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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

Lord Commander Gaara Speech

 From the First Great Ninja War to the Last,

Shinobi have WOUNDED AND COME TO HATE EACH OTHER
for the benefit of their OWN Nation and Village.
That HATRED led to A DESIRE FOR POWER, 
and that DESIRE FOR POWER CREATED SOMEONE LIKE ME.

I too, was once FULL OF HATRED AND POWER!!!
I WAS A JINCHUURIKI!!!
I HATED THIS WORLD and ALL THE PEOPLE IN IT!!!
I constantly thought of NOTHING BUT DESTROYING IT.
I WAS NO DIFFERENT THAN WHAT AKATSUKI IS NOW!!! 

However a certain Shinobi from Konoha STOPPED ME! (Uzumaki Naruto)
HE SHED TEARS FOR ME!!!
HIS ENEMY!!!
EVEN THOUGH I HURT HIM...
HE STILL HE CALLED ME HIS FRIEND!!!
HE SAVED ME!!! 
MY ENEMY!!! 
MY FELLOW JINCHUURIKI!!!
He suffered the SAME PAIN as me, and yet BORE NO ILL WILL!!!
The moment WE UNDERSTAND each other's PAIN, our MALICE WILL DISAPPEAR!

THERE ARE NO ENEMIES HERE!
We are ALL ONE and it is because we have ALL BEEN AFFECTED by Akatsuki!!! 
The Sand Village, Stone Village, Leaf Village, Mist Village, Cloud Village...
THEY NO LONGER EXIST!!!

WE ARE NOW ONLY SHINOBI!!!
IF YOU STILL CANNOT FORGIVE THE Sand Village THEN 
I WILL GIVE YOU MY HEAD ONCE THIS WAR IS OVER!
OUR ENEMY IS NOW AFTER THE VERY FRIEND WHO SAVED ME!!!
If they capture him then it will be THE END OF THE WORLD!!!

I WANT TO PROTECT HIM!!! 
I WANT TO PROTECT THIS WORLD!!!
HOWEVER, I AM TOO YOUNG and NAIVE TO DO SO...
THAT IS WHY...
I NEED ALL OF YOU TO GIVE ME YOUR STRENGTH!!!


To protect our friends and this world, we will fight as one...
Until our dying breaths...

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Ten Dikpalas of Hindu Religion

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इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

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