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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

Not demonic, just introverted! आसुरी नहीं, अंतर्मुखी!


मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ।  


कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ।  


मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही हैं जो मेरी रचना, मेरी संवेदनशीलता और मेरी अंतर्दृष्टि को आकार देते हैं, तब यह अपेक्षा करना कि मैं हर वक़्त तुरंत, बिना गहराई से सोचे, सरल और सीधे‑सादे निर्णय ले लूँ — यह मेरे अस्तित्व की सच्चाई से इनकार करने जैसा है। मैं अपनी टूटन में भी खड़ा रहना चाहता हूँ, अपनी अस्थिरता के बीच भी अपनी जड़ें बनाए रखना चाहता हूँ। इसलिए कई बार मैं चुप रहता हूँ, लेकिन यह चुप्पी कोई खालीपन नहीं, बल्कि अंदर हो रही गहन गतिविधि का प्रतीक है।  

पैदा होते समय जब मेरे ग्रह ही वक्र थे तो समाज को ऐसा क्यूं लगता है कि मैं खुद सीधा चलूंगा।

मैं हर निर्णय लेते समय खुद से यह पूछता हूँ कि क्या यह चुनाव मेरी आत्मा की आवाज़ से मेल खाता है? क्या यह मुझे और अधिक ईमानदार और अधिक मानव‑निकट बनाएगा? उत्तर जब नकारात्मक दिखता है, तो मैं पीछे हटने या विचार करने में ज़रा भी संकोच नहीं करता। दुनिया अक्सर विचारशीलता को देरी और अनिर्णय की निशानी समझ लेती है, पर मेरे लिए यही विचारशीलता मेरी रक्षा कवच और आत्म‑सम्मान का आधार है।  


यही मेरी पहचान है — एक ऐसा व्यक्ति जो भावुक है, लेकिन भावनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं रहता; जो गहरा है, लेकिन गहराई में डूबकर खुद को खोना नहीं चाहता; जो अक्सर खुद से टकराता है, लेकिन उस टकराव से ही नई समझ और नई ताकत पाता है। मैं अपनी तरह से सोचता हूँ, अपनी तरह से चुनता हूँ और अपनी तरह से जीता हूँ — थोड़ा असुविधाजनक और असुरक्षित लग सकता हूँ, पर अपनी आत्मा की आवाज़ से कभी समझौता नहीं करता।

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