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संदेश

RCB vs CSK 2025

 सौ दिन की पराजय एक क्षण की कायरता से बेहतर होती है.. 18 साल के IPL में, कभी भी मैने, धोनी के क्रीज पर रहते हुए,चेपक को इतना खामोश नहीं देखा था, जितना खामोश चेपक आज था। बहुत से लोग धोनी को शायद इसलिए पसंद करते होंगे क्योंकि उसने ट्रॉफियां जिताई है, रन बनाए है, छक्के मारे है। पर मुझे धोनी सिर्फ और सिर्फ अपनी दिलेरी की वजह से पसंद रहा है। वो बांग्लादेश वाला मैच, जब एक रन बराबरी के लिए चाहिए था,कोई और विकेटकीपर होता तो थ्रो मार देता, पर हाथ में गेंद लेकर स्प्रिंट नहीं लगाता। क्योंकि थ्रो मारने पर थ्रो लगे न लगे,मामला फिफ्टी फिफ्टी का रहता है, कोई धोनी को ब्लेम करने नहीं जाता, पर हाथ में गेंद लेकर दौड़ने पर अगर एक दो सेकंड का फासला भी रहता तो सारा ब्लेम धोनी पर ही आना था, पर धोनी को कभी डर नहीं लगा इन बातों से। इसी तरह वर्ल्डकप फाइनल में, खुद को युवराज की जगह प्रमोट करना,वहां धोनी के पास पाने को कम और खोने को ज्यादा था। पर ये बन्दा उतरा, खेला, और जिताया भी।कई लोग धोनी को उस दिन के लिए ट्रॉल करते है, जब धोनी ने अंबाती रायडू को आधी पिच से लौटा दिया था इस कॉन्फिडेंट में कि लास्ट बॉल पर मै...
हाल की पोस्ट

The Justice Verma Incident

 हास्य व्यंग्य : वाह रे न्याय....!! फायर ब्रिगेड के ऑफिस में हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना जो मिली थी उन्हें। आग भी कहां लगी ? दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश “फलाने वर्मा” के सरकारी बंगले में..! घटना की सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के हाथ पांव फूल गए । "माई लॉर्ड" के बंगले में आग ! हे भगवान ! अब क्या होगा ? एक मिनट की भी अगर देर हो गई तो माई लॉर्ड सूली पर टांग देंगे ! वैसे भी माई लॉर्ड का गुस्सा सरकार और सरकारी कर्मचारियों पर ही उतरता है। बाकी के आगे तो ये माई लॉर्ड एक रुपए की हैसियत भी नहीं रखते हैं जिसे प्रशांत भूषण जैसे वकील भरी कोर्ट में उछालते रहते हैं।  बेचारे फायर ब्रिगेड के कर्मचारी एक साथ कई सारी फायर ब्रिगेड लेकर दौड़ पड़े और आनन फानन में आग बुझाने लग गए। अचानक एक फायर ऑफिसर की नजर सामने रखे नोटों के बंडलों पर पड़ी। वह एक दम से ठिठक गया। उसके हाथ जहां के तहां रुक गए..!! नोट अभी जले नहीं थे..!! लेकिन दमकल के पानी से खराब हो सकते थे.. इसलिए उसने फायर ब्रिगेड से पानी छोड़ना बंद कर दिया और दौड़ा दौड़ा अपने बॉस के पास गया...  "बॉस...!    म...

