सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

कहानी AIR INDIA के TATA से TATA तक के सफर की| A blogpost by Abiiinabu

कहानी AIR INDIA के TATA से TATA तक के सफर की...

अभी हाल ही में भारत सरकार ने Air India को 60 हजार करोड़ के कर्ज़ से छुटकारा पाने के लिए नीलाम कर दिया। जिसे Tata Sons ने 18000 करोड़ की कीमत देकर खरीद लिया जिसके बाद रतन टाटा के एक इंस्टाग्राम पोस्ट की बहुत चर्चा हो रही है। जिसमें उन्होंने यह कहा है कि Airline का टाटा में फिर से स्वागत है। 

  • कहानी AirIndia की...

Air India Air Line, मूलतः टाटा की एयरलाइन थी। जिसे भारत सरकार ने राष्ट्रीयकृत करके इसको अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। एयर इंडिया का वापस टाटा ग्रुप में जाना टाटा परिवार के लिए एक भावुक लम्हा है। आज हम आपको एयर इंडिया के टाटा से वापस टाटा के तक के सफर को सुनाएंगे। 
क्या आप जानते हैं J.R.D. Tata भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें फ्लाइंग सर्टिफिकेट यानी कि हवाई जहाज उड़ाने की क्षमता का सर्टिफिकेट प्रदान किया गया था। जब J R.D. Tata मात्र 25 साल के थे, तब उन्होंने यह प्राप्त कर लिया था, और उसके बाद वह पहले ऐसे व्यक्ति बने जो भारत की प्लेन को विदेशों तक ले गए। उन्होंने ही टाटा एवियशन सर्विसेज की स्थापना करके, भारत में पहली बार 1932 में कराची से मुंबई के बीच पहली बार पोस्टल एयरक्राफ्ट सर्विस शुरू की थी। ठीक इसी के अगले साल यानी 1933 में उन्होंने इस एयरलाइन सर्विस को जनता के लिए खोल दिया। 
जेआरडी टाटा को करीब से जानने वाले यह कहते थे कि एयरलाइन के संदर्भ में उनके दो मुख्य उद्देश्य थे पहला हवाई यात्रा को सस्ते से सस्ता किया जाए ताकि आम आदमी भी हवाई यात्रा कर सकें। और दूसरा यह की हमारी अपनी एयरलाइन में सुविधाएं इतनी आधुनिक एवं इतनी अच्छी होनी चाहिए, कि कोई भी इंसान उसकी तारीफ किए बिना रह ना सके। और जैसा कि हम जानते हैं एक समय में एयर इंडिया दुनिया की सबसे अधिक आवभगत करने वाली एवं सबसे अधिक आतिथ्य प्रदान करने वाली एयरलाइन थी। मुनाफा कमाना ही जेआरडी टाटा का एकमात्र उद्देश्य नहीं था वह जनता की भलाई के लिए भी कुछ करना चाहते थे।

  • आजादी के बाद बढ़ गया था Air India का कंपटीशन

1947 में भारत ब्रिटिश उपनिवेश से आजाद हो गया एवं आजाद भारत के साथ ही भारत में कई सारी एयरलाइन कंपनियां शुरू हो चुकी थी. जिसका सबसे अधिक प्रभाव एयर इंडिया को ही पड़ रहा था। अमेरिका और फ्रांस द्वारा शुरू की गई एयरलाइंस और सर्विस टाटा की कंपनी को कड़ी टक्कर दे रही थी। जेआरडी टाटा ने तात्कालिक भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू करने का सुझाव दिया। जिसे भारत सरकार ने खुशी-खुशी मान लिया। और जून 1948 में मुंबई से लंदन की ओर जाने वाला पहला अंतरष्ट्रीय भारतीय विमान उड़ान भरा जो मिस्र और स्विट्जरलैंड होते हुए इंग्लैंड की धरती पर पहुंचा। यह उस समय का सबसे आधुनिक, सबसे महंगा एवं सबसे सुरक्षित हवाई जहाज था जिसका नाम मालाबार प्रिंसेस रखा गया था। और इसी के साथ एयर इंडिया की लोकप्रियता आसमान छूने लगी।

