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The Metamorphosis book review

समाज लोगों से प्यार तब तक करता है, जब तक वे उसके लिए उपयोगी रहते हैं।   और जैसे ही कोई व्यक्ति उपयोगी होना बंद कर देता है—उसका अस्तित्व भी असहज हो जाता है।   यही वास्तविक भयावहता है काफ्का के "द मेटामॉर्फोसिस" की। ग्रेगर साम्सा रातों‑रात कोई राक्षस नहीं बन जाता।   वह बस एक ऐसा इंसान बन जाता है जो अब काम नहीं कर सकता, कमाई नहीं कर सकता,   परिवार की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता,   और समाज की उस "सामान्य" दुनिया में फिट नहीं बैठता जो हम सबको थोप देती है।   और अचानक—   उसका अपना कमरा छोटा लगने लगता है,   घर की बातचीत में ठंडक घर कर जाती है,   और वही परिवार जिसने कभी उस पर अपेक्षाएँ और निर्भरता रखी थी,   धीरे‑धीरे उसके बिना जीना सीख जाता है।   काफ्का हमें दिखाते हैं कि   समाज अक्सर मानवता की कीमत नहीं,   बस उत्पादकता की कीमत चुकता है।   जैसे ही कोई व्यक्ति कमज़ोर होता है, बेरोज़गार होता है,   दुखी, अलग, टूटा हुआ—   तो वह बस एक बोझ बन जाता है।   किसी इंसान की जगह एक “समस्या” बन जाता है।   यह सच्चाई हम आ...

Is Amazon becoming East India Company 2.0? क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है? A blogpost by Abiiinabu

Is Amazon becoming East India Company 2.0 ? क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?

क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?
Is Amazon becoming East India Company 2.0?

भारत में E-commerce Market का इतना बड़ा बिजनेस होने के कारण कहीं ई-कॉमर्स कंपनियां भारत को अपनी संपत्ति से उपनिवेश तो नहीं बना पाएंगी। भारत; जो हाल ही में उपनिवेशवाद के दमनकारी चक्र से बाहर निकला है, क्या फिर से व्यापार के जरिए औपनिवेशिक संस्था बनने की राह पर तो नहीं है?
    आप सब को यह तो मालूम ही होगा कि वर्ष 1600 में स्थापित East India Company पहले तो भारत में केवल व्यापार करने ही आई थी। लेकिन यहां की राजनीतिक उठापटक एवं कमजोर नेतृत्व के जरिए उसने यहां की राजनीतिक कमजोरी का फायदा उठाते हुए भारत को उपनिवेश के दमन चक्र में बांध कर रख दिया। जिसके कारण भारत ने विश्व भर में अपनी साख, अपना रसूख एवं सोने की चिड़िया होने का दंभ मात्र 200 सालों में इस कदर तक खोया कि आजादी के बाद यहां भूख से मरने वालों की संख्या करोड़ों में थी।
आजादी के मात्र 75 सालों के अंदर अंदर एक और विदेशी कंपनी भारतीय लोगों को अपनी उपभोक्तावाद की नीति में इस कदर फांस रही है की उसे East India Company 2.0 कहा जाने लगा है। यह कंपनी कौन सी है? आखिर वह ऐसा क्यों कर रही है? और इससे भारत को क्या नुकसान हो सकता है? आज के इस ब्लॉग में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे।

    अभी हाल ही में भारत सरकार पर 8546 करोड ₹ की रिश्वत लेने का आरोप लगा है, यह रिश्वत उन्हें AMAZON कंपनी ने दी थी। क्योंकि Amazon यह चाहता था कि भारत सरकार ई-कॉमर्स के कुछ नियम उनकी कंपनी को फायदा पहुंचाने की दृष्टि से बनाएं। अमेजॉन भारत में ई-कॉमर्स मार्केट में अपनी Monopoly  स्थापित करना चाहता है जिसकी वजह से वह इस प्रकार के कदम उठाने को ठीक मान रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अमेजॉन पर इस प्रकार के आरोप लग रहे हैं इससे पहले अमेजॉन की ओटीटी संस्था Amazon Prime Videos पर भारतीय संस्कृति के खिलाफ फिल्में एवं वेब सीरीज दिखाने का आरोप लग चुका है। 
29 मार्च 2018 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने Amazon पर अपनी मोनोपली स्थापित करने के आरोप लगाते हुए कहा था-
    " अमेज़न की मोनोपोली की वजह उसकी तकनीकी है जिसके कारण छोटे व्यापारी अपना धंधा नहीं चला पा रहे हैं यदि हमने बहुत जल्द इसका उपाय नहीं सोचा तो हालत बद से बदतर हो जाएंगे"

