सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

Harry Potter, Hagrid and Father's Day, a blogpost by Abiiinabu

     जो लोग हैरी पॉटर को जानते हैं, उनके लिए एक सवाल है और जो लोग हैरी पॉटर को नहीं जानते तो या तो वो 90 के दशक से पहले पैदा हुए हैं या वो इस दुनिया के नहीं हैं। तो वो लोग पहले किताब पढ़ लें, या अगर ये कठिन काम लग रहा हो तो काम से काम मूवीज तो देख ही लें, नहीं तो शायद मामला ऊपर से चला जाये और मैं ये कतई नहीं चाहता कि पूरी रामायण ख़तम होने के बाद आप मुझसे पूछने कि सीता किसका बाप था ( खीं खीं खीं)।  हाँ तो बात ये हैं कि जे के रोलिंग कि लिखी हैरी पॉटर की  सात किताबों के बाद एक और किताब आई थी जिसका नाम था cursed child।  उसमे एक बात पता चली कि हैरी पॉटर ने हॉगवर्ड्स की लड़ाई के बाद जेनी से शादी कर ली थी और उसके तीन बच्चे हुए।  यहाँ तक सब ठीक है, लेकिन नाम मुझे ऐसे लगे जैसे हैरी पॉटर पता नहीं क्यों ये भूल गया कि उसकी लाइफ में कई लोगों के बीच कुछ ऐसे भी लोग थे जो उसपर भरोसा करते थे। बच्चों के नाम रखे गए थे जेम्स सेरियस पॉटर, एल्बस सेवेरस पॉटर और लूना लिली पॉटर।  शायद इन लोगों का हैरी कि जिंदगी पर व्यापक प्रभाव था।  जेम्स, हैरी के पापा थे जिनको हैरी ने कभी देखा नहीं, सेरियस जेम्स के दोस्त थे और हैरी के गॉडफादर थे जो उसको बचाते बचाते चल बसे, एल्बस हॉगवर्ड्स के प्रिंसिपल थे और सेवेरस उसके माँ के प्रेमी थे जो पूरी ज़िन्दगी हैरी को दुश्मनी दिखा कर उसी को बचाते रहे।  लूना लवगुड हैरी कि दोस्त थी और उसको साथ देती थी तब जब हर्माइनी और रॉन भी नहीं देते थे, लिली हैरी कि माँ का नाम था जो उससे कभी मिल ही नहीं पाई। लेकिन इन सबके बीच एक हैग्रिड भी था जो हैरी को उसकी मौसी की कैद से छुड़ा कर लाया था और हैरी को शुरुआती दिनों में भरोसा दिखता रहा। 

     शायद ये आपको अजीब न लगे लेकिन हैरी को जब सभी पनौती मानते थे तब एक हैग्रिड ही थे जिसने उसपर सबसे पहले भरोसा दिखाया था, ऐसा हैरी ने भी माना है। हैग्रिड ने ही हैरी को एक पिता ही तरह सुविधा दी की वो भी अपनी जीवन में आगे बढे।  एक हैरी ने अपने एक भी बच्चे का नाम हैग्रिड के नाम पर नहीं रखा।  शायद वो ये भूल गया की जिन लोगों को आज वो इतना मानता है वो उसको हैग्रिड की वजह से ही मिले हैं।  अगर उस रात हैरी को लेने हैग्रिड नहीं जाते तो शायद हैरी कभी हॉगवर्ड्स नहीं जा पाता और उन लोगो से नहीं मिल पता जिनको वो आज इतना मानता है। 

        हम लोग भी अपनी अपनी जिंदगी ने हैरी की तरह हैं, जो लोग हमको आगे बढ़ने के रस्ते बताते हैं जिनपर चढ़ कर हम आगे ऊँचाइयों पर बढ़ते हैं जिनकी वजह से आज के हमारे सम्बन्ध और व्यवहार फल फूल रहे हैं उनकी बुनियाद को ही भूल जा रहे हैं।  इंसान कुछ भी शुरू करे कोई भी काम उसको सबसे पहले सिर्फ हौसला चाहिए होता है और जिस हौसले की वजह से उसका काम बढ़ चलता है, वो उसी को भूल जाता है।  एक बार एक लाइन पढ़ी थी कहीं कि "यदि आपने किसी का सच्चे दिल से अच्छा किया हो और बदले में उसी इंसान में आपका बुरा न किया और निश्चित तौर पर आपके अच्छा करने में कोई न कोई कमी रह गई होगी"। हमारे पिता भी उन्ही चुनिंदा लोगों में से होते हैं जो हमेशा आपको दुनिया की अच्छाई  ही दिखाएंगे। हैग्रिड का हैरी और हर्माइनी को समझाना, उनको वही कम्फर्ट जोन देना एक पिता के स्नेह के लक्षण हैं।  भले ही आज हैरी पॉटर दुनिया की सबसे बड़ी किताब ब्रांड है लेकिन ये बेसिक समझ न देना उसकी सबसे बड़ी कमी है।  

