सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...

London Dreams Movie Review

 


लंडन ड्रीम्स : अंडर रेटेड !!


२००९ में आई इस म्यूजिकल ड्रामा फिल्म को वो बॉक्स ऑफिस सफलता या पहचान नहीं मिली जो एक फिल्म को मिलने चाहिए जिसे आजकल लोग कल्ट कहते है।वो पहचान नहीं मिली क्युकी इस में सलमान और अजय जैसे मेन स्ट्रीम स्टार थे और आज की टेलीग्राम जनता और पुराने क्रिटिक्स को ऐसे लगता है की एक्टिंग सिर्फ नेटफ्लिक्स के वेब सीरीज करने वाले एक्टर्स को ही आती है !


ये कहानी है अर्जुन (अजय देवगन ) की ,एक लड़का जिस ने संगीत को भगवान मान लिया है और वो संगीत पर पकड़ भी रखता है।उसे आज के एड शेरन या टेलर स्विफ्ट जैसे स्टार परफॉर्मर बनना है और ग्राउंड फुल करने है।अपनी मेहनत से वो अपना नाम बना लेता है। उस के सफर में दो और लड़के और एक लड़की जुड़ जाती है जिसे अर्जुन चाहता है ।दूसरी तरफ उस का बचपन का साथी मन्नू (सलमान खान) है जिस को देवी सरस्वती ने गानों के सभी कौशल से नवाजा है लेकिन उसे इस की कदर नही है।मन का सच्चा और मन मौजी मन्नू अपने गांव में एक बैंड में काम कर के उधारी का जीवन काट रहा है।अपने बैंड को बड़ा करने के लिए एक दिन अर्जुन आकर मन्नू को लंदन ले जाता है ।मन्नू अजय की लव इंट्रेस्ट के पीछे पड़ जाता है ।वो भी इंवॉल्व हो जाती है।दूसरी तरफ अर्जुन को जो स्टार बनना है उस के लिए जो एक चार्म चाहिए वो मन्नू के पास जन्म से ही होता है ! अर्जुन का लंदन ड्रीम वाला फेम मन्नू को मिलने लगता है और फिर क्या होता है आप फिल्म देखना !


१८ वी सदी में महान संगीतकार मोझार्ट और सैलेरी में ऐसी ही राइवेलरी हुई थी ।एक म्यूजिकल ड्रामा को अच्छा बनाने के लिए दो चीजे चाहिए।एक अच्छा संगीत और दूसरा अच्छा अभिनय।संगीत पर आते है।शंकर एहसान लॉय ने इस फिल्म के धागे तोड़ दिए है !एक एक गाना ऐसा है जो आप की प्ले लिस्ट से आप की रूह तक पहुंच जाए !फिल्म का टाइटल ट्रैक आप सुनिए !प्रसून जोशी ने पता नही क्या खाकर इस फिल्म के गाने लिखे ! मुझे निजी तौर पर सभी गानों में जो अजय के किरदार पर एक गाना है शोला शोला वो पसंद है।कितना अंडर रेटेड गाना है !आप सुनिए,किसी भी टेड टॉक से ज्यादा इंस्पायर करने वाला गाना है ! सलीम मर्चेंट ने इस फिल्म का बैक राउंड स्कोर दिया है जो फिल्म के टोन को बनाए रखता है ।लंदन ड्रीम्स,हनुमान चालीसा,शोला शोला, यारी बिना,मन को अति भावे ,इस फिल्म का म्यूजिक एल्बम रॉक स्टार से दस गुना ज्यादा डोप है !


