सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Who is your Hero| आपका नायक कौन है| A blogpost by Abiiinabu

Who is your Hero| आपका नायक कौन है|A blogpost by Abiiinabu

Who is your hero
Who is your Hero? Let's Think about it

बहुत दिनों से एक कॉन्ट्रोवर्सी चली आ रही है एक बड़े अभिनेता का बेटा कोई पाउडर खाते हुए पकड़ा गया है। शायद किसी प्रकार का प्रोटीन रहा होगा तभी तो एनसीपी ने उसे गिरफ्तार किया। मुझे इस पूरे प्रकरण से कोई खास दिक्कत नहीं थी लेकिन जब मैंने समाज के जिम्मेदार लोगों को ऐसे लोगों को बचाते देखा जिन्हें उनकी जिम्मेदारी भी नहीं पता है जिन्हें उनके कर्तव्य भी नहीं पता है तो मन एकदम कच्चा सा हो गया। जब मूड खराब होता है ना तो आदमी बस चुप रहता है लेकिन मैं चुप नहीं रहना चाहता मैं चाहता हूं कि आप लोगों को यह पता चले कि कुछ मुट्ठी भर लोग हम लोगों को सपने देखने से भी वंचित रख सकते हैं। कैसे कुछ मुट्ठी भर लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने हेतु मिडल क्लास फैमिली के नौजवानों को भी नशे के ऐसे गर्त में धकेल सकते हैं जहां से वापस आने की कोई संभावना ही नहीं है।
Who is your hero
Who is Your Hero?

आज का किस्सा हो सकता है बहुत सारे लोगों को कुछ खास पसंद ना आए। लेकिन अगर आज एक युवा होते हुए भी मैंने युवाओं के बारे में बात नहीं की तो मेरा इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करना व्यर्थ है। देश और समाज में चल रहे वर्तमान हालातों को देखते हुए कभी-कभी दिमाग कितना ज्यादा कंफ्यूज हो जाता है कि समझ नहीं आता साला हम गलत हैं? हम को गलत ठहराया जा रहा है? अगर हम गलत हैं तो हमने क्या गलती है और अगर हम को गलत ठहराया जा रहा है तो क्या हम इतने बड़े वाले उल्लू हैं जो हमको कोई ऐरा गैरा आकर गलत ठहरा सकता है।
कभी-कभी सोचता हूं कि जीजाबाई ने आखिर ऐसा क्यों किया? कितने राजसी ठाठ बाट होते हुए भी उन्हें अपने सबसे चहेते पुत्र को विद्रोही बनाना पड़ा। वह चाहती तो शिवाजी को भी राजसी ठाठ वाठ आदि बना कर चुपचाप और आराम से अपनी जिंदगी बसर कर सकती थी। और शिवाजी को भी ऐसा ही करने के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकती थी। लेकिन जीजाबाई ने ऐसा नहीं किया। जीजाबाई ने शिवाजी को 5 साल की उम्र से ही शेरनी का दूध पीने की चुनौती पेश की। उबड़ खाबड़ पहाड़ों पर बिना सहारे के चढ़ने की तैयारी शुरू करवाई। इतिहास के और पौराणिक मान्यताओं के वीर राजाओं एवं वीरों की कहानियां सुनाई।
Chhatrapati Shivaji Maharaj
Chhatrapati Shivaji Maharaj

तब कहीं जाकर 13 साल की उम्र में शिवाजी ने तोरण का किला जीता था। तोरण का किला उस समय के दुर्लभतम किलो में से एक था। जिसे जीतना तो दूर अच्छे-अच्छे मंजे हुए योद्धा भी उसे पाने की लालसा रखते थे। आखिर शिवाजी में ऐसा क्या था जो मात्र 13 साल की आयु में उन्होंने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े वीर ना कर सके।

जब भगत सिंह पैदा होने वाले थे तब उनके पिता किशनलाल अंग्रेजों द्वारा जेल में बंद कर दिए गए थे। भगत सिंह के पैदा होने के बाद ही उनके पिता जेल से छूटे थे इसीलिए भगत सिंह को भागो वाला भी कहा जाता है, क्योंकि अपने परिवार के लिए भगत सिंह एक सौभाग्य लेकर आए थे।
Bhagat Singh
Shaheed-E-Azam Bhagat Singh

