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कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

"The Man who Knew The Infiniy"; लेकिन श्रीनिवास रामानुजन तो वह महापुरुष थे जो Infinity से आगे का भी जानते थे।  उन्होंने अपनी शोध एवं पत्र से 3900 से अधिक परिणाम प्राप्त किए। हालांकि जिज्ञासु लोग (जैसे कि मैं) और गणित में मन रमाने वाले उन्हें हार्डी रामानुजन संख्या के लिए भी जानते हैं।

  • आखिर क्या है Hardy-Ramanujan-Number

हार्डी रामानुजन संख्या की खोज अचानक से बैठे-बिठाए हो गई थी। हुआ यूं था कि ब्रिटेन के जाने-माने गणितज्ञ GH Hardy अस्वस्थ Ramanujan को अस्पताल में मिलने गए थे। यह किस्सा रामानुजन की जीवनी The Man who knew Infenity में Robert Knaigel लिखते हैं।
    हार्डी ने अस्वस्थ रामानुजन को चुटकी लेते हुए कहा कि वह जिस टैक्सी में उनसे मिलने आए हैं, उसका नंबर अंत में 1729 था। जो कि एक अशुभ संख्या है। यह संख्या किसी अन्य संख्या से नहीं कटती, अतः यह एक अभाज्य अशुभ संख्या हुई। 
Hardy-ramanujan-Number
Taxi No. 1729

जिसके जवाब में रामानुजन ने तुरंत कहा जी ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में 1729 बहुत ही रोचक संख्या है जिसे दो प्रकार से लिखा जा सकता है। 1729 10 एवं 9 दो संख्याओं के घनो का योग है। इसे समझाते हुए रामानुजम ने आगे कहा 10 का घन 1000 होता है और 9 का घन 729 यदि इन दोनों संख्याओं को जोड़ दिया जाए तो योगफल 1729 निकलता है।
    इसी प्रकार, 1729 12 एवं 1, इन दो संख्याओं के घरों का भी मूल है। 
    इस प्रकार 1729 वह सबसे छोटा नंबर बन जाता है जिसे दो संख्याओं के घनो के योगफल के रूप में दो विभिन्न तरह से लिखा जा सकता है। 
    रामानुजम की वाकपटुता एवं बुद्धिमत्ता देखकर जीएच हार्डी हतप्रभ हुए बिना ना रह सके उन्होंने रामानुजन के प्रतिभा की तारीफ की एवं उन्हें जल्द ही स्वस्थ होने का दिलासा देकर वहां से चले गए। जीएचआरडी अवश्य ही खुश रहे होंगे क्योंकि उन्हें उनकी टक्कर का कोई गणितज्ञ जो मिल गया था।
हार्डी रामानुजन संख्या रामानुजन केसरी जीवन की सबसे बड़ी घटना नहीं थी  यह उनकी कई हैरान कर देने वाली खोजों में से एक थी जो उन्होंने केवल मन बहलाने के लिए बनाई थी।
रामानुजन संख्याओं से सम्मोहित हो जाते थे उन्होंने अपनी इस सम्मोहन को Partitio Numerorum यानी संख्याओं के विभाजन का अध्ययन करने में लगा दिया एवं कई सिर चकरा देने वाली खोजें की। 

श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन 22 दिसंबर को सरकार ने राष्ट्रीय गणित दिवस  घोषित किया है। 

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