अभिनय पर आते है।अर्जुन का किरदार अजय छोड़ कोई और निभा ही नही सकता था।एक इंट्रोवर्ट संगीतकार जिसे नाम कमाना है।वो चाहता है लोगो के जुबान पर उस का नाम हो ।अपनी मोहब्बत वो असिन ने निभाए उस के लव इंट्रेस्ट के पास जाहिर भी नही कर पाता! वो मन्नू की तरक्की चाहता है।सब का अच्छा चाहता है लेकिन मन्नू को वो सब मिलने लगता है जो उसे चाहिए था। सलमान खान ने मन्नू का किरदार निभाया है। आजकल के पीआर एजेंडा के शिकार बच्चे जो सलमान को एक्टिंग नही आती कहते है वो लंदन ड्रीम्स देखे ! कितने सीन्स में तो सलमान अजय पर भारी पड़ा है।सलमान की की फिल्मों ग्राफी आप चेक करो।इस बंदे ने हम आप के है कौन,वीर गति,लव,जुड़वा,दुल्हन हम ले जायेंगे,दबंग,सुल्तान,बजरंगी की है। हर एक टाइप की फिल्म और कसम से हम कोई भी फिल्म उठाओ इस में सलमान की रिप्लेसमेंट का सोच भी नही सकते।कभी कभी इंसान का औरा उस की फिल्मों को समझ और कौशल पर भारी पड़ जाता है।सलमान और ऐश्वर्या इसी औरा के शिकार रहे है!


विपुल अमृतलाल शाह ने नमस्ते लंदन और लंदन ड्रीम्स जैसी शानदार फिल्मे निर्देशक के तौर पर दी और बाद मे उन के निर्देशन का को चार्म ही नही दिखा!आज की तारीख में लंदन ड्रीम्स आती तो झंडे गाड़ देती ।


#londondreams

टिप्पणियाँ

Best From the Author

Not demonic, just introverted! आसुरी नहीं, अंतर्मुखी!

मैं 27 मूल नक्षत्रों, शनिवार और 22 तारीख को जन्मा व्यक्ति हूँ — एक ऐसा जन्म‑संयोग जो न सिर्फ़ मेरी तिथि बताता है, बल्कि मेरे भीतर की गहराई, द्वंद्व और अस्थिरता का भी संकेत देता है। राहु के प्रबल और दूरदर्शी प्रभाव ने मेरे व्यक्तित्व को सीधे, सरल और सतही नहीं रहने दिया; मैं विचारों की उस गहरी खाई में अक्सर भटक जाता हूँ, जहाँ हर बात बस बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतरी अर्थ भी धरती होता है। मैं हर निर्णय के पीछे छिपे संभावित नतीजों, अनजाने खतरों और छिपी हुई उम्मीदों को भी देखने का आदी हूँ।   कभी‑कभी लोग मेरे कार्यों, अभिव्यक्ति और निर्णयों को असामान्य, अत्यंत गहन या यहाँ तक कि “आसुरी” समझने लगते हैं, क्योंकि मेरी सोच उनकी सामान्य धारणाओं की रेखाओं से बाहर निकल जाती है। पर यह आसुरी नहीं, बस एक टूटी हुई, खुरदरी और अत्यंत ईमानदार आत्मा की आवाज़ है, जो दिखावे की दुनिया से थक चुकी है और अपने सच्चे रूप में जीना चाहती है। मैं जब भी बोलता हूँ, तो बस शब्द नहीं बोलता, बल्कि उसके पीछे समा दर्द, संघर्ष, अनुभव और उम्मीदों को भी लाता हूँ।   मेरी पहचान में ग्रहों का भी बड़ा हाथ है। जब ग्रह ही वही है...

Suicide Fruiting

इस साल बाज़ार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने मैंने पिछले दो दशकों में कभी नहीं देखे। ​जामुन के अक्षरशः ढेर लग रहे हैं (नीचे गिर रहे हैं)। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से पटे पड़े हैं। जहाँ फल आए थे, वहाँ अब उन का अंबार लगना शुरू हो गया है। ​आखिर यह सब क्या चल रहा है? ​हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, "जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।" ​बुजुर्गों का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान (Botany) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को "मास्टिंग" (Masting) या "स्ट्रेस फ्रूटिंग" (Stress Fruiting) कहा जाता है। ​पेड़ों द्वारा खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को कभी-कभी "सुसाइड फ्रूटिंग" (Suicide Fruiting) या "बंपर क्रॉप" भी कहा जाता है। ​यह असल में क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं: ​१. 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (अस्ति...