  • जब AirIndia की लोकप्रियता ही बन गई गले का फंदा

पहली अंतरराष्ट्रीय सफल उड़ान के बाद भारत सरकार भी टाटा एयरलाइन को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी। और इसी के लिए तात्कालिक सूचना एवं प्रसारण मंत्री रफी अहमद किदवई ने जेआरडी टाटा को उनकी पोस्टल सर्विस द्वारा देश के 4 सबसे बड़े महानगरों को जोड़ने की योजना बताई। जिसके जवाब में जेआरडी टाटा ने सुझाव दिया कि रात में हवाई जहाज को सुरक्षित एवं सफल लैंडिंग करने के लिए अभी बहुत से काम करने की आवश्यकता है। यदि वह काम समय रहते पूरे हो गए तो उनकी यह परियोजना निश्चित तौर पर लागू की जा सकती है। जिस पर किदवई साहब भड़क गए और उन्होंने यह प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया और यह पूरी परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। ठीक उसी समय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका भी अपना एक हवाई जहाज बेचने को तैयार हो गया था इसका नाम था Dacota। यह एक प्रकार का सेवा प्रदान करने वाला हवाई जहाज था. जिसको डाक एवं सैनिक इधर से उधर ले जाने के लिए प्रयोग किया जाता था। अच्छे मौके की तलाश में पहले से ताक रहे एक दर्जन अन्य उद्यमी, इस हवाई जहाज को खरीदने की जल्दबाजी कर बैठे और उन्होंने यह जहाज खरीद लिया। लेकिन भारत में हवाई सेवा का यह सफर इतना भी आसान नहीं होने वाला था।
अपना कंपटीशन बढ़ता देख जेआरडी टाटा ने मुक्त रूप से एक बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था एवं लाइसेंस देने की जल्दबाजी को मुख्य रूप से प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर रात में सफल लैंडिंग एवं सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी किए बिना पोस्टल सर्विस शुरू की गई तो यह बहुत घातक भी हो सकती है। यह कहना था कि भारत सरकार भड़क गई और जल्द ही किदवई साहब ने Himalayan Aviation नामक एक नई कंपनी की शुरुआत 1948 में कर दी। 
जिसके जवाब में जेआरडी टाटा ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि भारत में हवाई सफर इतना आसान नहीं है।। अब साफ तौर पर किदवई और टाटा आमने-सामने थे।

  • जब नेहरू का दांव पड़ गया उल्टा

मामले को तूल पकड़ता देख तात्कालिक प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हस्तक्षेप करना उचित समझा। उन्होंने एक बैठक बुलाई और जेआरडी टाटा को उनके उपयोगी सुझावों को समीक्षा करने के उद्देश्य से मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री जीएस राजध्यक्ष के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन कर दिया। लेकिन इस कमेटी ने जेआरडी टाटा की मांगों को उचित मानते हुए भारत सरकार को ही फटकार लगा दी कि वह अन्य कंपनियों को हवाई लाइसेंस उपलब्ध करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है और इस तरह नेहरू का यह दांव उन्हीं पर उल्टा पड़ गया।

  • Air India का राष्ट्रीयकरण

राजाध्यक्ष कमेटी की सिफारिशें सरकार के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं आई थी। उल्टे कमेटी ने फटकार लगाते हुए यह कहा था कि "जब इस देश में पहले से मौजूद चार कंपनियां भी ठीक से चल नहीं पा रही हैं तो आपको ऐसा क्यों लगता है कि 12 कंपनियों के साथ आप इस देश को ठीक से चला पाएंगे इस बात की क्या गारंटी है कि यह कंपनियां ना डूबे और इससे भारत में अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव ना पड़े।" 
राजाध्यक्ष कमेटी सरकार की आशंकाओं पर तो नहीं बैठी लेकिन इससे सरकार में मौजूद कुछ नेताओं का अहम अवश्य चोट खा गया था। और दिल्ली की गलियों में एयर इंडिया को राष्ट्रीयकृत करने की सुगबुगाहट तेज होने लगी।
कुछ समय बाद ही जैसा टाटा ने कहा था, अंबिका एयरलाइन और जुपिटर एयरलाइन बैंक करप्ट हो गई। और जैसे ही यह दोनों एयरलाइंस बैंक करप्ट हुई भारत सरकार ने एयर इंडिया के अंदर अन्य सभी एयरलाइंस को मिलाकर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
1952 में राष्ट्रीयकरण होने के बाद भारत सरकार ने 1953 में जेआरडी टाटा को एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का प्रमुख बना दिया।

  • इमरजेंसी और Air India का पतन

1975 में इमरजेंसी तक जेआरडी टाटा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में बने रहे। लेकिन 1978 में जब जनता दल की सरकार आई और प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई तब उन्होंने एयर इंडिया में परोसी जा रही वाइन को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि भारतीय मूल मदिरापान को बढ़ावा नहीं दे सकते। साथ ही फरवरी 1978 में ही एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को फिर से बनाया गया और जेआरडी टाटा को बोर्ड से ही बाहर कर दिया गया। बोर्ड से बाहर होने के बाद जेआरडी टाटा ने निराश होते हुए कहा था कि यह ठीक बिल्कुल वैसा ही है जैसा "किसी पिता से उसका बच्चा छीन लिया जाए।"
लेकिन 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस फिर से सत्ता में आई, इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनी, और जेआरडी टाटा फिर से बोर्ड ऑफ मेंबर बन गए और 1982 तक वह बोर्ड में बने रहे।
लेकिन इसके बाद कहानी पहले की तरह नहीं रही भारत सरकार से जेआरडी टाटा की तरह एयर इंडिया का रखरखाव हो नहीं पाया और वह धीरे-धीरे डूबने लगी और हालत यह हो गई थी एयर इंडिया पर 2021 में लगभग 61000 करोड रुपए का कर्जा हो गया। एक समय विश्व की सबसे रईस और शानदार मानी जाने वाली एयरलाइन प्रतिदिन 20 करोड़ का घाटा देने वाली एक ब्लीडिंग कंपनी बन कर रह गई।


