सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

Is Amazon becoming East India Company 2.0? क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है? A blogpost by Abiiinabu

Is Amazon becoming East India Company 2.0 ? क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?

क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?
Is Amazon becoming East India Company 2.0?

भारत में E-commerce Market का इतना बड़ा बिजनेस होने के कारण कहीं ई-कॉमर्स कंपनियां भारत को अपनी संपत्ति से उपनिवेश तो नहीं बना पाएंगी। भारत; जो हाल ही में उपनिवेशवाद के दमनकारी चक्र से बाहर निकला है, क्या फिर से व्यापार के जरिए औपनिवेशिक संस्था बनने की राह पर तो नहीं है?
    आप सब को यह तो मालूम ही होगा कि वर्ष 1600 में स्थापित East India Company पहले तो भारत में केवल व्यापार करने ही आई थी। लेकिन यहां की राजनीतिक उठापटक एवं कमजोर नेतृत्व के जरिए उसने यहां की राजनीतिक कमजोरी का फायदा उठाते हुए भारत को उपनिवेश के दमन चक्र में बांध कर रख दिया। जिसके कारण भारत ने विश्व भर में अपनी साख, अपना रसूख एवं सोने की चिड़िया होने का दंभ मात्र 200 सालों में इस कदर तक खोया कि आजादी के बाद यहां भूख से मरने वालों की संख्या करोड़ों में थी।
आजादी के मात्र 75 सालों के अंदर अंदर एक और विदेशी कंपनी भारतीय लोगों को अपनी उपभोक्तावाद की नीति में इस कदर फांस रही है की उसे East India Company 2.0 कहा जाने लगा है। यह कंपनी कौन सी है? आखिर वह ऐसा क्यों कर रही है? और इससे भारत को क्या नुकसान हो सकता है? आज के इस ब्लॉग में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे।

    अभी हाल ही में भारत सरकार पर 8546 करोड ₹ की रिश्वत लेने का आरोप लगा है, यह रिश्वत उन्हें AMAZON कंपनी ने दी थी। क्योंकि Amazon यह चाहता था कि भारत सरकार ई-कॉमर्स के कुछ नियम उनकी कंपनी को फायदा पहुंचाने की दृष्टि से बनाएं। अमेजॉन भारत में ई-कॉमर्स मार्केट में अपनी Monopoly  स्थापित करना चाहता है जिसकी वजह से वह इस प्रकार के कदम उठाने को ठीक मान रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अमेजॉन पर इस प्रकार के आरोप लग रहे हैं इससे पहले अमेजॉन की ओटीटी संस्था Amazon Prime Videos पर भारतीय संस्कृति के खिलाफ फिल्में एवं वेब सीरीज दिखाने का आरोप लग चुका है। 
29 मार्च 2018 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने Amazon पर अपनी मोनोपली स्थापित करने के आरोप लगाते हुए कहा था-
    " अमेज़न की मोनोपोली की वजह उसकी तकनीकी है जिसके कारण छोटे व्यापारी अपना धंधा नहीं चला पा रहे हैं यदि हमने बहुत जल्द इसका उपाय नहीं सोचा तो हालत बद से बदतर हो जाएंगे"

Amazon पर लगाए गए इन आरोपों के पांच बड़े मुख्य कारण सामने दिखाई देते हैं-

  1. Amazon के पास अथाह संपत्ति है जिसकी वजह से वह आए दिन बड़े-बड़े Discount ऑफर करता है, जिसकी वजह से परंपरागत दुकानदार एवं Offline Grocers उससे मुकबला नहीं कर सकते जिसकी वजह से उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ती है.
  2. Amazon अपने E-commerce Plateform पर बड़े-बड़े सेलर्स को तवज्जो देता है और छोटे व्यवसायियों को बाद के पेजों पर रखता है। जिसकी वजह से छोटे व्यापारियों के साथ पक्षपात हो रहा है.
  3. Amazon अपने खुद के सब ब्रांड और खुद के ब्रांड को आक्रामक तरीके से बाजार में उतारता है जिससे बाकी के व्यापारियों के साथ न्याय नहीं हो पाता।
  4. Amazon अपने इकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे व्यवसायियों को ऊंचा कमीशन देने के लिए बाध्य करता है, एवं साथ ही साथ ग्राहकों को जबरदस्ती छूट देने के लिए भी बाध्य करता है। जिसकी वजह से छोटे व्यापारियों के पास अंत में कुछ भी नहीं बचता।
  5. Amazon, E-commerce Regulations  के Loopholes के लिए रिश्वत देता है आखिर 8586 करोड रुपए उसने रिश्वत के तौर पर किसी काम के लिए ही तो दिए थे।अमेजॉन भारत में अकेले ई-कॉमर्स मार्केटिंग का 32% हिस्सा कब्जा किए हुए हैं। 

