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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

सुभद्रा कुमारी चौहन SUBHADRA KUMARI CHAUHAN कवित्री जिसने सिद्ध किया वीर रस केवल मर्दों की जागीर नहीं है

कहने को तो स्त्री कोमल है, और पुरुष मजबूत। लेकिन एक स्त्री किसी भी पुरुष के भावुक रूप से सबसे अधिक प्रभावित होती है। यही स्थिति पुरुष के साथ भी है, वे मजबूत होते हैं, वे सोचते भी हैं कि स्त्री कोमल है, और ये उनको अवगत भी है, लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी वे सबसे अधिक प्रभावित स्त्री के मजबूत पक्ष से ही होते हैं। सुभद्रा कुमारी चौहन हमारा समाज भी जो पुरुष प्रधान है, इसमें दो राय नहीं है। यह समाज किसी स्त्री का परिश्रम उसका संघर्ष तब ही स्वीकार करता है, जब वह स्त्री इसी पुरुष प्रधान समाज में रहते हुए, इन्ही पुरुषों के बनाए नियमों में बंधने के बाद भी इसी पुरुष प्रधान समाज को धता बता देती है। शायद समाज का दोगलापन भी इसी को कहते हैं, कुछ हद तक ये ठीक भी है ( व्यवहार नही, स्टेटमेंट)। इसी विचारधारा को तोड़ने के लिए ही साहित्य जगत में सुभद्रा कुमारी चौहान का अवतरण हुआ होगा। मुझे याद नहीं किसी किताब में उनकी कोई ऐसी कविता छपी हो जिसमे स्त्री के प्रेम को प्रदर्शित किया गया हो। सुभद्रा जी को शायद यह बात पहले से ज्ञात थी कि यह समाज केवल संघर्षशील महिला को ही याद रख पाएगा। इसीलिए उन्हों...