मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ। कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ। मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...
प्रेम में हारे हुए लडके सभी कबीर सिंह बनके नहीं घूम सकते उन्हें निभानी होती हैं जिम्मेदारियां दबे होते हैं वो मां-बाप की ख्वाहिशों के तले जुटे रहते हैं उनके सपने पूरे करने में अपने दर्द को सीने से लगाए हुए! उन्हें खुद की कोई परवाह नही होती उन्हें कुछ फर्क नही पड़ता कि वो कैसे दिख रहे है खुद का ध्यान रखना छोड़ देते है उनकी दाढ़ी बढ़े या बाल उन्हें कुछ फर्क नही पड़ता मानो सारी इच्छाये मर सी गयी हो वो नही चाहते कि कोई चाहे अब हमें हमेशा अकेले में भी मुस्कुराते रहने वाले भीड़ में भी खुद को तनहा महसूस करने लग जाते है जिन्हें कभी रात के अंधेरे में डर लगता था वो घंटो अकेले शांत जगह पर बैठकर चाँद तारों को देखते रहते है दिनभर कितने ही उदास क्यों ना हो लोगो के सामने मुस्कुराने की झूठी कोशिस करते रहते है
जैसे ही दिन ढलता है रात के अंधेरे में चाँद तारों को देखते हुए शिकायते करते रहते है क्योंकि उनका सभी से भरोसा उठ गया होता है आंखे आंसुओ से भर जाती है लेकिन आंसू को आंख से गिरने नही देते लंबी सांस लेकर खुद को समझाने की कोशिश करते है कि सब ठीक हो जाएगा!
सच तो ये है की उन्हें ठीक से रो पाने की भी फुर्सत भी नहीं मिल पाती दिल तो टूट चुका होता है और अब सपने ना टूटे इसलिए खुद को मजबूत रखने की कोशिश करते है
उनकी अंदर से सब कुछ पाने कि इच्छा मर चुकी होती है मगर मा बाप को रिस्तेदारो के तानों से बचाने के लिए चलते है समाज के साथ सब भूलकर!
आप देख कर तो कह ही नहीं सकते कि ये कही अंदर से टूटे है चेहरा हमेशा एक दम हंसता हुआ रहता है!
दुख सिर्फ दोस्तो के सामने कह पाते है वो भी चाय सिगरेट के सहारे से।
मम्मी की गोद में सर रखकर सोना चाहते हैं पर डरते है की मम्मी पूछेगी क्या हुआ!
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