत्र' एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को सोचने पर मजबूर करता है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजि...