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प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

कहानी AIR INDIA के TATA से TATA तक के सफर की| A blogpost by Abiiinabu

कहानी AIR INDIA के TATA से TATA तक के सफर की...

अभी हाल ही में भारत सरकार ने Air India को 60 हजार करोड़ के कर्ज़ से छुटकारा पाने के लिए नीलाम कर दिया। जिसे Tata Sons ने 18000 करोड़ की कीमत देकर खरीद लिया जिसके बाद रतन टाटा के एक इंस्टाग्राम पोस्ट की बहुत चर्चा हो रही है। जिसमें उन्होंने यह कहा है कि Airline का टाटा में फिर से स्वागत है। 

  • कहानी AirIndia की...

Air India Air Line, मूलतः टाटा की एयरलाइन थी। जिसे भारत सरकार ने राष्ट्रीयकृत करके इसको अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। एयर इंडिया का वापस टाटा ग्रुप में जाना टाटा परिवार के लिए एक भावुक लम्हा है। आज हम आपको एयर इंडिया के टाटा से वापस टाटा के तक के सफर को सुनाएंगे। 
क्या आप जानते हैं J.R.D. Tata भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें फ्लाइंग सर्टिफिकेट यानी कि हवाई जहाज उड़ाने की क्षमता का सर्टिफिकेट प्रदान किया गया था। जब J R.D. Tata मात्र 25 साल के थे, तब उन्होंने यह प्राप्त कर लिया था, और उसके बाद वह पहले ऐसे व्यक्ति बने जो भारत की प्लेन को विदेशों तक ले गए। उन्होंने ही टाटा एवियशन सर्विसेज की स्थापना करके, भारत में पहली बार 1932 में कराची से मुंबई के बीच पहली बार पोस्टल एयरक्राफ्ट सर्विस शुरू की थी। ठीक इसी के अगले साल यानी 1933 में उन्होंने इस एयरलाइन सर्विस को जनता के लिए खोल दिया। 
जेआरडी टाटा को करीब से जानने वाले यह कहते थे कि एयरलाइन के संदर्भ में उनके दो मुख्य उद्देश्य थे पहला हवाई यात्रा को सस्ते से सस्ता किया जाए ताकि आम आदमी भी हवाई यात्रा कर सकें। और दूसरा यह की हमारी अपनी एयरलाइन में सुविधाएं इतनी आधुनिक एवं इतनी अच्छी होनी चाहिए, कि कोई भी इंसान उसकी तारीफ किए बिना रह ना सके। और जैसा कि हम जानते हैं एक समय में एयर इंडिया दुनिया की सबसे अधिक आवभगत करने वाली एवं सबसे अधिक आतिथ्य प्रदान करने वाली एयरलाइन थी। मुनाफा कमाना ही जेआरडी टाटा का एकमात्र उद्देश्य नहीं था वह जनता की भलाई के लिए भी कुछ करना चाहते थे।

  • आजादी के बाद बढ़ गया था Air India का कंपटीशन

1947 में भारत ब्रिटिश उपनिवेश से आजाद हो गया एवं आजाद भारत के साथ ही भारत में कई सारी एयरलाइन कंपनियां शुरू हो चुकी थी. जिसका सबसे अधिक प्रभाव एयर इंडिया को ही पड़ रहा था। अमेरिका और फ्रांस द्वारा शुरू की गई एयरलाइंस और सर्विस टाटा की कंपनी को कड़ी टक्कर दे रही थी। जेआरडी टाटा ने तात्कालिक भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू करने का सुझाव दिया। जिसे भारत सरकार ने खुशी-खुशी मान लिया। और जून 1948 में मुंबई से लंदन की ओर जाने वाला पहला अंतरष्ट्रीय भारतीय विमान उड़ान भरा जो मिस्र और स्विट्जरलैंड होते हुए इंग्लैंड की धरती पर पहुंचा। यह उस समय का सबसे आधुनिक, सबसे महंगा एवं सबसे सुरक्षित हवाई जहाज था जिसका नाम मालाबार प्रिंसेस रखा गया था। और इसी के साथ एयर इंडिया की लोकप्रियता आसमान छूने लगी।

  • जब AirIndia की लोकप्रियता ही बन गई गले का फंदा

पहली अंतरराष्ट्रीय सफल उड़ान के बाद भारत सरकार भी टाटा एयरलाइन को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी। और इसी के लिए तात्कालिक सूचना एवं प्रसारण मंत्री रफी अहमद किदवई ने जेआरडी टाटा को उनकी पोस्टल सर्विस द्वारा देश के 4 सबसे बड़े महानगरों को जोड़ने की योजना बताई। जिसके जवाब में जेआरडी टाटा ने सुझाव दिया कि रात में हवाई जहाज को सुरक्षित एवं सफल लैंडिंग करने के लिए अभी बहुत से काम करने की आवश्यकता है। यदि वह काम समय रहते पूरे हो गए तो उनकी यह परियोजना निश्चित तौर पर लागू की जा सकती है। जिस पर किदवई साहब भड़क गए और उन्होंने यह प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया और यह पूरी परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। ठीक उसी समय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका भी अपना एक हवाई जहाज बेचने को तैयार हो गया था इसका नाम था Dacota। यह एक प्रकार का सेवा प्रदान करने वाला हवाई जहाज था. जिसको डाक एवं सैनिक इधर से उधर ले जाने के लिए प्रयोग किया जाता था। अच्छे मौके की तलाश में पहले से ताक रहे एक दर्जन अन्य उद्यमी, इस हवाई जहाज को खरीदने की जल्दबाजी कर बैठे और उन्होंने यह जहाज खरीद लिया। लेकिन भारत में हवाई सेवा का यह सफर इतना भी आसान नहीं होने वाला था।
अपना कंपटीशन बढ़ता देख जेआरडी टाटा ने मुक्त रूप से एक बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था एवं लाइसेंस देने की जल्दबाजी को मुख्य रूप से प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर रात में सफल लैंडिंग एवं सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी किए बिना पोस्टल सर्विस शुरू की गई तो यह बहुत घातक भी हो सकती है। यह कहना था कि भारत सरकार भड़क गई और जल्द ही किदवई साहब ने Himalayan Aviation नामक एक नई कंपनी की शुरुआत 1948 में कर दी। 
जिसके जवाब में जेआरडी टाटा ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि भारत में हवाई सफर इतना आसान नहीं है।। अब साफ तौर पर किदवई और टाटा आमने-सामने थे।

