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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

Statue of Equality: Who is Ramanuja| जानिए कौन थे श्री रामानुजाचार्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद शहर में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बैठी हुई मूर्ति जिसकी लंबाई 216 फुट है, का आज अनावरण किया। इसे स्टैचू आफ इक्वलिटी बोला जा रहा है इसका दूसरा नाम रामानुजा स्टैचू भी है। श्री रामानुजन को भक्ति आंदोलन में समाज के सभी वर्ग एवं सभी तबकों को एक साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करने का श्रेया जाता है। इसीलिए श्री रामानुज के स्टैचू को स्टैचू आफ इक्वलिटी कहा गया है। स्टैचू आफ इक्वलिटी पंच लोहा यानी कि सोना चांदी तांबा पीतल और जस्ता से मिलाकर बना है। जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1000 करोड़ रुपए है। यह सारा पैसा रामानुज को मानने वाले अलग-अलग देशों के अलग-अलग भक्तों ने चंदे के स्वरूप दिया है। पुतले को बनाने की संकल्पना श्री चिन्ना जियर स्वामी द्वारा दी गई थी। Statue of Equality 7 फरवरी को उसी जगह पर एक दूसरा स्टेचू भी भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा अनावृत किया जाएगा जिसमें 120 किलो सोने का प्रयोग होगा। 120 किलो सोने का प्रयोग इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि श्री रामानुज इस धरती पर 120 वर्षों तक जीवित रहे थे। समाज के स...