सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

आखिर चाइना में क्यों चली गई है सब की बत्ती| China Crisis in China| Abiiinabu

आखिर China में क्यों चली गई है सब की बत्ती?

चाइना इस समय अपने सबसे भीषण ऊर्जा उत्पादन संकट से जूझ रहा है। इस समय चीन में हालत यह है कि ट्रैफिक लाइट को दिया जाने वाला सिग्नल भी बंद कर दिया गया है। आम आदमी के घरों में दी जाने वाली बिजली की सप्लाई न्यूनतम कर दी गई है, और रात के अलावा दिन में केवल आपातकालीन सेवाओं को ही बिजली का उपभोग करने की अनुमति है। आखिर चीन में ऐसा क्यों हो रहा है, आइए जानते हैं-

  • Energy Crisis in Chinaक्या चल रहा है China में?

भारत का पड़ोसी मुल्क चीन इस समय अपने ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है। कई बड़ी-बड़ी कंपनियां शट डाउन कर दी गई हैं एवं कई जगह ट्रैफिक लाइटों में भी बिजली नहीं दी जा रही है। यहां तक कि आम आदमी के घर में भी बिजली का उपभोग न्यूनतम रखने की आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान चीन के विभिन्न उत्पादक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महत्वपूर्ण स्थान की हानि के साथ होगा, जिसका खामियाजा चीन के साथ साथ बाकी के सभी देशों को भी भरना पड़ेगा।
China-energy-crisis
China Energy Crisis

चीन इस समय दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यदि यह अर्थव्यवस्था बैठ गई तो अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर इसका सीधा एवं व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

  • Energy Crisis in China: क्या है वजह?

कई लोगों का मानना है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सारी समस्याओं का जड़ है।

  • Energy Crisis in Chinaइसकी शुरुआत कैसे हुई?

चीन के इनर मंगोलिया राज्य में स्थानीय सरकार ने वहां पर मौजूद बॉक्साइट से एलुमिनियम बनाने के कारखानों पर ऊर्जा के संरक्षण को लेकर एक आदेश जारी किया था। इसमें लिखा था कि स्थानीय सरकार को वहां पर 2021 के पहले तिमाही में अपनी ऊर्जा की खपत के लक्ष्य को प्राप्त करना है इसीलिए आप लोग अतिरिक्त ऊर्जा के उपभोग पर लगाम लगाएं।
इसी तरह चीन के दक्षिणी राज्य गुआंगडोंग में स्थानीय सरकार ने हाइड्रो पावर से अधिक उत्पादन ना होने पर ऊर्जा की खपत को बचाने के लिए वहां के कारखानों को अतिरिक्त ऊर्जा का योग ना करने की हिदायत दी।
इसी प्रकार चीन के पूर्वी इलाकों में भी बड़े कारखानों को कम बिजली उपयोग करने की हिदायत दी गई थी। लेकिन सवाल तो जस का तस ही है आखिर चीन ने अपने कारखानों को बिजली का उपयोग कम करने की सलाह दी तो दी क्यों?
इसका जवाब हम बताएं देते हैं, चीन बिजली उत्पादन करने के लिए प्रयोग होने वाला कोयला अभी कुछ समय पहले तक ही ऑस्ट्रेलिया से मंगवाता था। समय पहले तक ही चीन और ऑस्ट्रेलिया के संबंध काफी अच्छे हुआ करते थे। लेकिन साउथ चाइना सी में चीन के बढ़ते रुतबे एवं अतिक्रमण से प्रभावित होकर ऑस्ट्रेलिया ने चाइना को अपने बिजली उत्पादन करने के लिए दिए जाने वाले कोयले के जहाजों को भेजने से इंकार कर दिया। जिसकी वजह से चीन में कोयले की किल्लत पैदा होने लगी। लेकिन चीन तो चीन ठहरा उसने तुरंत इंडोनेशिया से संपर्क साधा एवं इंडोनेशिया से मुंह मांगी कीमत पर कोयला खरीदना शुरू कर दिया। लेकिन इंडोनेशिया में खुद ही बिजली का संकट पैदा होने लगा तो उसने भी हाथ खड़े कर दिए। इधर विश्व के बाजार में कोयले की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है साल के शुरुआत में 1 टन कोयला जहां $70 से भी कम में मिलता था वही अब 1 टन कोयला 200 डॉलर से भी अधिक में बिक रहा है। चीन के बड़े कारोबारी महंगा कोयला तो खरीद रहे हैं लेकिन उस से बनने वाली बिजली को सरकारी सब्सिडी ना मिल पाने के कारण अधिक कीमत में बेचा जा रहा है जिस कारण आम आदमी की जिंदगी से उजाला एवं सुकून दोनों गायब हो चुके हैं। 