Kunal Kamra Controversy

 कुणाल कामरा विवाद: इस हमाम में सब नंगे हैं! कुणाल कामरा के मामले में दो तरह के रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ ऐसे लोग हैं जो स्टूडियो में हुई तोड़फोड़ और उन्हें मिल रही धमकियों को ठीक मान रहे हैं और दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो बेखौफ और बेचारा बता रहे हैं। मगर मुझे ऐसा लगता है कि सच्चाई इन दोनों के बीच में कहीं है।  इससे पहले कि मैं कुणाल कामरा के कंटेंट की बात करूं जिस पर मेरे अपने ऐतराज़ हैं, इस बात में तो कोई अगर मगर नहीं है कि आप किसी भी आदमी के साथ सिर्फ उसके विचारों के लिए मरने मारने पर उतारू कैसे हो सकते हैं? आप कह रहे हैं कि कुणाल कामरा ने एक जोक मारकर एक नेता का अपमान किया, तो मैं पूछता हूं कि महाराष्ट्र की पिछली सरकार में जो बीसियों दल-बदल हुए क्या वो जनता का अपमान नहीं था? पहले तो जनता ने जिस गठबंधन को बहुमत दिया, उसने सरकार नहीं बनाई, ये जनता का मज़ाक था। फिर सरकार बनी तो कुछ लोगों ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते सरकार गिरा दी। पहले कौन किसके साथ था, फिर किसके साथ चला गया और अब किसके साथ है, ये जानने के लिए लोगों को उस वक्त डायरी मेंटेन करनी पड़ती थी।...

Differences of Gold purity

 काम की बात: क्या आप जानते हैं 22, 23 तथा 24 कैरेट के सोने के बीच की भिन्नता ? यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं।  ज्वेलरी की शॉपिंग करते समय अक्सर ही हम लोग 22, 23 तथा 24 कैरेट सोने के बारे में सुनते रहते हैं ? और कई लोग इसी बात को विशेष ध्यान में रखते हुए सोने में निवेश किया करते हैं। ऐसे में कभी-कभी कई लोग इसी बात को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं कि आखिर इनमें क्या विशेष अंतर पाया जाता है? यदि आप भी सोने की खरीदारी अथवा उसमें निवेश करते हैं, तो आपको भी इस बात की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है।  आज इसी सिलसिले में हम आपको बताएंगे कि 22, 23 तथा 24 कैरेट सोने के बीच का क्या भिन्नता होती है? कैरेट का तात्पर्य सोने की शुद्धता होता है। जितने अधिक कैरेट का सोना होगा उसमे उतनी ही शुद्धता पाई जाएगी। सोने की शुद्धता को हम 0 से लेकर 24 कैरेट के बीच तक मापते हैं। यही कारण है कि 24 कैरेट के सोने को सबसे शुद्ध माना जाता है। आइए देखे इसका विस्तृत रूप 24 कैरेट का सोना, सोने की शुद्धता को 99.9 तक प्रदर्शित करता है। दूसरी ओर 22 कैरेट के सोने को हम 91 प्रतिशत तक शुद्ध मानते हैं।  क्यूंकि...

The Protocol

 क्या आप जानते हैं भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति राज्यपाल से भी ज्यादा प्रोटोकॉल जजों को हासिल है  केंद्र सरकार या राज्य सरकार इन्हें सस्पेंड या बर्खास्त नहीं कर सकती  उनके घर पुलिस सीबीआई ईडी बगैर चीफ जस्टिस के इजाजत के नहीं जा सकती  यह कितने भी भ्रष्ट हो इनकी निगरानी नहीं की जा सकती उनके फोन या तमाम गजट को सर्वेलेंस पर नहीं रखा जा सकता इसीलिए भारत का हर एक जज खुलकर भ्रष्टाचार करता है घर में नोटों की बोरे भर भरकर  रखता है  और कभी पकड़ में नहीं आता  जस्टिस वर्मा भी पकड  में नहीं आते अगर उनके घर पर आग नहीं लगी होती और एक ईमानदार फायर कर्मचारी ने वीडियो नहीं बनाया होता  सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया की अफवाह फैलाई जा रही है  दिल्ली हाईकोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया कि अफवाह  फैलाई जा रही है  टीवी चैनलों पर वी के मनन अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े-बड़े वकील कह रहे थे आग तो जनरेटर में लगी थी अंदर कोई गया ही नहीं था तो नोट मिलने का सवाल कैसे उठाता  तरह-तरह की थ्योरी दी जा रही थी  मगर यह लोग भूल गए की आग बुझ...

