सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

The Bloodiest Revolution in India's Freedom Movement that you haven't heard of!!!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आंदोलन का नाम एक ऐसे बदलाव के रूप में दर्ज है, जो आगे चलकर सामाजिक क्रांति का प्रतीक बन गया। पंजाब से शुरू हुए इस आंदोलन की नींव शालीन व्यक्ति के मालिक सतगुरु राम सिंह नामधारी ने रखी, जो एक धर्मगुरु, आंदोलन के नेतृत्वकर्ता और महिलाओं का उत्थान करने वाले शख्स के रूप में जाने जाते हैं। अपने बहुमुखी व्यक्तित्व के कारण ही वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने में समाज की स्थापना की और महिलाओं, खासकर बालिकाओं के रक्षक बनकर उभरे। उन्होंने नारी उद्धार, अंतर्जातीय विवाह व सामूहिक विवाह के साथ- साथ गौरक्षा के लिए जीवन समर्पित कर दिया। नामधारी सिखों की कुर्बानी स्वतंत्रता संग्रम के इतिहास में कूका आंदोलन के नाम से दर्ज है, जिसकी कमान सतगुरु राम सिंह के हाथों में थी 12 अप्रैल, 1857 को लुधियाना के करीब भैणी साहिब में सफेद रंग का स्वतंत्रता का ध्वज फहराकर कूका आंदोलन की शुरुआत हुई। खास बात यह थी कि सतगुरु राम सिंह के अनुयायी सिमरन में लीन रहते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाते थे। अंग्रेजों के खिलाफ हुंकार (कूक) करने के कारण उन्हें कूका के नाम से जाना जाने लगा। इस अदोलन में सभी वर्गों साधारण शामिल थे। लोगों में न सिर्फ आत्म सम्मान, देशप्रेम और भक्ति की या कि समाज में पनी के खिलाफ एक उन्होंने लोगों में स्वाभिमान जागृत किया। 

नामधारी समाज से संबंध रखने वाले लेखक संत सिंह कहते हैं, 'सतगुरु रामसिंह धार्मिक और सामाजिक सुधार आम लोगों के लिए धार्मिक नेताओं के चंगुल से निकलने की बुनियाद बन गए।"

कुरीतियों के साथ युद्ध
यह यह दौर था जब कन्याओं को पैदा होते ही मार देना, उन्हें बेच देना या उनका बाल विवाह कर देने जैसी कुरीतियां समाज में गहरी पकड़ बना चुकी थीं। गुरु जी ने इसकी वजह को समझा और पाया कि इन सभी का ताल्लुक विवाह में होने वाले भारी भरकम खर्च से है। उन्होंने तीन जून, 1853 को फिरोजपुर में छह जोड़ों का सामूहिक विवाह करवाकर सामाजिक बदलाव की शुरुआत की। साथ ही पुरुषों की तरह महिलाओं को भी अमृत छका कर (अमृतपान) उन्हे सिख पंथ से जोड़ा। उन्होंने महज सवा रुपए में विवाह करने की परंपरा की शुरुआत की, जो आज भी बरकरार है। इससे दहेज जैसी कुरीति पर अंकुश लगा और विवाह समारोहों में बेवजह खर्च की पेड़ भी कम हुई। महाराजा रणजीत सिंह की फौज छोड़ने के बाद उन्होंने सामाजिक जंग छेड़ने के लिए उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं का सहारा लिया।

घबरा गए अंग्रेज

उनकी बढ़ती लोकप्रियता से अंग्रेजो को भय हो गया कि नामधारी सिर्फ एक धार्मिक समुदाय नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक इरादे पालने वाला पंथ है, जो उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इसे तत्काल न कुचला गया तो यह खतरनाक रूप ले सकता है। इसी क्रम में सतगुरु राम सिंह को 1863 में लुधियाना के भैणी साहिब में नजरबंद कर दिया गया। अंग्रेजों ने लोगों को धर्म के नाम पर बांटने के लिए जब पंजाब में गौमांस के लिए बूचड़खाने खोले तो सतगुरु राम सिंह ने इसका कड़ा विरोध। किया। अंग्रेजों की मंशा थी कि इससे हिंदू, मुसलमान और सिख आपस में लड़ेंगे। नामधारियों ने लुधियाना के रायकोट के एक बूचड़खाने से बड़ी संख्या में गायों, को मुक्त कराया। उन्होंने गायों की सुरक्षा के लिए अपने अनुयायियों का भी प्रेरित किया। इस बगायत की सजा के तौर पर पांच अगस्त 1871 को तीन नामधारी सिखों को रायकोट में, दो नामधारी सिखों को 26 नवंबर, 1871 को लधियाना में व 15 दिसंबर, 1871 को चार नामधारी सिक्खों को तोप के मुंह के सामने बांध कर उड़ा दिया गया। 


