*आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...
कृष्णजन्माष्टमी का व्रत कब करें ? यह बात सर्वविदित है कि भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आधी रात को अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में हुआ था तो निश्चित ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भी उसी मास पक्ष तिथि नक्षत्र के आधार पर ही किया जाना चाहिए । Shri Krishna Janmashtami बसिष्ठ संहिता में कहा गया है - अष्टमी रोहिणीयुक्ता निश्यर्धे दृश्यते यदि । मुख्यकाल इति ख्यातस्तत्र जातो हरिः स्वयम् ।। अर्थात - रोहिणी युक्त अष्टमी आधी रात को दिखाई दे तो वही मुख्य काल है , उसमें ही भगवान् स्वयं प्रकट हुए थे कभी - कभी ऐसा भी होता है कि जब तिथि और नक्षत्र की युति एक साथ आधी रात को नहीं होती है , तब ऐसे में धर्म सिन्धु व निर्णय सिन्धु के मतानुसार - - ' कृष्ण जन्माष्टमी निशीथ व्यापनी ग्राह्या " अर्थात- अर्ध रात्रि के समय व्याप्त अष्टमी तिथि को ही ग्रहण करना चाहिए ।इसी बात की पुष्टि श्रीमद्भागवत पुराण , श्री विष्णु पुराण अग्नि पुराण , वामन पुराण व भविष्य पुराण भी करते हुए कहते हैं कि - ' गतेऽर्धरात्रसमये सुप्ते सर्वजने निशि इसी बात को हम और कुछ अन्य स...