Glorified Kohli

 विराट कोहली ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर इंडियन टीम 2028 के ओलंपिक में गोल्ड मेडल खेलने के लिए उतरती है तो वो सिर्फ एक मैच के लिए रिटायरमेंट छोड़कर उस टीम का हिस्सा बनना चाहेंगे। वैसे तो ये सवाल हाइपोथेटिकल था,पर कुछ लोगो को कोहली के जवाब में निजी स्वार्थ भी दिख सकता है। पर मुझे इस जवाब में बस एक चीज दिखती है, Thirst for Glory, यानी नाम का लालच, legacy trap..अब कहने को बुद्धिजीवी लोग इस भावना में बीस कमियां निकाल सकते है, कि कैसे ये भावना टॉक्सिक है, पर असलियत में यही वो भावना है, जो दिल्ली के मामूली से क्रिकेटर को क्रिकेट का सरताज बनाती है।यही वो भावना है जिसकी वजह से रांची का टिकट कलेक्टर जमी जमाई नौकरी छोड़ देता है, यही वो भावना है जिसकी वजह से रोमांटिक फिल्मों के जमाने में एक मामूली सा आउटसाइडर एक्टर एक साइकोपैथ lover का रोल करने के लिए राजी हो जाता है। कामयाबी, पैसा, ये सब किसी न किसी तरह से मिल ही जाता है,इंसान अपने पोटेंशल का अगर 20% भी झोंक दे,तो ये सब कोई नामुमकिन चीज नहीं है। पर इंसान धोनी कोहली या शाहरुख खान तब बनता है, जब वो ग्लोरी के पीछे भागता है, लीगेसी के पीछे ...

Champions Trophy 2025

 क्रिकेट का अश्वत्थामा, के एल राहुल.. 96 के वर्ल्ड कप में विनोद कांबली की आंख में आंसू ये सोचकर आए थे कि,मेरे क्या मेरी टीम के फैंस मुझ पर जरा भी भरोसा नहीं है?क्या मै इनकी निगाह में इतना गिर चुका हू? आज के फाइनल में कुछ ऐसी ही हालत केएल राहुल की भी थी,सोचिए दुनिया का one of the finest player आपके dugout में बैठा हो, और फिर भी आपकी टीम के फैंस को doubt हो रहा हो कि मैच हाथ से निकल जायेगा?पर फैंस का ये बेबुनियाद नहीं था, ये डाउट शुरू हुआ था 23 के फाइनल के दिन से,जिस दिन इस सज्जन आदमी से एक बहुत बड़ी गलती हुई थी।सज्जन आदमी के साथ दिक्कत ये है कि वो थोड़ी सी भी गलती करता है तो उसे सुनाने में लोगो को बहुत मजा आता है। पर सज्जन आदमी के साथ इससे बड़ी दिक्कत ये है, कि छोटी से छोटी गलती दूसरे लोग नोटिस करे न करे, उसके खुद के अंदर एक अदालत चलती रहती है,तब तक जब तक वो उस गलती का हर्जाना न चुका दे।।23 के फाइनल में केएल राहुल से एक गलती हो गई थी, बेचारा अच्छा करने के चक्कर में बहुत बुरा कर बैठा। जबकि इस आदमी के लिए कभी भी सिवाय टीम के,और इस खेल के, दुनिया में कुछ और मायने नहीं रखता। पर उस फाइनल...

