सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

The Greatness of Russian Literature

 रूसी साहित्य को दुनिया का सबसे सच्चा साहित्य माना जाता है और यह वास्तविकता को सबसे अधिक व्यक्त करने वाला साहित्य है। यह एकमात्र ऐसा साहित्य है जो मनोविज्ञान को बहुत पीछे छोड़ चुका है और मानव आत्मा की सुंदरता को उजागर करता है।  

यहां कुछ उद्धरण दिए गए हैं:


1. "यदि मैं उन सभी चीजों पर विजय पा भी लूं जो मुझे दुख देती हैं... तो भी मैं वह नहीं रहा जो पहले था।"  

— दोस्तोव्स्की  


2. "जो लोग एक साझा त्रासदी से जुड़े होते हैं, वे जब एक साथ इकट्ठा होते हैं तो एक प्रकार की राहत महसूस करते हैं।"  

— एंटन चेखव  


3. "जिसे हम भूलना चाहते हैं, वही स्मृति में बना रहता है।"  

— दोस्तोव्स्की  


4. "जब कोई आपके साथ विश्वासघात करता है, तो ऐसा लगता है जैसे उन्होंने आपकी बाहें काट दी हों—आप उन्हें माफ कर सकते हैं, लेकिन उन्हें गले नहीं लगा सकते।"  

— टॉल्स्टॉय  


5. "किसी व्यक्ति को उसके अतीत के पछतावे की स्मृति से अधिक कुछ नहीं सुधारता।"  

— दोस्तोव्स्की  


6. "सर्दियाँ उनके लिए ठंडी होती हैं जिनके पास गर्म यादें नहीं हैं, लेकिन मेरा मानना है कि यह उनके लिए और भी ठंडी होती है जिनके पास यादें तो हैं, लेकिन उनके मालिक नहीं हैं।"  

— दोस्तोव्स्की  


7. "मेरी राय में, किसी परिचय का सबसे अच्छा पल वह होता है जो विदाई से ठीक पहले आता है।"  

— दोस्तोव्स्की  


8. "हो सकता है कि मेरे पास उल्लेखनीय जीत न हो, लेकिन मैं आपको उन हारों से चकित कर सकता हूं जिन्हें मैंने जीवित रहकर पार किया है।"  

— चेखव  


9. "जो लोग खिड़की के पास बैठने पर जोर देते हैं, वे अक्सर रास्ते के बारे में कुछ नहीं जानते।"  

— लर्मोंटोव  


10. "इससे बुरा कुछ नहीं होता कि एक बूढ़ा व्यक्ति अपने सपनों को अपने बेटे के कंधों पर रख दे, और फिर नर्सिंग होम में जागे।"  

— दोस्तोव्स्की

टिप्पणियाँ

Best From the Author

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number

जब रामानुजन ने मजे मजे में दुनिया के सबसे बड़े गणितज्ञ को हैरान कर दिया| Hardy-Ramanujan-Number "The Man who Knew The Infiniy"; लेकिन श्रीनिवास रामानुजन तो वह महापुरुष थे जो Infinity से आगे का भी जानते थे।  उन्होंने अपनी शोध एवं पत्र से 3900 से अधिक परिणाम प्राप्त किए। हालांकि जिज्ञासु लोग (जैसे कि मैं) और गणित में मन रमाने वाले उन्हें हार्डी रामानुजन संख्या के लिए भी जानते हैं। आखिर क्या है Hardy-Ramanujan-Number हार्डी रामानुजन संख्या की खोज अचानक से बैठे-बिठाए हो गई थी। हुआ यूं था कि ब्रिटेन के जाने-माने गणितज्ञ GH Hardy अस्वस्थ Ramanujan को अस्पताल में मिलने गए थे। यह किस्सा रामानुजन की जीवनी The Man who knew Infenity में Robert Knaigel लिखते हैं।      हार्डी ने अस्वस्थ रामानुजन को चुटकी लेते हुए कहा कि वह जिस टैक्सी में उनसे मिलने आए हैं, उसका नंबर अंत में 1729 था। जो कि एक अशुभ संख्या है। यह संख्या किसी अन्य संख्या से नहीं कटती, अतः यह एक अभाज्य अशुभ संख्या हुई।  Taxi No. 1729 जिसके जवाब में रामानुजन ने तुरंत कहा जी ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में 1729 बहुत...