चीन की सरकार ने अपने 30 राज्यों को यह आदेश दिया था कि एक निश्चित मात्रा में बिजली देने के बाद ही एक निश्चित मात्रा में वह कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करेंगे। लेकिन चीन के 30 में से केवल 10 राज्य ही इस आदेश का पालन कर पाए। बाकी के 20 राज्य इस नियम को ठीक प्रकार से लागू न कर सके। जब यह जानकारी चीनी सरकार को हुई तो उसने कड़े नियम लगाते हुए यह आदेश दिया कि यदि कुछ महीनों में ही नियमों का पालन ना हुआ 2 राज्यों के प्रमुख इसका भुगतान करेंगे। और इसी के साथ चीन में बिजली का संकट पैदा होने लगा। 

  • Energy Crisis in Chinaकौन से उद्योगों पर पड़ा है सीधा असर?

वे सभी उद्योग जो ऊर्जा का अत्यधिक उपभोग करते हैं जैसे बॉक्साइट से एलुमिनियम बनाना, उर्वरक निर्माण, सीमेंट निर्माण एवं स्टील निर्माण कारखानों पर इस बिजली संकट की सीधी मार पड़ी है।
चीन में कई सारी कंपनियों जैसे टेस्ला और एप्पल के विभिन्न प्रकार के पुर्जे भी बनाए जाते हैं। बिजली की कमी होने से इन निर्माणा कारखानों की क्षमता पर सीधा असर पड़ा है और टेस्ला और एप्पल के अंदरूनी पुर्जे समय पर मिल नहीं पा रहे हैं। जिसकी वजह से एप्पल और टेस्ला जैसी कंपनियों को अपने मुख्य कारखानों को कम क्षमता पर चलाना पड़ रहा है। जिसका असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ेगा। चीन के पूर्वोत्तर इलाकों को यह सीधा आदेश आ चुका है कि वह पानी गरम करने के हीटर एवं माइक्रोवेव ओवन का कम से कम इस्तेमाल करें जिससे बिजली की बचत की जा सके।

  • Energy Crisis in Chinaआखिर चीन ने कम बिजली इस्तेमाल करने की शर्त रखी ही क्यों थी?

चीन ने पूरी दुनिया को दिखाने के लिए सन 2030 तक 2005 के मुकाबले में 65% कम कार्बन डाई गैस का उत्सर्जन करने का लक्ष्य बनाया था। इसका मतलब हुआ कि चीन को $1 बनाने में जितना कार्बन खर्च करना पड़ता है उसका 65% कम इस्तेमाल किया जा सके। 

गौरतलब हो कि 2022 में चीन में ही शीतकालीन ओलंपिक खेल भी होने हैं। जिस कारण पूरी दुनिया से एथलीट्स एवं न्यूज़ चैनल चाइना में आएंगे। यदि वर्तमान समय में चीन की हवा की स्थिति को देखा जाए तो यह भयावह है। चीन कभी यह नहीं चाहेगा कि उसकी है स्थिति पूरी दुनिया के सामने आए और उसे शर्मिंदा होना पड़े इसीलिए चीन ने इस प्रकार के कम कार्बन डाई गैस के उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। 

