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प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

The Protocol

 क्या आप जानते हैं भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति राज्यपाल से भी ज्यादा प्रोटोकॉल जजों को हासिल है


 केंद्र सरकार या राज्य सरकार इन्हें सस्पेंड या बर्खास्त नहीं कर सकती 


उनके घर पुलिस सीबीआई ईडी बगैर चीफ जस्टिस के इजाजत के नहीं जा सकती 


यह कितने भी भ्रष्ट हो इनकी निगरानी नहीं की जा सकती उनके फोन या तमाम गजट को सर्वेलेंस पर नहीं रखा जा सकता


इसीलिए भारत का हर एक जज खुलकर भ्रष्टाचार करता है घर में नोटों की बोरे भर भरकर  रखता है 


और कभी पकड़ में नहीं आता 


जस्टिस वर्मा भी पकड  में नहीं आते अगर उनके घर पर आग नहीं लगी होती और एक ईमानदार फायर कर्मचारी ने वीडियो नहीं बनाया होता


 सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया की अफवाह फैलाई जा रही है


 दिल्ली हाईकोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया कि अफवाह  फैलाई जा रही है 


टीवी चैनलों पर वी के मनन अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े-बड़े वकील कह रहे थे आग तो जनरेटर में लगी थी अंदर कोई गया ही नहीं था तो नोट मिलने का सवाल कैसे उठाता 


तरह-तरह की थ्योरी दी जा रही थी


 मगर यह लोग भूल गए की आग बुझाने वाले ने यह सोचकर वीडियो बना लिया यह एक जज का घर है जो भारत में राष्ट्रपति से भी ऊंचा है बगैर सुबुत के इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी इसीलिए उसने वीडियो बना लिया


लेकिन जस्टिस वर्मा इतना घाघ है अब नई थ्योरी देकर कह रहा है कि स्टोर रूम तो मेरे कब्जे में था ही नहीं


यह वही जज है जिसने हेमंत सोरेन के खिलाफ सीबीआई जांच रोकने के आदेश दिए थे 


यह वही जज है जिसने दिल्ली दंगों के 11 दंगाइयों को पर्याप्त सबूत होने के बावजूद रिहा करने का आदेश दिया था जबकि निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दिया था


 आप लोग क्या समझते हैं यह सारे फैसले जस्टिस वर्मा ने यूं ही दिए होंगे ??

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