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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

The Real Sigma Male of India after Independence, Interesting Facts about LAL BAHADUR SHASTRI लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में अनसुने तथ्य

Lal Bahadur Shastri, आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। उनका व्यक्तित्व उनके साहस और दृढ़ प्रतिज्ञा के कारण याद किया जाता है। उन्होंने भारत का नेतृत्व 1965 के पाकिस्तान युद्ध में बड़ी सफलता और कुशलता के साथ किया।  युद्ध के समय भारतीय जनमानस को सेना के साथ बांधे रखने के लिए उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया। उन्होंने भारत की आजादी के अभियान में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। उनका जीवन देश सेवा के लिए समर्पित था। उन्होंने नारा दिया कि सप्ताह में 1 दिन व्रत रखो क्योंकि देश खाद्यान्न की समस्या से जूझ रहा है जिसको बाद में इतिहास के सबसे महान कार्यों में से एक बताया गया। लेकिन बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्होंने देश को यह संबोधन देने से पहले इसे अपने बच्चों पर लागू किया था। आज 2 October है महात्मा गांधी के साथ लाल बहादुर शास्त्री   की जन्म जयंती के अवसर पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ जाने अनजाने तथ्यों के बारे में बताएंगे।    लाल बहादुर शास्त्री   का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को रामनगर काशी में मुंशी शरद प्रसाद के यहां हुआ था। बचपन में ही ...

बच्चे और कार्टून ।।A blogpost by Abiiinabu ।।

  बच्चे और कार्टून Modern Day cartoons      आज ऑफिस से घर आ रहा था, तो सीढ़ियां चढ़ते हुए पडोसी के टीवी की आवाज बहार से सुनी, किसी भारतीय अभिनेता की आवाज़ में कोई कार्टूनि आवाज लग रही थी। मैं उनके बच्चे को जनता हूँ, शर्त लगा के कह सकता हूँ कि कोई कार्टून ही चल रहा होगा।  ऐसे ही आते आते मन में सवाल आये कि हमारा बचपन शायद अच्छा था।  मैं कोई नई बात नहीं कर रहा हूँ।  अगर आप यह ब्लॉग पढ़ रहे हैं और आपकी उम्र 20 वर्ष या उससे ज़्यादा है, तब तो आप निश्चित ही मेरी बात सही मान रहे होंगे।  और यदि आप प्रौढ़ावस्था में पहुँच चुके हैं तब तो आप निश्चित रूप से कभी न कभी हम सबसे ही परेशान रहे होंगे।  मैं आज एक विश्लेषण करना चाहता हूँ, मैं ये जानना चाहता हूँ कि हमारे बचपन में जो  Cartoon आते थे वो हमको तब ज़्यादा सिखाते थे या आजकल जो कार्टून बच्चों को दिखाए जाते हैं उनसे उनका विकास हो रहा है?      यदि मैं ठीक हूँ तो जो लोग 90s में पैदा हुए हैं उनके लिए 2007 तक, जब तक भारत में एंटरटेनमेंट के नाम पर सिर्फ और सिर्फ टीवी ही था। उस समय के कार्टून...