  • Energy Crisis in Chinaइसका क्या प्रभाव पड़ेगा

चीन में होने वाले ऊर्जा के संकट का सामना पूरी दुनिया को अलग-अलग तरीकों से करना पड़ेगा एप्पल और टेस्ला के प्रोडक्ट्स देर से बनेंगे जिस कारण बाकी की दुनिया को इन प्रोडक्ट को खरीदने के लिए इंतजार करना होगा।
छोटे समय के लिए ही सही चीन की अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती ना रहेगी उस पर भी बिजली की स्मारका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
विदित हो कि चीन अपनी कुल ऊर्जा का 57% हिस्सा कोयले को जलाकर प्राप्त करता है। अगर चीन अपनी इस परियोजना में सफल हो गया तो यह स्वच्छ चीन के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी और दुनिया के हर देश के लिए यह अनुसरण ही रह बना रहेगा।

टिप्पणियाँ

  1. उम्मीद है सरकार की आँखे अब खुले, ऊर्जा के नवीकरणीय स्त्रोत पर ध्यान दे,, solar n wind energy का उपयोग करे

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubt please let me know.

Best From the Author

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number "The Man who Knew The Infiniy"; लेकिन श्रीनिवास रामानुजन तो वह महापुरुष थे जो Infinity से आगे का भी जानते थे।  उन्होंने अपनी शोध एवं पत्र से 3900 से अधिक परिणाम प्राप्त किए। हालांकि जिज्ञासु लोग (जैसे कि मैं) और गणित में मन रमाने वाले उन्हें हार्डी रामानुजन संख्या के लिए भी जानते हैं। आखिर क्या है Hardy-Ramanujan-Number हार्डी रामानुजन संख्या की खोज अचानक से बैठे-बिठाए हो गई थी। हुआ यूं था कि ब्रिटेन के जाने-माने गणितज्ञ GH Hardy अस्वस्थ Ramanujan को अस्पताल में मिलने गए थे। यह किस्सा रामानुजन की जीवनी The Man who knew Infenity में Robert Knaigel लिखते हैं।      हार्डी ने अस्वस्थ रामानुजन को चुटकी लेते हुए कहा कि वह जिस टैक्सी में उनसे मिलने आए हैं, उसका नंबर अंत में 1729 था। जो कि एक अशुभ संख्या है। यह संख्या किसी अन्य संख्या से नहीं कटती, अतः यह एक अभाज्य अशुभ संख्या हुई।  Taxi No. 1729 जिसके जवाब में रामानुजन ने तुरंत कहा जी ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में 1729 बहुत...

नौजवानी vs अनुभव

प्रशांत महासागर के हज़ारों फीट की ऊंचाई पर एक एयरबस 380 सैकड़ों यात्रियों के साथ उड़ रही थी। अचानक दो फाइटर प्लेन आसमान में दिखाई दिए और इस जहाज़ की तरफ उड़ने लगे। जब रेडियो संपर्क हुआ तो लड़ाकू विमान के एक युवा पायलट ने एयरबस के बुजुर्ग पायलट से कहा, 'कितनी बोरिंग फ्लाइट है तुम्हारी। देखो, मैं आपकी इस उड़ान को दिलचस्प बना देता हूँ! यह कहने के बाद, उसने अचानक गति पकड़ ली और एयरबस के चारों ओर तब तक कलाबाज़ियाँ दिखाता रहा,जब तक समुद्र का स्तर निकट नहीं आया, वहां से यह ऊपर गया, साउंड बैरियर को तोड़ दिया, मुड़ गया और एयरबस की तरफ आ गया। उत्तेजित स्वर में उसने फिर पूछा कैसा लगा? एयरबस पायलट ने कहा कि यह कुछ भी नहीं है। अब आप देखिए मैं क्या दिखाता हूं। दोनों युद्धपोत देखने लगे। समय बीत रहा था लेकिन विमान सीधा उड़ रहा था। काफी समय बाद एयरबस के सीनियर पायलट का एक रेडियो संदेश आया जिसमें पूछा गया कि आपको कैसा लगा? युवा फाइटर पायलट ने कहा, "लेकिन बॉस, आपने क्या किया है?" ? एयरबस के पायलट ने कहा, मैं बाथरूम गया था। रास्ते में कुछ लोगों से बातचीत हुई। फिर मैंने शांति से खड़े...

