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प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

The Real Sigma Male of India after Independence, Interesting Facts about LAL BAHADUR SHASTRI लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में अनसुने तथ्य

Lal Bahadur Shastri, आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। उनका व्यक्तित्व उनके साहस और दृढ़ प्रतिज्ञा के कारण याद किया जाता है। उन्होंने भारत का नेतृत्व 1965 के पाकिस्तान युद्ध में बड़ी सफलता और कुशलता के साथ किया।  युद्ध के समय भारतीय जनमानस को सेना के साथ बांधे रखने के लिए उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया। उन्होंने भारत की आजादी के अभियान में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। उनका जीवन देश सेवा के लिए समर्पित था। उन्होंने नारा दिया कि सप्ताह में 1 दिन व्रत रखो क्योंकि देश खाद्यान्न की समस्या से जूझ रहा है जिसको बाद में इतिहास के सबसे महान कार्यों में से एक बताया गया। लेकिन बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्होंने देश को यह संबोधन देने से पहले इसे अपने बच्चों पर लागू किया था। आज 2 October है महात्मा गांधी के साथ लाल बहादुर शास्त्री  की जन्म जयंती के अवसर पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ जाने अनजाने तथ्यों के बारे में बताएंगे।
  •   लाल बहादुर शास्त्री  का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को रामनगर काशी में मुंशी शरद प्रसाद के यहां हुआ था। बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उनकी माता राम दुलारी के ऊपर आ गई। उनकी माता ने शास्त्री जी की शिक्षा के लिए गरीबी में भी ऋण लेकर उन्हें पढ़ाया। बाद में नीरजा माधव ने उनके जीवन पर कई सारी किताबें लिखी हैं। शास्त्री जी हमेशा यह कहते थे कि, परमाणु बमों का परीक्षण समुद्र में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे समुद्र में रहने वाले हजारों जीव जंतुओं की मृत्यु हो जाती है जो पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है। 
  • शास्त्री जी बचपन में पढ़ने जाते समय गंगा नदी को तैर कर पार करके जाते थे। शास्त्री जी कई किलोमीटर लंबी गंगा नदी को आसानी से तैरकर पार कर लेते थे। जबकि उनके बैग और उनके कपड़े उनके सिर पर रखे होते थे  स्कूल में मेधावी छात्र होने के कारण उन्हें ₹3 की छात्रवृत्ति भी मिलती थी। 
  • मात्र 16 वर्ष की आयु में शास्त्री जी ने स्कूल छोड़ दिया। और गांधी जी के असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। कुछ समय बाद जब वे मात्र 17 वर्ष के थे, उन्हें जेल भी जाना पड़ा। लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया क्योंकि उनकी आयु बहुत कम थी। उसके बाद उन्हें वर्ष 1930 में ढाई साल के लिए जेल में बंद किया गया क्योंकि उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया था वह जेल में 1940 और 41 के बीच रहे और 1946 में उन्हें छोड़ दिया गया इस बीच वह पूरे 9 साल जेल में ही रहे।
  • शास्त्री जी का विवाह मिर्जापुर की ललिता देवी के साथ 16 मार्च 1928 में हुआ था. दहेज विरोधी होने के कारण उन्होंने दहेज में केवल एक चरखा और खादी का एक कपड़ा लिया था।
  • लाल बहादुर शास्त्री जी का व्यक्तित्व ईमानदारी एवं देश भक्ति से लबालब भरा हुआ था। जब वह जेल में थे तो उनकी पत्नी उनसे मिलने के लिए साथ में दो आम भी लेकर गई थी। इसके जवाब में वह अपनी पत्नी से बहुत नाराज हुए। शास्त्री जी का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति जेल में बंद है, और वह बाहर का कुछ भी खाता है तो यह नियम का उल्लंघन है। इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी का विरोध किया। यही नहीं एक बार उन्हें 15 दिन के पैरोल के ऊपर छोड़ा गया था, क्योंकि उनकी बेटी बहुत बीमार थी। लेकिन पैरोल की अवधि पूरी होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई, इसीलिए उसका अंतिम संस्कार करने के बाद शास्त्री जी दोबारा जेल लौट गए जबकि उनका पैरोल भी पूरा नहीं हुआ था।
