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Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

India's first Vertical Lift Sea Bridge| All about New Pamban Railway Bridge

India's first Vertical Lift Sea Bridge| All about New Pamban Railway Bridge

Pamban Bridge
Old Pumban Bridge

    पम्बन पुल तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है जो सचमुच भारत का दक्षिणपूर्वी सिरे है। रामेश्वरम अपने आप में एक द्वीप है और यह इस सदी पुराने समुद्री पुल के माध्यम से भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है । यह पुल रामेश्वरम बस स्टैंड से 14.8 किमी दूर स्थित है। आप सरकारी बसों या निजी वाहनों से पुल तक पहुंच सकते हैं। आप रामेश्वरम जाने के लिए या तो रेल मार्ग या सड़क मार्ग ले सकते हैं जो इसके समानांतर चलता है।
    भारत देश का पहला वर्टीकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज तमिलनाडु के रामेश्वरम में बन रहा है। जिसका नाम पम्बन रखा गया है। दोहरे ट्रैक वाला यह पुल एक इंजीनियरिंग चमत्कार है। इस पुल की लम्बाई 2.07 किमी है; जिसको आने वाले मार्च 2022 तक बना कर पूरा कर लिया जायेगा। यह पुल रामेश्वरम से धनुष्कोडी को जोड़ता है। यह पल पम्बन द्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ेगा।  इसको पुराने पुल के स्थान के बदला जा रहा है। गैरतलब है कि पुराने पम्बन द्वीप को जोड़ने वाला पुल अंग्रेज़ों ने 1914 में बनवाया था।
Pamban Bridge
Rameshwaram and Dhanushkodi Location

    इस नए पुल कि विशेषता यह है कि इसको समुद्री जहाज़ों को रास्ता देने के लिए बीच से तोड़ कर ऊपर उठाया जा सकता है। भारत में यह इस तरह का पहला पुल होने की वजह से, तमिलनाडु को पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। 
    इलेक्ट्रो मैकेनिकल नियंत्रण प्रणाली से संचालित होने वाला यह पुल 18 मीटर के 100 स्पैन और 63 मीटर लम्बे एक नेविगेशन स्पैन द्वारा नियंत्रित किया जायेगा। इस पुल को ट्रैन नियंत्रण प्रणाली द्वारा, निर्बाध रूप से कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए भी बनाया जा रहा है। पुराने पुल को 106 से भी अधिक वर्ष पूरे हो चुके हैं, जिस कारन इसका मेंटेनेंस का खर्कगा बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।  इसी कारण नया ब्रिज बनाया जा रहा है।
New Pumban Bridge Normal Mode
New Pamban Bridge Normal Mode

    100 सालों तक भारत का सबसे लम्बा सी ब्रिज था- पम्बन ब्रिज 2011 में बांद्रा-वर्ली सी लिंक ने इसको रिप्लेस कर दिया। अधिक गति से ट्रैन चलाई जाए, इसका भी ध्यान नया ब्रिज बनाने में रखा जा रहा है। नया पुल पुराने पुल से 3 मीटर अधिक ऊंचा बनाया जा रहा है। जिसको बाद में 22 मीटर तक ऊंचा किया जा सकता है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 250 करोड़ आंकी गई है।
New Pumban Bridge Lifted Mode
New Pamban Bridge Lifted Mode

  • Interesting Facts About Pamban Bridge

  1. पम्बन पुल का निर्माण 1911 में शुरू हुआ था और इसे 24 फरवरी, 1914 को खोला गया था। 2007 में पम्बन पुल पर रेल लाइन को मीटर गेज से ब्रॉडगेज में बदल दिया गया।
  2. पुल का मध्य हिस्सा जर्मन इंजीनियर शेर्जर द्वारा डिजाइन किया गया था। यह हिस्सा है, 114 वीं अवधि है, पुल के साथ मिडवे, Scherzer अवधि कहा जाता है और यह नौका आंदोलन की अनुमति के लिए खुल जाता है । औसतन हर महीने पुल के नीचे से 10 से 15 नावें और छोटे जहाज गुजरते हैं। पुल के खुलने पर एक नौका के नीचे से गुजरना देखने को मिलता है।
  3. यह पुल 1964 में एक बड़े चक्रवात से बच गया था जो संपन्न बंदरगाह शहर धनुषकोडी को Hit कर रहा था ।
  4. पम्बन ब्रिज एक कैंटिलीवर पुल है, यानी, इसमें ऐसी संरचनाएं हैं जिसके कारण यह एक ओर सहारा लेकर हवा में खुल सकता है.
  5.  1964 में चक्रवात के कारण एक दुखद रेल दुर्घटना हुई, जिसके बाद भारतीय रेलवे ने डक्ट के रास्ते पम्बन में हवा के वेग की जांच के लिए उपकरण स्थापित किए । हवा की गति 58kmph से अधिक होने पर पुल पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी जाती है।

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