समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं। और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है। यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता। वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता, परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता, और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है। और अचानक— उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है, घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है, और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी, धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है। काफ्का हमें दिखाते हैं कि समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं, बस उत्पादकता की कीमत चुकता है। जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है, दुखी, अलग, टूटा हुआ— तो वह बस एक बोझ बन जाता है। किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है। यह सच्चाई हम आ...
जब पुरुस्कार लेने वाले ने पुरूस्कार देने वाले राष्ट्रपति को दिया आशीर्वाद| Nanda Sir Blessed President of India
जब पुरुस्कार लेने वाले ने पुरूस्कार देने वाले राष्ट्रपति को दिया आशीर्वाद| Nanda Sir Blessed President of India मंगलवार को 102 वर्षीय नंदा प्रूट्टी ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है। Nanda Sir नंदा प्रूट्टी का अनौपचारिक स्कूल गांव में एक अस्थायी झोपड़ी से कार्य करता है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह भोर में खुलता है और बच्चों के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए सप्ताह में सात दिन रात 9 बजे तक चलता है.'नंदा सर' के नाम से मशहूर उन्होंने अपने जीवन के कई दशक ओडिशा के जाजपुर में बच्चों और वयस्कों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करते हुए बिताए हैं। अपने परिवार की वित्तीय स्थिति के कारण कक्षा 7 तक ही पढ़ाई कर पाए, वह अपने गांव में निरक्षरता उन्मूलन के लक्ष्य के साथ आजादी के बाद से बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं । अपने प्रयासों के लिए मंगलवार को भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार मिलने पर नंदा प्रूट्टी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को आशीर्वाद देने के लिए हाथ उठाया। राष्ट्रपति कोविंद ने साहित्य एवं शिक्षा के लिए श्री नंदा प्रूट्टी को पद्मश्री ...