कभी-कभी यह भी सोचता हूं कि भगत सिंह की मां ने भगत सिंह को किस प्रकार बड़ा किया होगा कि उन्होंने अंग्रेजों से हाथ मिलाने की जगह उन्हें मार भगाना ही ज्यादा उचित समझा। ऐसा क्या दिया होगा भगत सिंह के परिवार ने भगत सिंह को जो मात्र 23 साल की उम्र में, भगत सिंह एक युवक ना होकर एक सोच बन गए। इस सोच की ज्वाला इतनी भर अधिक ऊष्म थी, कि महात्मा गांधी जैसा वटवृक्ष भी इस ऊष्मा से प्रभावित हुए बिना न रह सका।

ऐसा क्या था कैप्टन विक्रम बत्रा के अंदर ऐसा कैसी परवरिश की थी उसके अध्यापक मां बाप ने अपने बेटे की जो परंपरागत रूप से वीर ना होते हुए भी रण क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन कर दिया। जिस उम्र में लोग अपना घर बसाने की सोचते हैं उस उम्र में वह नौजवान इस देश के लिए शहीद हो गया और शहीद भी ऐसा हुआ की 1999 से लेकर 2021 तक जो कोई भी उसकी कहानी सुनता है वह यही कहता है प्यार करो तो विक्रम बत्रा जैसा जिम्मेदारी लो तो विक्रम बत्रा जैसी और काम पूरा करो तो विक्रम बत्रा जैसा। 
Vikram Batra
Capt. Vikram Batra

ऐसा क्या था नीरज चोपड़ा के अंदर, जो मात्र 23 साल की उम्र में उसने 100 सालों से अधिक का सूखा खत्म कर दिया। एक ऐसे युग में रहते हुए जहां का नौजवान ईट ड्रिंक एंड बी मैरी के सपने देखता है। युवावस्था में नए-नए शौक पालता है। विपरीत लिंग के अपने साथियों के प्रति आकर्षित होता है। ऐसा क्या सिखाया होगा नीरज चोपड़ा के मां बाप ने उसे जो उसने इन सब चीजों को छोड़कर उस चीज में कैरियर बनाने का सोचा जिसके बारे में भारत में कोई बात तक नहीं करता। आखिर क्यों नीरज ने वर्तमान समय के उदाहरणों को भाला दिखाते हुए उनसे 87.58 मीटर की दूरी बनाकर रखी। और 23 साल की उम्र में ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किया।
Neeraj Chopra
Subedar Neeraj Chopra

उदाहरण बहुत है, नायक बहुत हैं, हीरो तो अति से ज्यादा हैं। लेकिन दिक्कत ये है कि हम किसको हीरो मान बैठे हैं। आपके घर वाले, आपके रिश्तेदार आपके दोस्त पर यहां तक कि मैं भी यह निर्णय लेने में आपकी कोई सहायता नहीं कर सकते कि आपको किस प्रकार का बनना है। आप अपना आदर्श किसे बनाते हो यह पूर्ण रूप से आप पर निर्भर करता है। यदि उस आदर्श पर चलते हुए आप से कोई गलती या कोई सामाजिक व्यवधान उत्पन्न होता है तो पूर्ण रूप से इसकी जिम्मेदारी आपकी ही होगी। आपके घर वालों की नहीं, आपके रिश्तेदारों की नहीं, मेरी नहीं, और इस धरती पर मौजूद बाकी के 7.6 बिलियन लोगों की भी नहीं। आप और केवल आप यह निर्धारित कर सकते हैं कि आने वाला समाज किस प्रकार के युवाओं को अपना आदर्श बनाना चाहता है। चाहे तो वह आदर्श शिवाजी जैसे भी हो सकते हैं। चाहे तो वे आदर्श भगत सिंह जैसे अपने समय से बहुत आगे की हो सकते हैं। शायद वह आदर्श नीरज चोपड़ा जैसे लीक से हटकर कुछ कर दिखाने की जज्बे को लेकर हो सकते हैं या फिर किसी अभिनेता के बिगड़े लड़के की तरह अपने बाप की दौलत पर गुमान करते हुए नशे में धुत होकर अपना एवं समाज का दोनों का बंटाधार करते हुए भी हो सकते हैं। 
Aryan Khan Drug Case
SRK's Son Aryan Khan Drug Case Controversy

