समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं। और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है। यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता। वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता, परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता, और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है। और अचानक— उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है, घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है, और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी, धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है। काफ्का हमें दिखाते हैं कि समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं, बस उत्पादकता की कीमत चुकता है। जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है, दुखी, अलग, टूटा हुआ— तो वह बस एक बोझ बन जाता है। किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है। यह सच्चाई हम आ...
प्रेम में हारे हुए लडके सभी कबीर सिंह बनके नहीं घूम सकते उन्हें निभानी होती हैं जिम्मेदारियां दबे होते हैं वो मां-बाप की ख्वाहिशों के तले जुटे रहते हैं उनके सपने पूरे करने में अपने दर्द को सीने से लगाए हुए! उन्हें खुद की कोई परवाह नही होती उन्हें कुछ फर्क नही पड़ता कि वो कैसे दिख रहे है खुद का ध्यान रखना छोड़ देते है उनकी दाढ़ी बढ़े या बाल उन्हें कुछ फर्क नही पड़ता मानो सारी इच्छाये मर सी गयी हो वो नही चाहते कि कोई चाहे अब हमें हमेशा अकेले में भी मुस्कुराते रहने वाले भीड़ में भी खुद को तनहा महसूस करने लग जाते है जिन्हें कभी रात के अंधेरे में डर लगता था वो घंटो अकेले शांत जगह पर बैठकर चाँद तारों को देखते रहते है दिनभर कितने ही उदास क्यों ना हो लोगो के सामने मुस्कुराने की झूठी कोशिस करते रहते है
जैसे ही दिन ढलता है रात के अंधेरे में चाँद तारों को देखते हुए शिकायते करते रहते है क्योंकि उनका सभी से भरोसा उठ गया होता है आंखे आंसुओ से भर जाती है लेकिन आंसू को आंख से गिरने नही देते लंबी सांस लेकर खुद को समझाने की कोशिश करते है कि सब ठीक हो जाएगा!
सच तो ये है की उन्हें ठीक से रो पाने की भी फुर्सत भी नहीं मिल पाती दिल तो टूट चुका होता है और अब सपने ना टूटे इसलिए खुद को मजबूत रखने की कोशिश करते है
उनकी अंदर से सब कुछ पाने कि इच्छा मर चुकी होती है मगर मा बाप को रिस्तेदारो के तानों से बचाने के लिए चलते है समाज के साथ सब भूलकर!
आप देख कर तो कह ही नहीं सकते कि ये कही अंदर से टूटे है चेहरा हमेशा एक दम हंसता हुआ रहता है!
दुख सिर्फ दोस्तो के सामने कह पाते है वो भी चाय सिगरेट के सहारे से।
मम्मी की गोद में सर रखकर सोना चाहते हैं पर डरते है की मम्मी पूछेगी क्या हुआ!
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