सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

"The Man who Knew The Infiniy"; लेकिन श्रीनिवास रामानुजन तो वह महापुरुष थे जो Infinity से आगे का भी जानते थे।  उन्होंने अपनी शोध एवं पत्र से 3900 से अधिक परिणाम प्राप्त किए। हालांकि जिज्ञासु लोग (जैसे कि मैं) और गणित में मन रमाने वाले उन्हें हार्डी रामानुजन संख्या के लिए भी जानते हैं।

  • आखिर क्या है Hardy-Ramanujan-Number

हार्डी रामानुजन संख्या की खोज अचानक से बैठे-बिठाए हो गई थी। हुआ यूं था कि ब्रिटेन के जाने-माने गणितज्ञ GH Hardy अस्वस्थ Ramanujan को अस्पताल में मिलने गए थे। यह किस्सा रामानुजन की जीवनी The Man who knew Infenity में Robert Knaigel लिखते हैं।
    हार्डी ने अस्वस्थ रामानुजन को चुटकी लेते हुए कहा कि वह जिस टैक्सी में उनसे मिलने आए हैं, उसका नंबर अंत में 1729 था। जो कि एक अशुभ संख्या है। यह संख्या किसी अन्य संख्या से नहीं कटती, अतः यह एक अभाज्य अशुभ संख्या हुई। 
Hardy-ramanujan-Number
Taxi No. 1729

जिसके जवाब में रामानुजन ने तुरंत कहा जी ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में 1729 बहुत ही रोचक संख्या है जिसे दो प्रकार से लिखा जा सकता है। 1729 10 एवं 9 दो संख्याओं के घनो का योग है। इसे समझाते हुए रामानुजम ने आगे कहा 10 का घन 1000 होता है और 9 का घन 729 यदि इन दोनों संख्याओं को जोड़ दिया जाए तो योगफल 1729 निकलता है।
    इसी प्रकार, 1729 12 एवं 1, इन दो संख्याओं के घरों का भी मूल है। 
    इस प्रकार 1729 वह सबसे छोटा नंबर बन जाता है जिसे दो संख्याओं के घनो के योगफल के रूप में दो विभिन्न तरह से लिखा जा सकता है। 
    रामानुजम की वाकपटुता एवं बुद्धिमत्ता देखकर जीएच हार्डी हतप्रभ हुए बिना ना रह सके उन्होंने रामानुजन के प्रतिभा की तारीफ की एवं उन्हें जल्द ही स्वस्थ होने का दिलासा देकर वहां से चले गए। जीएचआरडी अवश्य ही खुश रहे होंगे क्योंकि उन्हें उनकी टक्कर का कोई गणितज्ञ जो मिल गया था।
हार्डी रामानुजन संख्या रामानुजन केसरी जीवन की सबसे बड़ी घटना नहीं थी  यह उनकी कई हैरान कर देने वाली खोजों में से एक थी जो उन्होंने केवल मन बहलाने के लिए बनाई थी।
रामानुजन संख्याओं से सम्मोहित हो जाते थे उन्होंने अपनी इस सम्मोहन को Partitio Numerorum यानी संख्याओं के विभाजन का अध्ययन करने में लगा दिया एवं कई सिर चकरा देने वाली खोजें की। 

श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन 22 दिसंबर को सरकार ने राष्ट्रीय गणित दिवस  घोषित किया है। 

टिप्पणियाँ

Best From the Author

जब आपके अंदर काबिलियत हो तो समय आपका स्वयं इंतजार करता है, इतिहास रचवाने के लिए

जब आपके अंदर काबिलियत हो तो समय आपका स्वयं इंतजार करता है, इतिहास रचवाने के लिए      बात उन दिनों की है, भारतीय क्रिकेट टीम 2003 का वर्ल्डकप   फाइनल ऑस्ट्रेलिया से हार रही थी। अकेला पोंटिंग भारी पड़ रहा था, और अंततः पोंटिंग की वजह से ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हरा कर विश्व कप जीत लिया। भारतीय टीम के बड़े बड़े धुरंधर सौरव गांगुली, युवराज सिंह, सचिन तेंदुलकर, जाहिर खान, मोहम्मद कैफ उस दिन ऐसे बेबस थे जैसे वो दिन बस रिकी पॉन्टिंग के लिए ही बना हो। उन्ही दिनों खड़गपुर रेलवे क्वार्टर में अपने दोस्तों के साथ टीवी पर मैच देख रहा था। सचिन के आउट होने ही वो उठा और चाय बनाने चल दिया। इधर पतीली में चाय उबल रही थी और उधर उसके दिमाग में अपने खेल को आगे बढ़ाने की कोशिशें उबल रही थी। गैस को बढ़ा कर उसने उबलने की गति कुछ और बढ़ाई ही थी कि दोस्तों की खुसुर पुसुर से उसके दिमाग में उबाल बढ़ने लगे। "ई युवरजवा और कैफवा तो अपने महिया के साथ ही खेलत बा ना। पता नहि अपने महिया का नंबर कब लागेल।" वो चुप चाप सुन कर मुस्कुराता रहा और चाय बना कर लाता रहा। ठीक चार साल बाद जब वो आउट हुआ तो भारतीय दर्...