Tyagpatra by Jainendra Book Review

 त्यागपत्र: एक अंतर्मुखी पीड़ा की कहानी जैनेंद्र कुमार का उपन्यास 'त्यागपत्र' भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह उपन्यास मृणाल की कहानी है, जो अपने पति प्रमोद के द्वारा त्याग दी जाती है। कहानी मृणाल के अंतर्मुखी पीड़ा, सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संघर्ष को दर्शाती है। जैनेंद्र कुमार की लेखन शैली सरल और गहरी है। उन्होंने मृणाल के मन की उलझनों और भावनात्मक जटिलताओं को बहुत ही संवेदनशील तरीके से चित्रित किया है। कहानी में सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच का द्वंद्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मृणाल का त्यागपत्र केवल एक शारीरिक त्यागपत्र नहीं है, बल्कि यह उसके आंतरिक संघर्ष और मुक्ति की खोज का प्रतीक है। उपन्यास में प्रमोद का चरित्र भी जटिल है। वह एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो सामाजिक दबावों और अपनी कमजोरियों के कारण मृणाल को त्याग देता है। यह उपन्यास उस समय के समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्षों पर प्रकाश डालता है। 'त्यागपत्र' एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को सोचने पर मजबूर करता है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजि...

Sachin Tendulkar the GOAT

 "हेलमेट के नीचे, उन बेतरतीब घुंघराले बालों के भीतर, खोपड़ी के अंदर, कुछ ऐसा है जिसे हम पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं—कुछ ऐसा जो वैज्ञानिक माप से परे है। यही वह चीज़ है जो उसे उड़ने, क्रिकेट के क्षेत्र में राज करने की शक्ति देती है, जिसे न सिर्फ हम, बल्कि वे भी, जो उसके साथ खेलने के लिए पर्याप्त प्रतिभाशाली हैं, समझने की कल्पना भी नहीं कर सकते। जब वह बल्लेबाजी के लिए उतरता है, तो लोग अपने टेलीविज़न सेट चालू कर देते हैं और पल भर के लिए अपनी ज़िंदगी बंद कर देते हैं।" - बीबीसी, सचिन तेंदुलकर पर। यह कितनी सच्ची बात है! 24 साल तक खेलना आसान नहीं होता। क्रिकेट एक पेशा है, और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए खुद को लगातार अपग्रेड करना पड़ता है। कई लोग कहते हैं कि सचिन के रिकॉर्ड उनके खेले गए मैचों की संख्या—200 से अधिक टेस्ट मैचों—का परिणाम हैं। लेकिन क्या यह आसान है? बिल्कुल नहीं। इसके लिए शीर्ष स्तर की फिटनेस, बेहतरीन बल्लेबाजी कौशल और असाधारण एकाग्रता की जरूरत होती है ताकि 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों तक टिके रह सकें। मैंने कभी नहीं सुना कि सचिन किसी भी तरह की गेंदबाजी के खिलाफ कमज...

How Maratha Ended Mughal Empire

 क्या आप जानते हैं की धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला कैसे लिया गया और किसने लिया ? छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद औरंगजेब के सेनापति जुल्फिकार खान ने रायगढ़ पर कब्जा कर छत्रपति संभाजी की पत्नी येसु बाई और उनके पुत्र को भी कैद कर लिया जिसके बाद छत्रपति संभाजी महाराज के छोटे भाई  राजाराम जी महाराज छत्रपति के पद पर विभूषित हुए।  छत्रपति संभाजी महाराज को औरंगजेब ने 40 दिनों तक भयंकर यातनाएं देकर मारा था। इस हाहाकारी मृत्यु ने मराठों के सीनों में आग लगा दी। उनके सारे मतभेद खत्म हो गए और सिर्फ एक ही लक्ष्य रह गया राक्षस औरंगजेब का सर्वनाश। संगमेश्वर के किले में जब शूरवीर छत्रपति संभाजी अपने 200 साथियों के साथ औरंगजेब के सिपहसालार मुकर्रम खान के 10 हजार मुगल सिपाहियों के साथ जंग लड़ रहे थे, उस वक्त छत्रपति संभाजी के साथ एक और बहादुर योद्धा अपनी जान की बाजी लगा रहा था जिसका नाम था माल्होजी घोरपड़े। छत्रपति संभाजी के साथ लड़ते हुए माल्होजी घोरपड़े भी वीरगति को प्राप्त हो गए और माल्होजी घोरपड़े के पुत्र संताजी घोरपड़े ने ही अपने युद्ध अभियानों से औरंगजेब की नाक काट...