विद्रोह कुचलने की हर कोशिश

मालेरकोटला में 15 जनवरी, 1872 को गायों को मुक्त करवाने के लिए नामधारियों ने बूचड़खानों पर हमला बोल दिया। 30 नामधारी सिख लड़ते हुए शहीद अंग्रेजों ने इस विद्रोह कुचलने के लिए, मालेरकोटला के परेड ग्राउंड में 49 नामधारी सिक्खों को तोपों के सामने खड़ा कर उड़ा दिया। 18 जनवरी, 1872 को 36 अन्य सिख भी ऐसे ही शहीद हो गए। चार लोगों को काले पानी की सजा हुई। इस घटना का असर यह हुआ कि लोग खुलकर नामधारी समुदाय से जुड़ने लगे और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत तेज कर दी। अब वे अंग्रेजों को ललकारने लगे। बड़ी संख्या में लोग सतगुरु राम सिंह के नेतृत्व में नामधारी बन गए और अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की। सतगुरु पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने असहयोग, अंग्रेजी वस्तुओं व सेवाओं के बहिष्कार को अंग्रेजों के विरुद्ध एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। भगत सिंह और उनके साथियों ने भी स्वतंत्रता की लड़ाई में नामधारी समाज के सहयोग की प्रशंसा की थी।



यदि आपको हमारा आज का ब्लॉग पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। 

टिप्पणियाँ

Best From the Author

The 2025 Knowledge Stack

  The 2025 Knowledge Stack I read 34 books in 2025. If I had to distill those thousands of pages into 4 life-changing lessons, this is what they would be. 📚👇 1. On Wealth & Wisdom: "The Almanack of Naval Ravikant" This wasn't just a book; it was a manual for the modern world. The biggest takeaway? "Specific knowledge" is your superpower. Build skills that feel like play to you but look like work to others. 2. On Strategy: "Lanka ka Yuddh" by Amish Tripathi ⚔️ A masterclass in how leadership and strategy are inseparable from ethics. It’s a reminder that how you win matters just as much as the win itself. 3. On Mindset: "The Courage to Be Disliked" 🧠 A radical lesson in emotional freedom. Most of our stress comes from trying to meet others' expectations. Real growth starts when you have the courage to be your authentic self, regardless of the "likes". 4. On Discipline: "Make Your Bed" by Admiral William H. McRaven...

The Story of Yashaswi Jaiswal

जिस 21 वर्षीय यशस्वी जयसवाल ने ताबड़तोड़ 98* रन बनाकर कोलकाता को IPL से बाहर कर दिया, उनका बचपन आंसुओं और संघर्षों से भरा था। यशस्‍वी जयसवाल मूलरूप से उत्‍तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। वह IPL 2023 के 12 मुकाबलों में 575 रन बना चुके हैं और ऑरेंज कैप कब्जाने से सिर्फ 2 रन दूर हैं। यशस्वी का परिवार काफी गरीब था। पिता छोटी सी दुकान चलाते थे। ऐसे में अपने सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ 10 साल की उम्र में यशस्वी मुंबई चले आए। मुंबई में यशस्वी के पास रहने की जगह नहीं थी। यहां उनके चाचा का घर तो था, लेकिन इतना बड़ा नहीं कि यशस्वी यहां रह पाते। परेशानी में घिरे यशस्वी को एक डेयरी पर काम के साथ रहने की जगह भी मिल गई। नन्हे यशस्वी के सपनों को मानो पंख लग गए। पर कुछ महीनों बाद ही उनका सामान उठाकर फेंक दिया गया। यशस्वी ने इस बारे में खुद बताया कि मैं कल्बादेवी डेयरी में काम करता था। पूरा दिन क्रिकेट खेलने के बाद मैं थक जाता था और थोड़ी देर के लिए सो जाता था। एक दिन उन्होंने मुझे ये कहकर वहां से निकाल दिया कि मैं सिर्फ सोता हूं और काम में उनकी कोई मदद नहीं करता। नौकरी तो गई ही, रहने का ठिकान...

