सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Not demonic, just introverted! आसुरी नहीं, अंतर्मुखी!

मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ।   कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ।   मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...

EX PM Manmohan Singh's Demise

 


मनमोहन सिंह जी का भारत के प्रधानमंत्री पद तक पहुँचना एक बड़ी और महत्वपूर्ण घटना थी क्योंकि वे भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से विस्थापित हुए परिवार से थे। एक विस्थापित परिवार के व्यक्ति का प्रधानमंत्री पद तक पहुँचना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।

     सिंह साहब का जन्म वर्तमान पाकिस्तान के चकवाल जिले में हुआ था। आजादी के बाद हुए विभाजन के बाद पाकिस्तान से लुट पिट कर भारत की ओर भागते लगभग डेढ़ करोड़ पीड़ित हिंदुओं सिक्खों का हिस्सा थे वे। तब उनकी आयु लगभग 16 साल की रही होगी। उन्होंने उन्नीसवीं सदी में हुई सबसे बड़ी बर्बरता को अपनी आंखों से देखा और भोगा था।

     पाकिस्तानी जनता ने उधर के अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया था, यह बताने की कोई विशेष आवश्यक्ता नहीं। उस खूनी इतिहास के रङ्ग से हजारों किताबों के पन्ने लाल हैं। इतिहास का सामान्य विद्यार्थी भी उस अत्याचार को याद कर के सिहर उठता है।

     मैंने कई बार सोचा है, जिस आतंक से भयभीत हो कर सिंह साहब के परिवार को अपनी मिट्टी छोड़ कर भागना पड़ा, उसी आतंक के साये में जी रहे शेष सिक्खों हिंदुओं की उन्हें एक बार भी याद नहीं आयी? दस साल तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते समय वे पाकिस्तान से भाग कर आये सिक्खों हिंदुओं को नागरिकता देने के बारे में एक बार भी न सोच सके? पाकिस्तान या बंगदेश में अब भी अत्याचार झेल रहे अपने भाइयों के लिए भी न बोल सके? कितना दुखद है न यह...

     बंग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की दशा न भारतीयों से छिपी है, न ही विश्व विरादरी से। उनके उद्धार के लिए जिस व्यक्ति को सर्वाधिक मुखर हो कर काम करना चाहिये था, वे श्री मनमोहन सिंह जी थे। भारत विभाजन की पीड़ा को जिन करोड़ों लोगों ने भोगा था, उनमें मनमोहन सिंह सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुँचे थे। पर वे इस विषय पर चुप ही रहे... 

     सत्ता व्यक्ति को कितना असहाय कर देती है न? वे ही मनमोहन सिंह जी जब सत्ता में बने रहने के लोभ में कहते हैं कि भारत के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है, तो वे अपनी बची खुची प्रतिष्ठा भी खो देते हैं।

     समय व्यक्ति की क्षमता के अनुसार सबको मौका देता है। मनमोहन सिंह जी को भी इतिहास बनाने का मौका मिला था, पर उनसे न हो सका... 

     मैं जानता हूँ कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आलोचना करने की परम्परा नहीं है। वैसे मैं आलोचना कर भी नहीं रहा। यह बस एक दुख है... संसार में सहिष्णुता की परिभाषा बन कर खड़ी सभ्यता के लोग किसी के साथ अन्याय नहीं करते।


(तस्वीर पाकिस्तान में खंडहर हो चुके उनके घर की है जहां उनका बचपन बीता था।)

टिप्पणियाँ

Best From the Author

Not demonic, just introverted! आसुरी नहीं, अंतर्मुखी!

मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ।   कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ।   मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...

MSD The Disaster

 महेंद्र सिंह धोनी ने छुपने के लिए वो जगह चुनी, जिस पर करोड़ों आँखें लगी हुई थीं! वो जीज़ज़ की इस बात को भूल गए कि "पहाड़ पर जो शहर बना है, वह छुप नहीं सकता!" ठीक उसी तरह, आप आईपीएल में भी छुप नहीं सकते। कम से कम धोनी होकर तो नहीं। अपने जीवन और क्रिकेट में हर क़दम सूझबूझ से उठाने वाले धोनी ने सोचा होगा, एक और आईपीएल खेलकर देखते हैं। यहाँ वे चूक गए। क्योंकि 20 ओवर विकेट कीपिंग करने के बाद उनके बूढ़े घुटनों के लिए आदर्श स्थिति यही रह गई है कि उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा ही न मिले, ऊपरी क्रम के बल्लेबाज़ ही काम पूरा कर दें। बल्लेबाज़ी का मौक़ा मिले भी तो ज़्यादा रनों या ओवरों के लिए नहीं। लेकिन अगर ऊपरी क्रम में विकेटों की झड़ी लग जाए और रनों का अम्बार सामने हो, तब क्या होगा- इसका अनुमान लगाने से वो चूक गए। खेल के सूत्र उनके हाथों से छूट गए हैं। यह स्थिति आज से नहीं है, पिछले कई वर्षों से यह दृश्य दिखाई दे रहा है। ऐसा मालूम होता है, जैसे धोनी के भीतर अब खेलने की इच्छा ही शेष नहीं रही। फिर वो क्यों खेल रहे हैं? उनके धुर-प्रशंसक समय को थाम लेना चाहते हैं। वे नश्वरता के विरुद्ध...

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

National Mathematics Day 2021 - Remembering S. Ramanujan, The Man who knew ' The Infinity'

National Mathematics Day 2021 - Remembering S. Ramanujan , The man who knew 'The Infinity' The Man Who Knew The Infinity 22 दिसंबर को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है-जो देश में सभी चीजों में  गणित का चेहरा बने हुए हैं.  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आधिकारिक घोषणा के बाद 2012 में पहला राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया गया । S. Ramanujan  भारत का अपना जीनियस 1887 में भारत की अपनी प्रतिभा, रामानुजन का जन्म तमिलनाडु के इरोड में हुआ था. और बच्चे होने के बाद से ही उनके पास गणित के लिए एक कुशाग्रता थी, लेकिन माध्यमिक विद्यालय में ही रामानुजन ने खुद की क्षमता और गणित के अनुशासन को समझा। स्कूल स्तर के गणित में महारत हासिल करने के बाद अपनी उम्र के एक छात्र की उम्मीद की सीमा को पार करते हुए रामानुजन को फिर कुंभकोणम के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली । हालांकि, यह आदमी मैथ्स का इतना जुनूनी था कि वह अपने कोर्सवर्क के हर दूसरे सब्जेक्ट वाले हिस्से को फेल कर गया । इस वजह से उनकी दावेद...