मैं व्यक्तिगत रूप से सबसे अंत वाले उदाहरण को फॉलो करने की इच्छा व्यक्त नहीं करूंगा। लेकिन यह हम पर निर्भर करेगा कि आपको आने वाले समय में अपने बच्चों के लिए एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करना है जो अपनी जवानी के दिनों में असामाजिक गतिविधियां करता हुआ पाया गया हो या फिर समाज को दिशा प्रदान करने की उसकी पारिवारिक दृष्टिकोण से इतर हटते हुए केवल अपने स्वार्थ और क्षणिक सुख के लिए सामाजिक नियमों को धता बता कर अपना और समाज का रोल मॉडल बनने चला हो।  यह आप और केवल आप निर्धारित करेंगे कि आपको डर से अपने घर में AK-56 रखनी है? आपको शौक में किसी मासूम जानवर का खून करना है? या आपको केवल अपना अहंकार दिखाने के लिए भारतीय न्याय पालिका को ठेंगा दिखाते हुए आधे घंटे के अंदर जमानत प्राप्त कर लेनी है? या फिर कुछ ऐसे पदार्थों का सेवन करना हो जो ना आपके एवं किसी अन्य के किसी भी प्रकार से सहायक हो सकते हैं।
बात केवल 23 बरस के लड़के की नही है। बात ये है कि वो 23 बरस का लड़का अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझता? भारतीय सेना में शामिल होने वाले नए अधिकारी अधिकतर 23 साल के ही होते हैं। किसी खेल में रोज़ नए झंडे गाड़ने वाले अधिकतर नौजवान भी 23 बरस के ही होते हैं। भगत सिंह 23 की उमर में फांसी पर झूल गए थे। शंभाजी महाराज ने 23 बरस की आयु में सिद्ध कर दिया था कि मराठा साम्राज्य सुरक्षित उत्तराधिकारी के हाथों में जायेगा। तो फिर उसी उम्र के अधिकतर नौजवान आज भटक क्यों रहे हैं? सवाल मैं खड़ा कर देता हूं, जवाब आप कॉमेंट बॉक्स में लिखना। 
केवल आप और केवल आप ही यह निर्धारित करेंगे कि आने वाला समय समाज में किन व्यक्तियों को ऊंचाई पर देखना चाहेगा। और आप और केवल आप ये भी निर्धारित करेंगे कि आपके आगे आने वाली पीढ़ी आपको कैसे याद रखे?
शौक बेहराइची का शेर याद आ रहा है
बर्बाद ए गुलशन करने की खातिर बस एक ही उल्लू काफी था,
हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा?

आपको हमारा आज का ये ब्लॉग कैसा लगा? बताइएगा जरूर।
धन्यवाद🙏

#aryankhan #aryankhancontroversy #srkkid #bollywooddrugs #udtabollywood #mannat #ncbindia

टिप्पणियाँ

Best From the Author

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Book Review: Chitralekha by Bhagwati Charan Verma

 चित्रलेखा – एक दार्शनिक कृति की समीक्षा लेखक: भगवती चरण वर्मा   प्रस्तावना   हिंदी साहित्य के इतिहास में *चित्रलेखा* एक ऐसी अनूठी रचना है जिसने पाठकों को न केवल प्रेम और सौंदर्य के मोह में बाँधा, बल्कि पाप और पुण्य की जटिल अवधारणाओं पर गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित किया। भगवती चरण वर्मा का यह उपन्यास 1934 में प्रकाशित हुआ था और यह आज भी हिंदी गद्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। इसमें दार्शनिक विमर्श, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और सामाजिक यथार्थ का ऐसा संलयन है जो हर युग में प्रासंगिक बना रहता है । मूल विषय और उद्देश्य   *चित्रलेखा* का केंद्रीय प्रश्न है — "पाप क्या है?"। यह उपन्यास इस अनुत्तरित प्रश्न को जीवन, प्रेम और मानव प्रवृत्तियों के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करता है। कथा की बुनियाद एक बौद्धिक प्रयोग पर टिकी है जिसमें महात्मा रत्नांबर दो शिष्यों — श्वेतांक और विशालदेव — को संसार में यह देखने भेजते हैं कि मनुष्य अपने व्यवहार में पाप और पुण्य का भेद कैसे करता है। इस प्रयोग का परिणाम यह दर्शाता है कि मनुष्य की दृष्टि ही उसके कर्मों को पाप या पुण्य बनाती है। लेखक...