Book Review: Chitralekha by Bhagwati Charan Verma

 चित्रलेखा – एक दार्शनिक कृति की समीक्षा लेखक: भगवती चरण वर्मा   प्रस्तावना   हिंदी साहित्य के इतिहास में *चित्रलेखा* एक ऐसी अनूठी रचना है जिसने पाठकों को न केवल प्रेम और सौंदर्य के मोह में बाँधा, बल्कि पाप और पुण्य की जटिल अवधारणाओं पर गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित किया। भगवती चरण वर्मा का यह उपन्यास 1934 में प्रकाशित हुआ था और यह आज भी हिंदी गद्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। इसमें दार्शनिक विमर्श, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और सामाजिक यथार्थ का ऐसा संलयन है जो हर युग में प्रासंगिक बना रहता है । मूल विषय और उद्देश्य   *चित्रलेखा* का केंद्रीय प्रश्न है — "पाप क्या है?"। यह उपन्यास इस अनुत्तरित प्रश्न को जीवन, प्रेम और मानव प्रवृत्तियों के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करता है। कथा की बुनियाद एक बौद्धिक प्रयोग पर टिकी है जिसमें महात्मा रत्नांबर दो शिष्यों — श्वेतांक और विशालदेव — को संसार में यह देखने भेजते हैं कि मनुष्य अपने व्यवहार में पाप और पुण्य का भेद कैसे करता है। इस प्रयोग का परिणाम यह दर्शाता है कि मनुष्य की दृष्टि ही उसके कर्मों को पाप या पुण्य बनाती है। लेखक...

Elon Musk दूर करेंगे दुनिया की भूख| Elon Musk to remove World Hunger Problem

Elon Musk दूर करेंगे दुनिया की भूख| Elon Musk to remove World Hunger Problem 300Billion $ की संपत्ति के बाद Elon Musk जी हां, आपने सही पड़ा। दुनिया का सबसे अमीर आदमी पूरी दुनिया से भुखमरी को खत्म करने के लिए आगे आ चुका है। एलन मस्क ने कहा है कि यदि उन्हें वर्ल्ड फूड प्रोग्राम एक ऐसा प्लान बता दे जिसकी वजह से 6 बिलियन डॉलर में पूरी दुनिया में से भुखमरी खत्म हो जाएगी तो वह निश्चित तौर पर ऐसा करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तेरी और पैसे की आवश्यकता होगी तो वह अपनी टेस्ला की हिस्सेदारी भी बेच देंगे। Elon Musk दूर करेंगे दुनिया की भूख: क्या है पूरा मामला? अभी कुछ दिनों पहले ही टेस्ला कंपनी के सह संस्थापक और अमेरिका के उद्योगपति एलन मस्क दुनिया के सबसे अधिक संपत्ति वाले व्यक्ति बन गए। उनकी कुल संपत्ति 300 बिलियन डॉलर के पार चली गई। इतनी संपत्ति पाकिस्तान जैसे देश की पूरी जीडीपी से भी ज्यादा है। ईश्वर बधाई देते हुए वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने एक ट्वीट किया कि यदि एलोन मस्क चाहे तो उनकी पूरी आए का केवल 2% भाग से पूरी दुनिया से भुखमरी हटाई जा सकती है। जिसके जवाब में एलोन मस्क ने कहा कि यदि ...

जानिए हिन्दू धर्म के चार वेदों में क्या लिखा है? What is written in Four Vedas of Hinduism

वेद शब्द की उत्पत्ति "वेद" शब्द से हुई है जिसका संस्कृत में अर्थ है "ज्ञान"। यह प्राचीन भारत में शिक्षा का सबसे पुराना पाठ्यक्रम था। स्वास्थ्य प्रणाली और दवाओं का ज्ञान ऋग्वेद से उपजा है जिसने आयुर्वेद नामक एक उप-प्रणाली को जन्म दिया। तीरंदाजी और युद्ध का ज्ञान जिसने भारत के कई महान राजाओं के कौशल को आकार दिया, यजुर्वेद से उपजा और धनुर वेद नामक एक उप-प्रणाली को जन्म दिया। सौंदर्यशास्त्र, संगीत और नृत्य का ज्ञान, जिसने भारत को महान कलात्मक इतिहास दिया, सामवेद से उपजा और गंधर्व वेद नामक एक उप-प्रणाली को जन्म दिया। व्यापार, धन और समृद्धि का ज्ञान अथर्ववेद से उपजा है जिसने अ र्थ-शास्त्र नामक एक उप-प्रणाली को जन्म दिया। भले ही आयुर्वेद ऋग्वेद में निहित है, इसे अथर्ववेद का एक हिस्सा भी माना जाता है जो अन्य 3 वेदों के लंबे समय बाद आया था। भारतीय हिन्दू जीवन का आधार वेद आखिर किस प्रकार का ज्ञान देता है? वेद धार्मिक ग्रंथ हैं जो हिंदू धर्म के अर्थ को सूचित करते हैं (जिसे सनातन धर्म भी कहा जाता है जिसका अर्थ है "शाश्वत आदेश" या "शाश्वत पथ")। वेद शब्...