पार्टी में ओपन सोडा पीने से पहले एक बार सोच ले, महिलाएं जरूर पढ़ें ।।What is Rhypnol, be aware of Party drug, female readers must know about this।। Abiiinabu।।

What is Rhypnol, be aware of Party drug, female readers must know about this।। Abiiinabu।।पार्टी में ओपन सोडा पीने से पहले एक बार सोच ले, महिलाएं जरूर पढ़ें  कुछ दिनों से सोच रहा था कि कुछ ऐसा लिखूं, जिससे मुझे संतुष्टि और आपको फायदा दोनो मिलें यही सोचते सोचते न्यूज वाली एप्लीकेशन ( नाम नहीं बताऊंगा ऊ काहे कि नाम लिखने का पैसा नही दिया है उन्होंने) स्क्रॉल कर रहा था। वहां एक न्यूज देखी तो स्तब्ध रह गया। मतलब मुझे न्यूज में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की खबरें पढ़ने की आदत सी हो चली थी, लेकिन इसको पढ़ कर दिल में बस दो ही बातें आईं।  पहली तो ये कि ऐसा कैसे हो सकता है। और दूसरी ये कि कोई इतना नीच कैसे हो सकता है। दोनो का सार भी बताऊंगा लेकिन बाद में, पहले आप लोग खबर सुनो, खबर ये थी कि किसी शहर में दोस्तों के साथ पार्टी कर रही लड़की के साथ चार लड़कों ने कुकृत्य किया। लेकिन इसमें चौंकाने वाली बात ये कि लड़की को पता ही नही था कि उसके साथ ऐसा किया जा चुका है। ना शरीर पर चोटों के निशान, ना नाखून की खरोंचें, और ना शोर शराबा। एक बार को तो लगा की लड़की झूठ बोल रही है, ले...

कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

Bageshwar Baba Controversy

नालंदा! तात्कालिक विश्व का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय! कहते हैं, संसार में तब जितना भी ज्ञान था, वहाँ सबकी शिक्षा दीक्षा होती थी। सारी दुनिया से लोग आते थे ज्ञान लेने... बौद्धिकता का स्तर वह कि बड़े बड़े विद्वान वहाँ द्वारपालों से पराजित हो जाते थे। पचास हजार के आसपास छात्र और दो हजार के आसपास गुरुजन! सन 1199 में मात्र दो हजार सैनिकों के साथ एक लुटेरा घुसा और दिन भर में ही सबको मार काट कर निकल गया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक और उनके बीस हजार छात्र मात्र दो सौ लुटेरों से भी नहीं जूझ सके। छह महीने तक नालंदा के पुस्तकालय की पुस्तकें जलती रहीं।      कुस्तुन्तुनिया! अपने युग के सबसे भव्य नगरों में एक, बौद्धिकों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों की भूमि! क्या नहीं था वहाँ, भव्य पुस्तकालय, मठ, चर्च महल... हर दृष्टि से श्रेष्ठ लोग निवास करते थे। 1455 में एक इक्कीस वर्ष का युवक घुसा और कुस्तुन्तुनिया की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गयी। सबकुछ तहस नहस हो गया। बड़े बड़े विचारक उन लुटेरों के पैरों में गिर कर गिड़गिड़ाते रहे, और वह हँस हँस कर उनकी गर्दन उड़ाता रहा। कुस्तुन्तुनिया का पतन हो ग...