         शायद उस दिन हैग्रिड कि जगह हैरी लो लेने कोई और जाता लेकिन हैरी के साथ जितना लगाव हैग्रिड ने निभाया उतना शायद कोई और नहीं पाता।  हैग्रिड ने हैरी का साथ तब दिए जब उसके पास कोई भी नहीं था, जेनी भी नहीं।  शायद हैरी को याद रखना चाहिए था कि बुरे वक़्त में जो साथ देता है वही सच्चा दोस्त है और जो बुरे वक़्त को बदल देता है वही पिता होता है।  हमारे जीवन में पिता का रोले शायद हमको पता भी न हो, लेकिन उनके प्रयासों के बिना हमारे जीवन कि कल्पना भी दुष्कर है। हम कुछ भी काम शुरू करें पिता कभी ये नहीं चाहते कि उसमे व्यवधान पड़े।  कभी वो स्नेप की तरह हमको बुरा बनकर हमारा ही भला करते रहेंगे, कभी अपनी चिंता न करते हुए हमारे लिए अपनी शौक छोड़ देंगे सेरियस की तरह और जब हमारे पास कोई नहीं होगा तब हैग्रिड की तरह हमको हिम्मत देंगे।


हिम्मत देना और समस्या का हल ढूंढने में मदद करना मुझे तो सबसे महत्वपूर्ण लगता है।  आपको क्या लगता है, कमेंट में बताइयेगा ज़रूर।  वैसे हैरी पॉटर न ही बने हम तो अच्छा है, क्यूंकि हैग्रिड यदि अपना फायदा देखता तो उसको उस लकड़ी के जीने के नीचे बनी छोटी सी अलमारी में से कभी निकलता ही नही। 


पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें आप सभी को, शायद आप लोग सहमत हों या न हो, यदि सहमत हैं तो धन्यवाद और यदि सहमत नही है तो कमेंट बॉक्स खुला ही है।

-Abiiinabu


टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubt please let me know.

Best From the Author

प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

The History of Gujarati Calendar

प्राचीन काल से ही हिंदुओं द्वारा भारत में दो प्रकार की कालानुक्रमिक प्रणालियों का उपयोग किया जाता रहा है। पहले को किसी ऐतिहासिक घटना से गणना करने के लिए वर्षों की आवश्यकता होती है। दूसरा किसी खगोलीय पिंड की स्थिति से गणना शुरू करता है। समय-समय पर और भारत के विभिन्न हिस्सों में एक ऐतिहासिक घटना की गणना अलग-अलग रही है। गुजरात, दक्षिण के कुछ हिस्से और आसपास के क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली सबसे हालिया ऐतिहासिक घटना विक्रम युग (58 ईसा पूर्व) है। शकों पर राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिक जीत के बाद विक्रम युग की स्थापना हुई। इस युग में गिने जाने वाले वर्षों को आमतौर पर विक्रमसंवत या केवल संवत शब्द से दर्शाया जाता है। वे बरसों बीत चुके हैं। उत्तर में प्रथा हर साल चैत्र (मार्च-अप्रैल) से शुरू होती है और हर महीने पूर्णिमा से। लेकिन दक्षिण के कुछ हिस्सों में और गुजरात में साल की शुरुआत कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) से होती है और महीनों की शुरुआत अमावस्या से होती है। शक, या शालिवाहन युग (78 ईस्वी) अभी भी भारत के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है। खगोलीय पिंडों से समय की गणना मे...