अगर कोई दुकानदार अमेजॉन पर अपना सामान बेचना चाहे तो भी अमेजॉन की कसी हुई मार्केटिंग स्ट्रेटजी में फंस कर वह अपना नुकसान ही करता है।जैसे-
  1. अमेजॉन नए और छोटे दुकानदारों से High Commission लेता है।
  2. अमेजॉन अपने खुद का प्लेटफार्म होते हुए भी उसी प्लेटफार्म पर Advertisement के जरिए भी पैसा बनाता है यानी कि अगर कोई छोटा दुकानदार अमेजॉन पर अपना सामान बेचना चाहें तो उसे अमेज़न को ही अमेजन के फर्स्ट पेज पर आने के लिए पैसे देने होंगे।
  3. Amazon के Delivery Charges और Distribution के Charges वह छोटे दुकानदारों से ही वसूलता है।
  4. अमेजॉन के ऊपर ग्राहकों के डाटा को सेव करने का भी आरोप लगता है जिसका प्रयोग मैं Lucrative और सफलतापूर्वक अपने उत्पाद बेचने के लिए करता है। इस को सरल भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि यदि अमेजॉन को पता है कि, आपको क्या खरीदना है तो वह उसी चीज को अपने ब्रांड में बेचकर आपको दिखाएगा। और यदि कोई प्रोडक्ट बना तो अमेजॉन पर सबसे पहले कौन सा प्रोडक्ट दिखेगा? बात सीधी सी है- अमेजॉन  का। यह छोटे दुकानदारों एवं बड़े दुकानदारों दोनों के साथ अन्याय पूर्ण व्यवहार है।
Is Amazon becoming East India Company 2.0?  क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?
Amazon wants to Colonise India?

    कोरोना महामारी में हर छह में से एक दुकान बंद हो गई Indian Economy 23% संकुचित हो गई। लेकिन ई-कॉमर्स वेबसाइट का Income Groth 2 से 3 गुना अधिक बढ़ गया था। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं की महामारी का यह समय ई-कॉमर्स वेबसाइट के लिए चांदी का समय रहा।

    संयुक्त राज्य अमेरिका में 85% सामान अमेजॉन से मंगाया जाता है। इतने बड़े देश की जरूरतों का 85% केवल एक प्लेटफार्म से आ रहा है। यदि वह प्लेटफार्म इसका दुरुपयोग करने पर आ गया, तो वह हर वह वस्तु जो आवश्यक है उसका दाम अपने हिसाब से तय करेगा जिसकी वजह से महंगाई बढ़ेगी।

    अमेजॉन की वजह से ही पुराने व्यापारी ठप्प होते जा रहे हैं। और वह अपनी दुकानें बंद कर रहे हैं। जिसकी वजह से पुरानी नौकरियां खत्म हो रही है। और अमेजॉन एक साथ इतनी नौकरियां नहीं निकाल सकता। जिसकी वजह से देशों में बेरोजगारी की दर भी बढ़ रही है।

हमारा यह ब्लॉग पाञ्चजन्य नाम पत्रिका के कवर स्टोरी से प्रेरित है. आपका इस बारे में क्या मानना है ? कमेंट बॉक्स में लिख कर ज़रूर बताइयेगा |
यदि आपको यह ब्लॉग एवं इसकी जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर कीजिए एवं यदि आपके मन में कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखना ना भूलिए| 

धन्यवाद 🙏

टिप्पणियाँ

Best From the Author

The History of Gujarati Calendar

प्राचीन काल से ही हिंदुओं द्वारा भारत में दो प्रकार की कालानुक्रमिक प्रणालियों का उपयोग किया जाता रहा है। पहले को किसी ऐतिहासिक घटना से गणना करने के लिए वर्षों की आवश्यकता होती है। दूसरा किसी खगोलीय पिंड की स्थिति से गणना शुरू करता है। समय-समय पर और भारत के विभिन्न हिस्सों में एक ऐतिहासिक घटना की गणना अलग-अलग रही है। गुजरात, दक्षिण के कुछ हिस्से और आसपास के क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली सबसे हालिया ऐतिहासिक घटना विक्रम युग (58 ईसा पूर्व) है। शकों पर राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिक जीत के बाद विक्रम युग की स्थापना हुई। इस युग में गिने जाने वाले वर्षों को आमतौर पर विक्रमसंवत या केवल संवत शब्द से दर्शाया जाता है। वे बरसों बीत चुके हैं। उत्तर में प्रथा हर साल चैत्र (मार्च-अप्रैल) से शुरू होती है और हर महीने पूर्णिमा से। लेकिन दक्षिण के कुछ हिस्सों में और गुजरात में साल की शुरुआत कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) से होती है और महीनों की शुरुआत अमावस्या से होती है। शक, या शालिवाहन युग (78 ईस्वी) अभी भी भारत के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है। खगोलीय पिंडों से समय की गणना मे...

