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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

The real meaning of Ram

The meaning of Rama


ऋषि सरभंग


नगर से सैकड़ों कोस दूर सुदूर वन में तपस्या कर रहे उस वृद्ध ऋषि ने दूर उस निश्चित स्थान की ओर दृष्टि डाली, जहाँ वर्षों पहले उन्होंने राक्षसों द्वारा मार दिए गए असंख्य ऋषियों की जूठी अस्थियां इकट्ठी की थी। अस्थियों का ढेर अब भी जस का तस पड़ा था। उनके मुस्कुराते अधर लटक गए, आंखों में जल उतर आया.......उन्होंने अपने आसन पर ही खड़े हो कर दोनों हाथ हवा में लहराया और आकाश की ओर मुँह घुमा कर कहा- "अब आ भी जाओ राम! युगों युगों से तुम्हारी राह निहारते इस शरभंग की बूढ़ी हड्डियां अब थक चुकी हैं। यह नश्वर शरीर, अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकता। तुम आओ तो मैं जा सकूँ..." 


     आकाश में खड़े सूर्य देव ने सुना, उसी क्षण लगभग ऐसी ही प्रार्थना उस भीलनी की कुटिया से आ रही थी। ऐसी ही प्रार्थना के स्वर गूंजे थे अहिल्या के उजाड़ गृह से, ऐसी ही प्रार्थना गूंजी थी महर्षि विश्वामित्र के विद्यालय में... ऐसी ही प्रार्थना समग्र आर्यावर्त के वायुमंडल में तैर रही थी। सूर्यदेव मुस्कुरा उठे। मन ही मन कहा,"महाराज दशरथ तो ईश्वर से केवल पुत्र मांग रहे हैं, काश कि वे जान पाते कि समस्त संसार ईश्वर से उनके लिए क्या मांग रहा है।" 


     महर्षि शरभंग के सामने जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने कहा, " हर पीड़ा एक दिन समाप्त होती है, हर तपस्या एक दिन पूरी होती है, हर शरभंग को एक दिन उनके राम मिल ही जाते हैं। मुस्कुराइये महर्षि! आज चैत्र शुक्लपक्ष की नवमी है, वह आ गया है...राम आ गया है।" सुख-दुख, हर्ष-विषाद की अर्गला से बहुत पहले मुक्त हो चुके ऋषि हँस पड़े। 


समस्त संसार में वह अनकहा वाक्य गूँज उठा- "वह आ गया है.......राम आ गया है!" 


राम के आने का या राम होने तात्पर्य जानते हैं आप? राम होने का अर्थ सभ्यता को एक नए नायक का मिलना जिसका अनुसरण कर सभ्यता रामत्व को प्राप्त करे। राम होने का अर्थ मर्यादा की स्थापना है। राम होने का अर्थ समुद्र में भी सेतु बाँधकर संस्कारित प्रणय को प्रतिष्ठित करना है। राम होने का अर्थ प्रेम को एकल पत्नी व्रत के साथ परिभाषित करना है। राम होने का अर्थ एक वंचित निषाद से, शोषित सुग्रीव से, तिरस्कृत विभीषण से मित्रता करना है। राम होने का अर्थ सघन तरूवरों में कोसों कोस चलकर उस भीलनी के समीप इसलिए जाना ताकि किसी गुरुदेव का दिया वचन व्यर्थ न हो। राम होने का अर्थ माँ की अवांछनीय इच्छा को और पिता के वचन को आशीर्वाद समझकर शिरोधार्य करना है। राम होने का अर्थ ताड़का का सुधार, अहिल्या का उद्धार, सीता का श्रृंगार तो सुपर्णखा का तिरस्कार, हर स्त्री से समूचित व्यवहार है। राम होना जहाँ लंकेश संहार के उपरांत शौर्य की पराकाष्ठा तो वहीं लंका को जस का तस छोड़ आना, मर्यादा की पुनर्स्थापना है। राम होने का अर्थ आज के युग में उस विश्वास का आना है जो कभी अपनी मिट्टी, संस्कृति और देश से उखड़ रहे लोगों के लिए सुरक्षा की प्रत्याभूति है, वह विश्वास के साथ कह सके कि 'मेरे साथ मेरे राम हैं'। यूं ही नहीं बनता कोई राम.... यूं ही नहीं बनता कोई पुरुषोत्तम। 


अभिवादन के 'राम-राम' से लेकर शौर्य के 'जय श्री राम' तक, रोम-रोम में तुम ही तुम हो राम.....और कितना लिखूँ? बस अपनी अनुकंपा बनाए रखना प्रभु।

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