नौजवानी vs अनुभव

प्रशांत महासागर के हज़ारों फीट की ऊंचाई पर एक एयरबस 380 सैकड़ों यात्रियों के साथ उड़ रही थी। अचानक दो फाइटर प्लेन आसमान में दिखाई दिए और इस जहाज़ की तरफ उड़ने लगे। जब रेडियो संपर्क हुआ तो लड़ाकू विमान के एक युवा पायलट ने एयरबस के बुजुर्ग पायलट से कहा, 'कितनी बोरिंग फ्लाइट है तुम्हारी। देखो, मैं आपकी इस उड़ान को दिलचस्प बना देता हूँ! यह कहने के बाद, उसने अचानक गति पकड़ ली और एयरबस के चारों ओर तब तक कलाबाज़ियाँ दिखाता रहा,जब तक समुद्र का स्तर निकट नहीं आया, वहां से यह ऊपर गया, साउंड बैरियर को तोड़ दिया, मुड़ गया और एयरबस की तरफ आ गया। उत्तेजित स्वर में उसने फिर पूछा कैसा लगा? एयरबस पायलट ने कहा कि यह कुछ भी नहीं है। अब आप देखिए मैं क्या दिखाता हूं। दोनों युद्धपोत देखने लगे। समय बीत रहा था लेकिन विमान सीधा उड़ रहा था। काफी समय बाद एयरबस के सीनियर पायलट का एक रेडियो संदेश आया जिसमें पूछा गया कि आपको कैसा लगा? युवा फाइटर पायलट ने कहा, "लेकिन बॉस, आपने क्या किया है?" ? एयरबस के पायलट ने कहा, मैं बाथरूम गया था। रास्ते में कुछ लोगों से बातचीत हुई। फिर मैंने शांति से खड़े...

पार्टी में ओपन सोडा पीने से पहले एक बार सोच ले, महिलाएं जरूर पढ़ें ।।What is Rhypnol, be aware of Party drug, female readers must know about this।। Abiiinabu।।

What is Rhypnol, be aware of Party drug, female readers must know about this।। Abiiinabu।।पार्टी में ओपन सोडा पीने से पहले एक बार सोच ले, महिलाएं जरूर पढ़ें  कुछ दिनों से सोच रहा था कि कुछ ऐसा लिखूं, जिससे मुझे संतुष्टि और आपको फायदा दोनो मिलें यही सोचते सोचते न्यूज वाली एप्लीकेशन ( नाम नहीं बताऊंगा ऊ काहे कि नाम लिखने का पैसा नही दिया है उन्होंने) स्क्रॉल कर रहा था। वहां एक न्यूज देखी तो स्तब्ध रह गया। मतलब मुझे न्यूज में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की खबरें पढ़ने की आदत सी हो चली थी, लेकिन इसको पढ़ कर दिल में बस दो ही बातें आईं।  पहली तो ये कि ऐसा कैसे हो सकता है। और दूसरी ये कि कोई इतना नीच कैसे हो सकता है। दोनो का सार भी बताऊंगा लेकिन बाद में, पहले आप लोग खबर सुनो, खबर ये थी कि किसी शहर में दोस्तों के साथ पार्टी कर रही लड़की के साथ चार लड़कों ने कुकृत्य किया। लेकिन इसमें चौंकाने वाली बात ये कि लड़की को पता ही नही था कि उसके साथ ऐसा किया जा चुका है। ना शरीर पर चोटों के निशान, ना नाखून की खरोंचें, और ना शोर शराबा। एक बार को तो लगा की लड़की झूठ बोल रही है, ले...

कर्म फल तो भोगना ही पड़ेगा

 महाभारत के भयंकर नरसंहार के बाद पुत्र-वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने के लिए आगे बढ़ती हैं, तब श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं— माते!  मैं शोक, मोह और पीड़ा—इन सबसे परे हूँ, न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद, न मुझे सम्मान बाँधता है, न अपमान। न जीवन, न मृत्यु—किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ। मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में.. काल और महाकाल—दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो। जो शेष हैं—उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है.. कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं.. कृष्ण…! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा? तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ—अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है! पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था.. जब उसका दूध उतरता थ...

Bageshwar Baba Controversy

नालंदा! तात्कालिक विश्व का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय! कहते हैं, संसार में तब जितना भी ज्ञान था, वहाँ सबकी शिक्षा दीक्षा होती थी। सारी दुनिया से लोग आते थे ज्ञान लेने... बौद्धिकता का स्तर वह कि बड़े बड़े विद्वान वहाँ द्वारपालों से पराजित हो जाते थे। पचास हजार के आसपास छात्र और दो हजार के आसपास गुरुजन! सन 1199 में मात्र दो हजार सैनिकों के साथ एक लुटेरा घुसा और दिन भर में ही सबको मार काट कर निकल गया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक और उनके बीस हजार छात्र मात्र दो सौ लुटेरों से भी नहीं जूझ सके। छह महीने तक नालंदा के पुस्तकालय की पुस्तकें जलती रहीं।      कुस्तुन्तुनिया! अपने युग के सबसे भव्य नगरों में एक, बौद्धिकों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों की भूमि! क्या नहीं था वहाँ, भव्य पुस्तकालय, मठ, चर्च महल... हर दृष्टि से श्रेष्ठ लोग निवास करते थे। 1455 में एक इक्कीस वर्ष का युवक घुसा और कुस्तुन्तुनिया की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गयी। सबकुछ तहस नहस हो गया। बड़े बड़े विचारक उन लुटेरों के पैरों में गिर कर गिड़गिड़ाते रहे, और वह हँस हँस कर उनकी गर्दन उड़ाता रहा। कुस्तुन्तुनिया का पतन हो ग...