  • जब नेहरू का दांव पड़ गया उल्टा

मामले को तूल पकड़ता देख तात्कालिक प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हस्तक्षेप करना उचित समझा। उन्होंने एक बैठक बुलाई और जेआरडी टाटा को उनके उपयोगी सुझावों को समीक्षा करने के उद्देश्य से मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री जीएस राजध्यक्ष के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन कर दिया। लेकिन इस कमेटी ने जेआरडी टाटा की मांगों को उचित मानते हुए भारत सरकार को ही फटकार लगा दी कि वह अन्य कंपनियों को हवाई लाइसेंस उपलब्ध करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है और इस तरह नेहरू का यह दांव उन्हीं पर उल्टा पड़ गया।

  • Air India का राष्ट्रीयकरण

राजाध्यक्ष कमेटी की सिफारिशें सरकार के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं आई थी। उल्टे कमेटी ने फटकार लगाते हुए यह कहा था कि "जब इस देश में पहले से मौजूद चार कंपनियां भी ठीक से चल नहीं पा रही हैं तो आपको ऐसा क्यों लगता है कि 12 कंपनियों के साथ आप इस देश को ठीक से चला पाएंगे इस बात की क्या गारंटी है कि यह कंपनियां ना डूबे और इससे भारत में अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव ना पड़े।" 
राजाध्यक्ष कमेटी सरकार की आशंकाओं पर तो नहीं बैठी लेकिन इससे सरकार में मौजूद कुछ नेताओं का अहम अवश्य चोट खा गया था। और दिल्ली की गलियों में एयर इंडिया को राष्ट्रीयकृत करने की सुगबुगाहट तेज होने लगी।
कुछ समय बाद ही जैसा टाटा ने कहा था, अंबिका एयरलाइन और जुपिटर एयरलाइन बैंक करप्ट हो गई। और जैसे ही यह दोनों एयरलाइंस बैंक करप्ट हुई भारत सरकार ने एयर इंडिया के अंदर अन्य सभी एयरलाइंस को मिलाकर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
1952 में राष्ट्रीयकरण होने के बाद भारत सरकार ने 1953 में जेआरडी टाटा को एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का प्रमुख बना दिया।

  • इमरजेंसी और Air India का पतन

1975 में इमरजेंसी तक जेआरडी टाटा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में बने रहे। लेकिन 1978 में जब जनता दल की सरकार आई और प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई तब उन्होंने एयर इंडिया में परोसी जा रही वाइन को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि भारतीय मूल मदिरापान को बढ़ावा नहीं दे सकते। साथ ही फरवरी 1978 में ही एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को फिर से बनाया गया और जेआरडी टाटा को बोर्ड से ही बाहर कर दिया गया। बोर्ड से बाहर होने के बाद जेआरडी टाटा ने निराश होते हुए कहा था कि यह ठीक बिल्कुल वैसा ही है जैसा "किसी पिता से उसका बच्चा छीन लिया जाए।"
लेकिन 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस फिर से सत्ता में आई, इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनी, और जेआरडी टाटा फिर से बोर्ड ऑफ मेंबर बन गए और 1982 तक वह बोर्ड में बने रहे।
लेकिन इसके बाद कहानी पहले की तरह नहीं रही भारत सरकार से जेआरडी टाटा की तरह एयर इंडिया का रखरखाव हो नहीं पाया और वह धीरे-धीरे डूबने लगी और हालत यह हो गई थी एयर इंडिया पर 2021 में लगभग 61000 करोड रुपए का कर्जा हो गया। एक समय विश्व की सबसे रईस और शानदार मानी जाने वाली एयरलाइन प्रतिदिन 20 करोड़ का घाटा देने वाली एक ब्लीडिंग कंपनी बन कर रह गई।


लेकिन भारत सरकार ने अब कंपनी से अपना पीछा छुड़ा लिया है और एयर इंडिया फिर से टाटा के घर में लौट आई है। टाटा परिवार के लिए यह एक भावुक कर देने वाला क्षण है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए श्री रतन टाटा ने लिखा की यदि आज जेआरडी टाटा जीवित होते तो वह बेहद खुश होते।
Ratan Tata Tweet
Image Courtesy:- Ratan Tata Tweeter Handle

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धन्यवाद🙏
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