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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

जानिए क्या है भारत में कोरोना के वैक्सीन की असलियत?

भारत आबादी के हिसाब से बड़ा देश है। चीन के बाद हम आबादी में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मुल्क हैं। इतने बड़े स्तर पर कोई भी योजना को लागू करने के लिए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ साथ, मजबूत प्रशासन की भी जरूरत पड़ती है।
भारत की आबादी लगभग 138 करोड़ की है। यानी अंकों में समझाएं तो 138 के आगे 7 शून्य लगा लीजिए।इतने बड़े पैमाने पर उतर कर कोई भी काम करने में समय की मांग होती है।
भारत की आबादी को अगर आयु वर्गों में बांटें तो उसको 3 मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है।
18 से 44 साल की आयु श्रेणी
45 से उपर, और
18 से नीचे
प्रत्येक श्रेणी में क्रमशः 62 करोड़, 44 करोड़ और 32 करोड़ के आसपास लोग हैं।
ये तो हुई आंकड़ों की बात, अब वैक्सीन के आंकड़ों की बात कर लेते हैं।
पहली आयु श्रेणी जो 18 से 44 साल के लोगो की है, इन 62 करोड़ लोगों को वैक्सीन के दो डोज लगाने के लिए लगभग 124 करोड़ लोगों की जरूरत पड़ेगी।
दूसरी आयु श्रेणी 45 से उपर वालो की है, इन 44 करोड़ लोगों को दो डोज लगवाने के क्रम में अभी 16 करोड़ डोज लग चुके हैं, और 72 करोड़ डोज की अभी और जरूरत है।

अगर 18 से कम आयु वर्ग को साथ ले लिया जाए तो हर दिन लगभग 54 करोड़ डोज की जरूरत होगी।
अगर हर दिन 40 लाख लोगों को भी डोज लगाई जाए तो जनसंख्या के आंकड़े बता रहे कि एक साल के बाद भी केवल 70% आबादी ही टीके लगवा चुकी होगी। बाकी 30% को लगभग 6 महीने और इंतजार करना पड़ेगा।
अभी के आंकड़े बताते हैं कि अभी केवल 20 से 25 लाख लोगों को ही रोज टीके लग पा रहे हैं, लेकिन शनिवार और रविवार को ये आंकड़े और भी कम हो जाते हैं।
अब सवाल ये है कि भारत में जिस हिसाब से टीके लग रहे हैं, उसी रफ्तार से ये काम कब तक पूरा होगा। और टीके मिल पाना एक अलग चुनौती बनती जा रही है।
ईश्वर इस बुरे वक्त में हम सबकी रक्षा करे।
तब तक आप घर में रहिए सुरक्षित रहिए
-abiiinabu






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Disclaimer :- This article is written only for educational and informative purpose. There is no intension to hurt anyone's feelings. This article is the original property of Abiiinabu. All data and knowledge are refred by various books and facts. Pictures that I used are not mine, credit for those goes to their respected owners. 


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