  • शास्त्री जी जाति व्यवस्था के खिलाफ थे इसीलिए हुए अपने सरनेम का उपयोग नहीं करते थे। शास्त्री एक उपाधि थी जो उन्हें काशी विद्यापीठ से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मिली थी।
  • लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। उन्होंने एक बार कहा था कठिन परिश्रम प्रार्थना की तरह है, शास्त्री जी का भी ऐसा ही मानना था। वह बापू की विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित थे।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री को सन 1964 में देश का दूसरा प्रधानमंत्री चुना गया उस समय भारत खाद्यान्न की स्थिति से जूझ रहा था और खाद्यान्न उत्तरी अमेरिका से PL- 480 स्कीम  से मंगाया जाता था। लेकिन 1965 के युद्ध युद्ध के बाद देश में अकाल पड़ गया। ऐसी परिस्थितियों को सामने देख कर शास्त्री जी ने देशवासियों से सप्ताह में 1 दिन उपवास रखने की विनती की और जय जवान जय किसान का नारा दिया। 
  • प्रधानमंत्री बनने से पहले शास्त्री जी जब पुलिस के मंत्रालय में थे तब उन्होंने ही सबसे पहले लाठीचार्ज की जगह पर वाटर जेट का उपयोग करने की सलाह दी थी।
  • यातायात मंत्रालय में होने के समय लाल बहादुर शास्त्री ने महिलाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बसों में महिला कंडक्टर की भर्ती की और आज बसों में जो सीटें हम महिला यात्रियों के लिए आरक्षित पाते हैं, सबसे पहले उन्हें लाल बहादुर शास्त्री जी ने ही सुझाया था।
  • एक बार शास्त्री जी से हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में अपने पढ़ाई के समय एक्सपेरिमेंटल बाइकर टूट गया था। जिस से कुपित होकर स्कूल के चपरासी देवीलाल ने शास्त्री जी को थप्पड़ मार दिया और उन्हें प्रयोगशाला से बाहर निकाल दिया इस बात को शास्त्री जी कभी भूल नहीं पाए लेकिन उन्होंने इसे एक सकारात्मक पक्ष में लिया। 1954 में जब वह रेलवे मंत्रालय के प्रमुख बने और वह एक प्रोग्राम में हिस्सा लेने आए थे तो उन्हें देवीलाल भी दिखा देवीलाल ने उन्हें देखकर नजरें फेर ली और वह अपने दंड की प्रतीक्षा करने लगे लेकिन शास्त्री जी ने उसे मंच पर बुलाया उसे गले लगाया और अपने जीवन को ऊंचाई प्रदान करने के लिए देवीलाल का शुक्रिया अदा किया।
  • शास्त्री जी को वीआईपी और वीवीआईपी कल्चर बिल्कुल पसंद नहीं था वह कार्यक्रमों में आम आदमी की तरह पेश आना चाहते थे।
  • जब वह मैडेजिन से जा रहे थे तब उनके कॉलेज के एक दोस्त ने उन्हें टोका और उनसे कहा कि तुम्हारी शर्ट बगल से फटी हुई है जिस पर शास्त्री जी ने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया कि मैं एक गरीब परिवार से आता हूं मैं गरीब का बेटा हूं मैं ऐसे ही रहूंगा ताकि मैं गरीबों का दर्द समझ सकूं। 
  • शास्त्री जी जब प्रधानमंत्री थे तब उनके पुत्र सुनील शास्त्री ने एक बार सरकारी गाड़ी का उपयोग अपने कॉलेज जाने में किया था शास्त्री जी को जब यह बात पता चली तो है ड्राइवर और अपने पुत्र दोनों पर गुस्सा हुए उन्होंने कहा की है सरकारी घर और गाड़ी जनता की सेवा करने के लिए देश के प्रधानमंत्री को दिए गए हैं ना कि व्यक्तिगत रूप से मुझे उन्होंने साढ़े 4₹ अपनी सैलरी से निकालकर भारत सरकार के खाते में डाल दिए।
  • शास्त्री जी जीवन पर्यंत रेलवे की तृतीय श्रेणी में यात्रा करते रहे। एक बार जनरल बोगी में आम आदमी की समस्याओं से रूबरू होने के लिए रेल मंत्रालय के प्रमुख होने के बावजूद उन्होंने जनरल बोगी से सफर किया था जिसके बाद उन्होंने जनरल बोगियों में पंखे लगवा दिए। 1954 में हुए महबूबनगर रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने रेल मंत्रालय के पद से इस्तीफा दे दिया था।