लेकिन भारत सरकार ने अब कंपनी से अपना पीछा छुड़ा लिया है और एयर इंडिया फिर से टाटा के घर में लौट आई है। टाटा परिवार के लिए यह एक भावुक कर देने वाला क्षण है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए श्री रतन टाटा ने लिखा की यदि आज जेआरडी टाटा जीवित होते तो वह बेहद खुश होते।
Ratan Tata Tweet
Image Courtesy:- Ratan Tata Tweeter Handle

.

.

.
आपको हमारा आज का यह Blog कैसा लगा? अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो, तो आप इसे शेयर कर सकते हैं। 
धन्यवाद🙏
#airindia #maharajaisback #tataairlines #ratantata #jrdtata 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubt please let me know.

Best From the Author

The Metamorphosis book review

समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं।   और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है।   यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता।   वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता,   परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता,   और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है।   और अचानक—   उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है,   घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है,   और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी,   धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है।   काफ्का हमें दिखाते हैं कि   समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं,   बस उत्पादकता की कीमत चुकता है।   जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है,   दुखी, अलग, टूटा हुआ—   तो वह बस एक बोझ बन जाता है।   किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है।   यह सच्चाई हम आ...

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

Kashi ka Assi Book Review

**किताब समीक्षा: "काशी का अस्सी"** **लेखक**: काशीनाथ सिंह   **शैली**: व्यंग्यात्मक कथा साहित्य   **प्रकाशन वर्ष**: 2004 "काशी का अस्सी" हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण और चर्चित उपन्यास है, जिसे काशीनाथ सिंह ने लिखा है। यह किताब बनारस की जीवनशैली, वहाँ की संस्कृति और आम जनमानस की भाषा और बोलचाल का जीवंत चित्रण करती है। किताब का केंद्र बनारस का प्रसिद्ध अस्सी घाट है, जो सिर्फ एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि बनारसी जीवन का प्रतीक है। ### **कहानी का सारांश**: कहानी अस्सी घाट के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ विभिन्न तबकों के लोग बैठकर बातचीत, बहस और ठहाके लगाते हैं। यह बनारसी समाज की धड़कनों को पकड़ता है। किताब में कई पात्र हैं, जिनमें मुख्यत: पंडित, टीकाकार, शिक्षक, छात्र, नौकरीपेशा लोग और साधारण नागरिक शामिल हैं। हर व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण और जीवन के प्रति अपने अनुभव होते हैं, जो किताब को वास्तविक और मजेदार बनाते हैं। **काशी का अस्सी** में अस्सी घाट के पंडों और स्थानीय निवासियों के रोजमर्रा के जीवन को बड़े ही सजीव और व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। काशी का परंपर...

Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

Problems of Preamble of Indian Constitution| भारतीय संविधान के प्रस्तावना से क्यों ना खुश रहते हैं कुछ भारतीय|

Problems of Preamble of Indian Constitution |  भारतीय संविधान की प्रस्तावना से क्यों ना खुश हैं कुछ भारतीय Preamble of Indian Constitution पहले तो ये समझा जाए कि संविधान की प्रस्तावना है क्या? भारतीय संविधान की प्रस्तावना को निम्न प्रकार समझा जा सकता है। हम भारत के लोग इसका अर्थ हुआ कि संप्रभुता जनता में निहित है। भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए सामाजिक, आर्थिक, एवं राजनीतिक न्याय, तथा वैचारिक, अभिव्यक्ति, विश्वास एवं धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ-सथ प्रतिष्ठा एवं अवसरों की समानता प्रदान करेंगे। भारतीय संविधान व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के बंधुता का भी पाठ पढ़ाती है। भारतीय संविधान के प्रस्तावना के नीचे 26 नवंबर 1949 ईस्वी नीति मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष सप्तमी 2006 विक्रम संवत की तिथि पड़ी हुई है। जिसके बाद संविधान की प्रस्तावना इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित एवं आत्मर्पित करती है। क्या प्रस्तावना में संशोधन हो सकता है? केशवानंद भारती विवाद 1973 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया के संसद संविधान ...