History of Chambal

 चम्बल का इतिहास क्या हैं? ये वो नदी है जो मध्य प्रदेश की मशहूर विंध्याचल पर्वतमाला से निकलकर युमना में मिलने तक अपने 1024 किलोमीटर लम्बे सफर में तीन राज्यों को जीवन देती है। महाभारत से रामायण तक हर महाकाव्य में दर्ज होने वाली चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। श्रापित और दुनिया के सबसे खतरनाक बीहड़ के डाकुओं का घर माने जाने वाली चम्बल नदी मगरमच्छों और घड़ियालों का गढ़ भी मानी जाती है। तो आईये आज आपको लेकर चलते हैं चंबल नदी की सेर पर भारत की सबसे साफ़ और स्वच्छ नदियों में से एक चम्बल मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में महू छावनी के निकट स्थित विंध्य पर्वत श्रृंखला की जनापाव पहाड़ियों के भदकला जलप्रपात से निकलती है और इसे ही चम्बल नदी का उद्गम स्थान माना जाता है। चम्बल मध्य प्रदेश में अपने उद्गम स्थान से उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में बहते हुए धार, उज्जैन, रतलाम, मन्दसौर, भिंड, मुरैना आदि जिलों से होकर राजस्थान में प्रवेश करती है। राजस्थान में चम्बल चित्तौड़गढ़ के चौरासीगढ से बहती हुई कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करोली और धौलपुर जिलों से निकलती है। जिसके बाद ये राजस्थान के धौलपुर से दक्षिण क...

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground

History and Significance of Taking The Knee| Why Players Kneeling on the ground T20 World Cup में खिलाड़ियों द्वारा किया जाने वाला Taking The Knee क्या है? बीते कुछ समय से हम सभी लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले खेलों में खिलाड़ियों को अपने एक घुटने के बल बैठता हुआ देखते आए हैं। चाहे फुटबॉल हो, क्रिकेट हो अथवा ओलंपिक खेल ही क्यों ना हो, खिलाड़ियों को अपने घुटने के बल बैठकर एक खास प्रदर्शन करना आखिर क्या दिखाता है? आखिर क्यों दुनिया भर के खिलाड़ी अपने अपने क्षेत्र में इस प्रकार की Body Language बना रहे हैं? Football Players Kneeling 18वीं और 19वीं शताब्दी में जब ब्रिटेन पूरी दुनिया पर अपना राज कर रहा था। तब ब्रिटिश अधिकारी कई अलग-अलग तरीकों से उन देशों के मूल निवासियों के प्रति घृणा का भाव रखते थे। जिनमें सबसे बड़ा भाव था रंग के आधार पर भेदभाव करना। रंगभेद, नस्लभेद या Racism भी कहा जाता है। रंगभेद और नस्ल भेद वक्त के साथ कमजोर पड़ते गए लेकिन कभी पूर्ण रूप से खत्म नहीं हो पाए। कुछ लोगों का केवल अपने त्वचा के रंग आधार पर यह मानना कि वह बाकी दुनिया से श्रेष्ठ हैं, एक प्रकार की विकृत ...

भारत का महान राजा अशोक, Ashoka The Great

अशोक, जिसे 'देवनामपिया पियादासी' या देवताओं के प्रिय के रूप में भी जाना जाता है, मौर्य वंश का अंतिम प्रमुख राजा था। उन्हें मुख्य रूप से उनके शासनकाल के दौरान भारत और विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रसार में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। 1830 के दशक के मध्य तक, जब जेम्स प्रिंसेप ब्राह्मी लिपि में एक शिलालेख को समझने में सक्षम थे, उन्हें मौर्य राजाओं की सूची में कई शासकों में से एक माना जाता था। अंतिम पुष्टि कि शिलालेख में देवानामपिया पियादासी के रूप में दिखाई देने वाला नाम अशोक का था, 1915 में आया था। अशोक मौर्य राजा बिंदुसार के पुत्र थे। जबकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वह अपने पिता की मृत्यु के तुरंत बाद सिंहासन पर चढ़ा, कई लोगों का तर्क है कि उनके कई भाइयों के बीच उत्तराधिकार के लिए संघर्ष में लगभग चार साल का अंतर था। एक प्रशासक के रूप में उनके करियर ने तब उड़ान भरी जब उन्होंने तक्षशिला में राज्यपाल के रूप में सेवा शुरू की। इसमें एक विद्रोह को दबाना और व्यावसायिक गतिविधियों को संभालना शामिल था। अशोक के शासन के दौरान विभिन्न घटनाओं में, कलिंग युद्ध को सबसे मह...