The Story of Yashaswi Jaiswal

जिस 21 वर्षीय यशस्वी जयसवाल ने ताबड़तोड़ 98* रन बनाकर कोलकाता को IPL से बाहर कर दिया, उनका बचपन आंसुओं और संघर्षों से भरा था। यशस्‍वी जयसवाल मूलरूप से उत्‍तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। वह IPL 2023 के 12 मुकाबलों में 575 रन बना चुके हैं और ऑरेंज कैप कब्जाने से सिर्फ 2 रन दूर हैं। यशस्वी का परिवार काफी गरीब था। पिता छोटी सी दुकान चलाते थे। ऐसे में अपने सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ 10 साल की उम्र में यशस्वी मुंबई चले आए। मुंबई में यशस्वी के पास रहने की जगह नहीं थी। यहां उनके चाचा का घर तो था, लेकिन इतना बड़ा नहीं कि यशस्वी यहां रह पाते। परेशानी में घिरे यशस्वी को एक डेयरी पर काम के साथ रहने की जगह भी मिल गई। नन्हे यशस्वी के सपनों को मानो पंख लग गए। पर कुछ महीनों बाद ही उनका सामान उठाकर फेंक दिया गया। यशस्वी ने इस बारे में खुद बताया कि मैं कल्बादेवी डेयरी में काम करता था। पूरा दिन क्रिकेट खेलने के बाद मैं थक जाता था और थोड़ी देर के लिए सो जाता था। एक दिन उन्होंने मुझे ये कहकर वहां से निकाल दिया कि मैं सिर्फ सोता हूं और काम में उनकी कोई मदद नहीं करता। नौकरी तो गई ही, रहने का ठिकान...

How to face problems in life ब्रह्मभोज | A problem facing blog by Abiiinabu

How to face problems in life, ब्रह्मभोज       एक बार ब्रह्मा जी ने अपने सभी बच्चों को खाने के लिए बुलाया। नियत समय पर जब सभी लोग खाने के लिए पहुंचे तो ब्रह्मा जी ने खाने के लिए एक शर्त रख दी। "अगर तुम लोग खाते समय अपनी कोहनी न मोड़ो तो तुम खाना खा सकते हो " ब्रह्मा जी ने कहा.  खाने के लिए शर्त देख कर सभी लोग विचार करने लगे कि इस समस्या का कैसे समाधान किया जाए।  सबने अलग अलग तरीके अपनाये। कुछ लोगों ने अपने सर मोड़े और खाने को चाटने लगे जिससे वो खाने का सेवन करने लगे। और शास्त्र बताते हैं की वो पशु बने।  कुछ लोग ब्रह्मा जी के इस व्यवहार से रुष्ट हो गए, वो असुर बने।  कुछ लोगों जो जब Problem का Solution समझ न आया तो वो जितना खाना समेट सकते थे उसको समेट के वहां से भाग गए, शास्त्र बताते हैं ऐसे लोग राक्षस बने।  लेकिन कुछ लोग थे जिन्होंने हार नहीं मानी समस्या का समाधान ढूंढ़ने के प्रयास में वो लोग एक दूसरे के सामने वाले को अपने हाथ से खाना खिलाने लगे, कुछ ही देर में उन सब लोगों ने खाना खा लिया और शास्त्र बताते हैं वो लोग देव कहलाये।  वो लोग देव ...

Glorified Kohli

 विराट कोहली ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर इंडियन टीम 2028 के ओलंपिक में गोल्ड मेडल खेलने के लिए उतरती है तो वो सिर्फ एक मैच के लिए रिटायरमेंट छोड़कर उस टीम का हिस्सा बनना चाहेंगे। वैसे तो ये सवाल हाइपोथेटिकल था,पर कुछ लोगो को कोहली के जवाब में निजी स्वार्थ भी दिख सकता है। पर मुझे इस जवाब में बस एक चीज दिखती है, Thirst for Glory, यानी नाम का लालच, legacy trap..अब कहने को बुद्धिजीवी लोग इस भावना में बीस कमियां निकाल सकते है, कि कैसे ये भावना टॉक्सिक है, पर असलियत में यही वो भावना है, जो दिल्ली के मामूली से क्रिकेटर को क्रिकेट का सरताज बनाती है।यही वो भावना है जिसकी वजह से रांची का टिकट कलेक्टर जमी जमाई नौकरी छोड़ देता है, यही वो भावना है जिसकी वजह से रोमांटिक फिल्मों के जमाने में एक मामूली सा आउटसाइडर एक्टर एक साइकोपैथ lover का रोल करने के लिए राजी हो जाता है। कामयाबी, पैसा, ये सब किसी न किसी तरह से मिल ही जाता है,इंसान अपने पोटेंशल का अगर 20% भी झोंक दे,तो ये सब कोई नामुमकिन चीज नहीं है। पर इंसान धोनी कोहली या शाहरुख खान तब बनता है, जब वो ग्लोरी के पीछे भागता है, लीगेसी के पीछे ...