मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ। कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ। मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...
ये हैं अरामज़द (Aramazd)...!
अरामज़द को अर्मेनिया के प्री-क्रिश्चन (पारसी) गॉड माना जाता है.
इन्हें सिर्फ... गॉड ही नहीं माना जाता है...
बल्कि, इन्हें फादर ऑफ गोड्स एंड गोडेज... अर्थात, सभी देवी देवताओं के पिता अथवा रचयिता माना जाता है.
आर्मेनिया में इनकी पूजा सर्वोच्च देवता के तौर पे की जाती थी.
और, ऐसी मान्यता है कि इन्होंने ही स्वर्ग और पृथ्वी बनाई.
साथ ही.... इन्होंने ही पृथ्वी की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जिसके कारण पृथ्वी में पेड़-पौधे उगे और पृथ्वी फलवान हुई.
अर्थात.... प्राचुर्य, वर्षा और उर्वरता के भगवान.
लेकिन, मुझे आर्मेनिया फर्मेनिया में नहीं बल्कि उनके देवता के इस फोटो में रुचि है...
क्योंकि, इस देवता के चित्र में स्वस्तिक और हाथों पर बैठा गरुड़ साफ साफ नजर आ रहा है.
तो, क्या ये मान लिया जाए कि ये
अरामज़द देवता और कोई नहीं बल्कि भगवान विष्णु ही थे... जिन्हें आर्मेनिया की अपनी भाषा अथवा उच्चारण में Aramazd पुकारा जाता था ?
क्योंकि.... काल, मान्यता, देव के गुणों की समानता तो कुछ इसी तरफ इशारा कर रहे है...
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