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The Metamorphosis book review

समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं।   और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है।   यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता।   वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता,   परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता,   और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है।   और अचानक—   उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है,   घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है,   और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी,   धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है।   काफ्का हमें दिखाते हैं कि   समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं,   बस उत्पादकता की कीमत चुकता है।   जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है,   दुखी, अलग, टूटा हुआ—   तो वह बस एक बोझ बन जाता है।   किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है।   यह सच्चाई हम आ...

मतलब अमेरिका की खोज कोलंबस ने नहीं की थी| Who Discovered America

मतलब अमेरिका की खोज कोलंबस ने नहीं की थी| Who Discovered America

छठी कक्षा. इतिहास का घंटा...
प्रो इतिहासकार मास्टर जी - अमेरिका की खोज किसने की थी?
ले टॉपर बेटा - अमेरिका की खोज कोलंबस ने की थी।
हो सकता है आने वाले समय में यह जवाब गलत हो। आखिर क्यों चलिए जानते हैं इस ब्लॉग में-
Colombus
Who Really Discovered America?
अगर आप भी आज तक यही मानते आए हैं कि अमेरिका की खोज क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी तो शायद यह ब्लॉग आप को गलत साबित कर दे।
अभी तक तो यही माना जाता आ रहा है कि अमेरिका की खोज क्रिस्टोफर कोलंबस ने 12 अक्टूबर 1492 को की थी। लेकिन सयाने लोगों की नई स्टडी ने यह दावा कर दिया है कि अमेरिका की खोज कोलंबस ने नहीं यूरोपीय लोगों ने कोलंबस से बहुत पहले कर दी थी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका की खोज वाइकिंगस ने कोलंबस से तकरीबन 500 साल पहले कर दी थी। उस जमाने में वाइकिंग्स को समुद्री डाकू खोजकर्ता या व्यापारी कहा जाता रहा होगा। 

  • क्या दावा किया गया है नए शोध में

शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने वह वर्ष ज्ञात कर लिया है जब क्रिस्टोफर कोलंबस से पहले नॉर्थ अमेरिका में यूरोपीय लोगों ने अपनी बस्ती बसाई थी। L' Anse aux Meadows नामक Norse बस्ती जिसे यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल घोषित कर रखा है, से प्राप्त एक लकड़ी की Carbon Dating करके वह वर्ष ज्ञात कर लिया है जब उसे बसाया गया था। यह वर्ष 1021 ईस्वी के आसपास का रहा होगा। गौरतलब हो कि कोलंबस ने अमेरिका को 1492 में खोजा था, इसका मतलब हुआ कि कोलंबस के 471 साल पहले अमेरिका में बस्तियां बनी हुई थी। 

  • क्या है शोधकर्ताओं के इस दावे का आधार

इस प्रचंड जानकारी का आधार शोधकर्ता अपनी नई स्टडी को मानते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि कोलंबस के अटलांटिक महासागर पार करने से बहुत पहले ही कनाडा के न्यूफाउंडलैंड (New Foundland) में लकड़ी की इमारतें बनी हुई थी. जिससे यह साबित हो जाता है कि क्रिस्टोफर कोलंबस से पहले भी वहां कोई रह रहा था। इन्हे वाइकिंग्स कहा जा रहा है।

  • आखिर कौन थे वाइकिंगस Vikings

वर्तमान नार्वे स्वीडन और डेनमार्क के आसपास के इलाकों में रहने वाले वाइकिंग्स उस समय के सबसे शानदार नाविक बेहतरीन शिकारी और उचित दिशा ज्ञात करने में माहिर थे।
Vikings
Vikings
उन्होंने आइसलैंड और ग्रीनलैंड पर कब्जा करके वहां बस्तियां बसाई। इन्हें 800 से 1100 ईस्वी के बीच आया हुआ माना जाता है।  नीदरलैंड के प्रसिद्ध भू वैज्ञानिक माइकल डी का मानना है कि वाइकिंग्स नहीं सबसे पहले अटलांटिक महासागर को पार किया जिसके लिए निश्चित तौर पर हमें इनका सम्मान करना चाहिए। 
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हमारा यह ब्लॉग प्रसिद्ध पत्रिका नेचर के एक लेख से प्रेरित है। अगर आपको हमारा यह ब्लॉक पसंद आया हो तो इसे शेयर कीजिए 
धन्यवाद🙏

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समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं।   और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है।   यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता।   वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता,   परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता,   और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है।   और अचानक—   उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है,   घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है,   और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी,   धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है।   काफ्का हमें दिखाते हैं कि   समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं,   बस उत्पादकता की कीमत चुकता है।   जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है,   दुखी, अलग, टूटा हुआ—   तो वह बस एक बोझ बन जाता है।   किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है।   यह सच्चाई हम आ...

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