Amazon पर लगाए गए इन आरोपों के पांच बड़े मुख्य कारण सामने दिखाई देते हैं-

  1. Amazon के पास अथाह संपत्ति है जिसकी वजह से वह आए दिन बड़े-बड़े Discount ऑफर करता है, जिसकी वजह से परंपरागत दुकानदार एवं Offline Grocers उससे मुकबला नहीं कर सकते जिसकी वजह से उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ती है.
  2. Amazon अपने E-commerce Plateform पर बड़े-बड़े सेलर्स को तवज्जो देता है और छोटे व्यवसायियों को बाद के पेजों पर रखता है। जिसकी वजह से छोटे व्यापारियों के साथ पक्षपात हो रहा है.
  3. Amazon अपने खुद के सब ब्रांड और खुद के ब्रांड को आक्रामक तरीके से बाजार में उतारता है जिससे बाकी के व्यापारियों के साथ न्याय नहीं हो पाता।
  4. Amazon अपने इकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे व्यवसायियों को ऊंचा कमीशन देने के लिए बाध्य करता है, एवं साथ ही साथ ग्राहकों को जबरदस्ती छूट देने के लिए भी बाध्य करता है। जिसकी वजह से छोटे व्यापारियों के पास अंत में कुछ भी नहीं बचता।
  5. Amazon, E-commerce Regulations  के Loopholes के लिए रिश्वत देता है आखिर 8586 करोड रुपए उसने रिश्वत के तौर पर किसी काम के लिए ही तो दिए थे।अमेजॉन भारत में अकेले ई-कॉमर्स मार्केटिंग का 32% हिस्सा कब्जा किए हुए हैं। 

अगर कोई दुकानदार अमेजॉन पर अपना सामान बेचना चाहे तो भी अमेजॉन की कसी हुई मार्केटिंग स्ट्रेटजी में फंस कर वह अपना नुकसान ही करता है।जैसे-
  1. अमेजॉन नए और छोटे दुकानदारों से High Commission लेता है।
  2. अमेजॉन अपने खुद का प्लेटफार्म होते हुए भी उसी प्लेटफार्म पर Advertisement के जरिए भी पैसा बनाता है यानी कि अगर कोई छोटा दुकानदार अमेजॉन पर अपना सामान बेचना चाहें तो उसे अमेज़न को ही अमेजन के फर्स्ट पेज पर आने के लिए पैसे देने होंगे।
  3. Amazon के Delivery Charges और Distribution के Charges वह छोटे दुकानदारों से ही वसूलता है।
  4. अमेजॉन के ऊपर ग्राहकों के डाटा को सेव करने का भी आरोप लगता है जिसका प्रयोग मैं Lucrative और सफलतापूर्वक अपने उत्पाद बेचने के लिए करता है। इस को सरल भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि यदि अमेजॉन को पता है कि, आपको क्या खरीदना है तो वह उसी चीज को अपने ब्रांड में बेचकर आपको दिखाएगा। और यदि कोई प्रोडक्ट बना तो अमेजॉन पर सबसे पहले कौन सा प्रोडक्ट दिखेगा? बात सीधी सी है- अमेजॉन  का। यह छोटे दुकानदारों एवं बड़े दुकानदारों दोनों के साथ अन्याय पूर्ण व्यवहार है।
Is Amazon becoming East India Company 2.0?  क्या अमेज़न भारत को औपनिवेश बनाना चाहती है?
Amazon wants to Colonise India?

    कोरोना महामारी में हर छह में से एक दुकान बंद हो गई Indian Economy 23% संकुचित हो गई। लेकिन ई-कॉमर्स वेबसाइट का Income Groth 2 से 3 गुना अधिक बढ़ गया था। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं की महामारी का यह समय ई-कॉमर्स वेबसाइट के लिए चांदी का समय रहा।

    संयुक्त राज्य अमेरिका में 85% सामान अमेजॉन से मंगाया जाता है। इतने बड़े देश की जरूरतों का 85% केवल एक प्लेटफार्म से आ रहा है। यदि वह प्लेटफार्म इसका दुरुपयोग करने पर आ गया, तो वह हर वह वस्तु जो आवश्यक है उसका दाम अपने हिसाब से तय करेगा जिसकी वजह से महंगाई बढ़ेगी।

    अमेजॉन की वजह से ही पुराने व्यापारी ठप्प होते जा रहे हैं। और वह अपनी दुकानें बंद कर रहे हैं। जिसकी वजह से पुरानी नौकरियां खत्म हो रही है। और अमेजॉन एक साथ इतनी नौकरियां नहीं निकाल सकता। जिसकी वजह से देशों में बेरोजगारी की दर भी बढ़ रही है।

हमारा यह ब्लॉग पाञ्चजन्य नाम पत्रिका के कवर स्टोरी से प्रेरित है. आपका इस बारे में क्या मानना है ? कमेंट बॉक्स में लिख कर ज़रूर बताइयेगा |
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