  • लाल बहादुर शास्त्री ने श्वेत क्रांति दुग्ध क्रांति को अपने प्रधानमंत्री काल में प्रोत्साहित किया आनंद में बनी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड उन्हीं के कार्यकाल में बनी है।
  • जब 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया तो 1962 के चाइना युद्ध के बाद वरना पाने के बावजूद भी राष्ट्रपति ने आपातकालीन बैठक बुलाई इसमें प्रधानमंत्री और तीनों सेनाओं के सेनापति शामिल थे। जब सेना प्रमुख ने कहा कि हमें क्या करना चाहिए तब शास्त्री जी ने तपाक से कहा आप देश की रक्षा करते हैं आप हमसे क्यों पूछ रहे हैं कि हमें क्या करना चाहिए? आप वो कीजिए जो आपको ठीक लगता है। और सारा विश्व इस बात को जानता है कि भारत ने पाकिस्तान को बहुत बुरी तरह से हराया।
  • शास्त्री जी प्रधानमंत्री बनने के बाद जब पहली बार रेडियो से बोले तो उन्होंने कहा था "हर राष्ट्र के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब है इतिहास को देखकर यह समझना चाहता है कि उसे किस दिशा में जाना चाहिए। लेकिन हमारे देश के संदर्भ में बिना किसी रोक तोक बिना किसी हिचकिचाहट और बिना किसी परेशानी के बिना दाएं बाएं देखें हम यह कहना चाहते हैं कि हमारा रास्ता बिल्कुल सीधा साफ और मजबूत है हम भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को आजादी समृद्ध ता और विश्व शांति का संदेश देना चाहते हैं हम हर देश के साथ मित्रवत व्यवहार करना भी चाहते हैं।"
  • 1965 के पाकिस्तान युद्ध में भारतीय जनमानस को संबोधित करते समय उन्होंने देश की जनता से कहा  "अगर तलवार की नोक से या एटम बम की ताकत से कोई इस देश को झुका न चाहे दबाना चाहे तो वह ये जान ले कि यह देश झुकने वाला नहीं है। एक सरकार होने के नाते हमारा क्या जवाब हो सकता है सिवाय इसके कि हम हथियारों का जवाब हथियारों से दे।"
  • 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद प्रेस समझौते पर साइन करने तात्कालिक सोवियत संघ के ताशकंद गए जहां पर उनका 11 जनवरी 1966 को हृदय गति रुकने के कारण निधन हो गया। हालांकि यह अभी भी संदेहस्पद है कि उनकी मृत्यु कैसे हुई?
  • वर्ष 2011 में RTI से पूछे सवाल में सरकार ने कहा था कि लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु से जुड़े आंकड़े और तथ्य यदि जनता के लिए खोल दिए जाएं, तो इस देश का लोकतंत्र संकट में पड़ सकता है। हालांकि बॉलीवुड में द ताशकंद फाइल्स  नाम से उनकी मृत्यु की गुत्थी को सुलझाने का प्रयास किया गया है।
  • शास्त्री जी किसी देश में उसकी प्रशासनिक सेवा के महत्व को अच्छी तरह समझते थे, और प्रशासनिक सेवा के बहुत बड़े पुरोधा भी थे। उनका मानना था कि शासन भले ही कितना भी अच्छा क्यों ना हो जब तक प्रशासन उसका साथ अच्छे से नहीं देगा, तब तक देश में पूर्ण रूप से शांति स्थापित नहीं हो सकेगी। इसीलिए भारत सरकार ने इस देश के सबसे बड़े प्रशासनिक प्रयोगशाला को श्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखने का निर्णय लिया।
  • मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन  इसी का उदाहरण है जहां इस देश के IAS अपना प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। 
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...हम आशा करते हैं कि आपको हमारे यह ब्लॉग एवं यह जानकारी पसंद आई होगी अगर आपके पास कोई ऐसा तथ्य हो जो हमने ना लिखा हो तो आप उसे कमेंट सेक्शन में लिखना ना भूले। अपने दोस्तों के साथ ऐसे जानकारी को शेयर कीजिए ।
...धन्यवाद🙏

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