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

History of Chambal

 चम्बल का इतिहास क्या हैं? ये वो नदी है जो मध्य प्रदेश की मशहूर विंध्याचल पर्वतमाला से निकलकर युमना में मिलने तक अपने 1024 किलोमीटर लम्बे सफर में तीन राज्यों को जीवन देती है। महाभारत से रामायण तक हर महाकाव्य में दर्ज होने वाली चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। श्रापित और दुनिया के सबसे खतरनाक बीहड़ के डाकुओं का घर माने जाने वाली चम्बल नदी मगरमच्छों और घड़ियालों का गढ़ भी मानी जाती है। तो आईये आज आपको लेकर चलते हैं चंबल नदी की सेर पर भारत की सबसे साफ़ और स्वच्छ नदियों में से एक चम्बल मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में महू छावनी के निकट स्थित विंध्य पर्वत श्रृंखला की जनापाव पहाड़ियों के भदकला जलप्रपात से निकलती है और इसे ही चम्बल नदी का उद्गम स्थान माना जाता है। चम्बल मध्य प्रदेश में अपने उद्गम स्थान से उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में बहते हुए धार, उज्जैन, रतलाम, मन्दसौर, भिंड, मुरैना आदि जिलों से होकर राजस्थान में प्रवेश करती है। राजस्थान में चम्बल चित्तौड़गढ़ के चौरासीगढ से बहती हुई कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करोली और धौलपुर जिलों से निकलती है। जिसके बाद ये राजस्थान के धौलपुर से दक्षिण क...

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground T20 World Cup में खिलाड़ियों द्वारा किया जाने वाला Taking The Knee क्या है? बीते कुछ समय से हम सभी लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले खेलों में खिलाड़ियों को अपने एक घुटने के बल बैठता हुआ देखते आए हैं। चाहे फुटबॉल हो, क्रिकेट हो अथवा ओलंपिक खेल ही क्यों ना हो, खिलाड़ियों को अपने घुटने के बल बैठकर एक खास प्रदर्शन करना आखिर क्या दिखाता है? आखिर क्यों दुनिया भर के खिलाड़ी अपने अपने क्षेत्र में इस प्रकार की Body Language बना रहे हैं? Football Players Kneeling 18वीं और 19वीं शताब्दी में जब ब्रिटेन पूरी दुनिया पर अपना राज कर रहा था। तब ब्रिटिश अधिकारी कई अलग-अलग तरीकों से उन देशों के मूल निवासियों के प्रति घृणा का भाव रखते थे। जिनमें सबसे बड़ा भाव था रंग के आधार पर भेदभाव करना। रंगभेद, नस्लभेद या Racism भी कहा जाता है। रंगभेद और नस्ल भेद वक्त के साथ कमजोर पड़ते गए लेकिन कभी पूर्ण रूप से खत्म नहीं हो पाए। कुछ लोगों का केवल अपने त्वचा के रंग आधार पर यह मानना कि वह बाकी दुनिया से श्रेष्ठ हैं, एक प्रकार की विकृत ...

भारत का महान राजा अशोक, Ashoka The Great

अशोक, जिसे 'देवनामपिया पियादासी' या देवताओं के प्रिय के रूप में भी जाना जाता है, मौर्य वंश का अंतिम प्रमुख राजा था। उन्हें मुख्य रूप से उनके शासनकाल के दौरान भारत और विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रसार में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। 1830 के दशक के मध्य तक, जब जेम्स प्रिंसेप ब्राह्मी लिपि में एक शिलालेख को समझने में सक्षम थे, उन्हें मौर्य राजाओं की सूची में कई शासकों में से एक माना जाता था। अंतिम पुष्टि कि शिलालेख में देवानामपिया पियादासी के रूप में दिखाई देने वाला नाम अशोक का था, 1915 में आया था। अशोक मौर्य राजा बिंदुसार के पुत्र थे। जबकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वह अपने पिता की मृत्यु के तुरंत बाद सिंहासन पर चढ़ा, कई लोगों का तर्क है कि उनके कई भाइयों के बीच उत्तराधिकार के लिए संघर्ष में लगभग चार साल का अंतर था। एक प्रशासक के रूप में उनके करियर ने तब उड़ान भरी जब उन्होंने तक्षशिला में राज्यपाल के रूप में सेवा शुरू की। इसमें एक विद्रोह को दबाना और व्यावसायिक गतिविधियों को संभालना शामिल था। अशोक के शासन के दौरान विभिन्न घटनाओं में, कलिंग युद्ध को सबसे मह...