History of Chambal

 चम्बल का इतिहास क्या हैं? ये वो नदी है जो मध्य प्रदेश की मशहूर विंध्याचल पर्वतमाला से निकलकर युमना में मिलने तक अपने 1024 किलोमीटर लम्बे सफर में तीन राज्यों को जीवन देती है। महाभारत से रामायण तक हर महाकाव्य में दर्ज होने वाली चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। श्रापित और दुनिया के सबसे खतरनाक बीहड़ के डाकुओं का घर माने जाने वाली चम्बल नदी मगरमच्छों और घड़ियालों का गढ़ भी मानी जाती है। तो आईये आज आपको लेकर चलते हैं चंबल नदी की सेर पर भारत की सबसे साफ़ और स्वच्छ नदियों में से एक चम्बल मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में महू छावनी के निकट स्थित विंध्य पर्वत श्रृंखला की जनापाव पहाड़ियों के भदकला जलप्रपात से निकलती है और इसे ही चम्बल नदी का उद्गम स्थान माना जाता है। चम्बल मध्य प्रदेश में अपने उद्गम स्थान से उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में बहते हुए धार, उज्जैन, रतलाम, मन्दसौर, भिंड, मुरैना आदि जिलों से होकर राजस्थान में प्रवेश करती है। राजस्थान में चम्बल चित्तौड़गढ़ के चौरासीगढ से बहती हुई कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करोली और धौलपुर जिलों से निकलती है। जिसके बाद ये राजस्थान के धौलपुर से दक्षिण क...

भारत का महान राजा अशोक, Ashoka The Great

अशोक, जिसे 'देवनामपिया पियादासी' या देवताओं के प्रिय के रूप में भी जाना जाता है, मौर्य वंश का अंतिम प्रमुख राजा था। उन्हें मुख्य रूप से उनके शासनकाल के दौरान भारत और विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रसार में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। 1830 के दशक के मध्य तक, जब जेम्स प्रिंसेप ब्राह्मी लिपि में एक शिलालेख को समझने में सक्षम थे, उन्हें मौर्य राजाओं की सूची में कई शासकों में से एक माना जाता था। अंतिम पुष्टि कि शिलालेख में देवानामपिया पियादासी के रूप में दिखाई देने वाला नाम अशोक का था, 1915 में आया था। अशोक मौर्य राजा बिंदुसार के पुत्र थे। जबकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वह अपने पिता की मृत्यु के तुरंत बाद सिंहासन पर चढ़ा, कई लोगों का तर्क है कि उनके कई भाइयों के बीच उत्तराधिकार के लिए संघर्ष में लगभग चार साल का अंतर था। एक प्रशासक के रूप में उनके करियर ने तब उड़ान भरी जब उन्होंने तक्षशिला में राज्यपाल के रूप में सेवा शुरू की। इसमें एक विद्रोह को दबाना और व्यावसायिक गतिविधियों को संभालना शामिल था। अशोक के शासन के दौरान विभिन्न घटनाओं में, कलिंग युद्ध को सबसे मह...

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground T20 World Cup में खिलाड़ियों द्वारा किया जाने वाला Taking The Knee क्या है? बीते कुछ समय से हम सभी लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले खेलों में खिलाड़ियों को अपने एक घुटने के बल बैठता हुआ देखते आए हैं। चाहे फुटबॉल हो, क्रिकेट हो अथवा ओलंपिक खेल ही क्यों ना हो, खिलाड़ियों को अपने घुटने के बल बैठकर एक खास प्रदर्शन करना आखिर क्या दिखाता है? आखिर क्यों दुनिया भर के खिलाड़ी अपने अपने क्षेत्र में इस प्रकार की Body Language बना रहे हैं? Football Players Kneeling 18वीं और 19वीं शताब्दी में जब ब्रिटेन पूरी दुनिया पर अपना राज कर रहा था। तब ब्रिटिश अधिकारी कई अलग-अलग तरीकों से उन देशों के मूल निवासियों के प्रति घृणा का भाव रखते थे। जिनमें सबसे बड़ा भाव था रंग के आधार पर भेदभाव करना। रंगभेद, नस्लभेद या Racism भी कहा जाता है। रंगभेद और नस्ल भेद वक्त के साथ कमजोर पड़ते गए लेकिन कभी पूर्ण रूप से खत्म नहीं हो पाए। कुछ लोगों का केवल अपने त्वचा के रंग आधार पर यह मानना कि वह बाकी दुनिया से श्रेष्ठ हैं, एक प्रकार की विकृत ...