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प्रेमचंद के फटे जूते

  प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं. पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं. लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है. तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं. दाहिने पांव का जूता ठीक है, मगर बाएं जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है. मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है. सोचता हूं-फ़ोटो खिंचवाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है. यह जैसा है, वैसा ही फ़ोटो में खिंच जाता है. मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूं. क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा न...

Champions Trophy 2025

 क्रिकेट का अश्वत्थामा, के एल राहुल..


96 के वर्ल्ड कप में विनोद कांबली की आंख में आंसू ये सोचकर आए थे कि,मेरे क्या मेरी टीम के फैंस मुझ पर जरा भी भरोसा नहीं है?क्या मै इनकी निगाह में इतना गिर चुका हू? आज के फाइनल में कुछ ऐसी ही हालत केएल राहुल की भी थी,सोचिए दुनिया का one of the finest player आपके dugout में बैठा हो, और फिर भी आपकी टीम के फैंस को doubt हो रहा हो कि मैच हाथ से निकल जायेगा?पर फैंस का ये बेबुनियाद नहीं था, ये डाउट शुरू हुआ था 23 के फाइनल के दिन से,जिस दिन इस सज्जन आदमी से एक बहुत बड़ी गलती हुई थी।सज्जन आदमी के साथ दिक्कत ये है कि वो थोड़ी सी भी गलती करता है तो उसे सुनाने में लोगो को बहुत मजा आता है। पर सज्जन आदमी के साथ इससे बड़ी दिक्कत ये है, कि छोटी से छोटी गलती दूसरे लोग नोटिस करे न करे, उसके खुद के अंदर एक अदालत चलती रहती है,तब तक जब तक वो उस गलती का हर्जाना न चुका दे।।23 के फाइनल में केएल राहुल से एक गलती हो गई थी, बेचारा अच्छा करने के चक्कर में बहुत बुरा कर बैठा। जबकि इस आदमी के लिए कभी भी सिवाय टीम के,और इस खेल के, दुनिया में कुछ और मायने नहीं रखता। पर उस फाइनल ने इस आदमी के कॉन्फिडेंस को ही चूस लिया था। इसके चेहरे इसकी बॉडी लैंग्वेज से हमेशा यही लगता था कि ये हर दिन खुद को कोसता रहता है।मुझे याद है फाइनल खत्म होने के बाद कितना हताश होकर ये जमीन पर बैठा था, जैसे शर्म के मारे खुद को जमीन के कई फिट अंदर दफन कर देना चाहता हो।जितना हमने इसे नहीं कोसा, उससे कही ज्यादा ये खुद को कोस रहा था।24 का वर्ल्ड कप जीतकर बाकियों ने अपने जख्म भर लिए, पर ये आदमी 23 के बाद से ही, अश्वत्थामा की तरह माथे पर अपनी गलती का एक गहरा जख्म लेकर घूम रहा था।इंसान की संपत्ति चली जाए उसे गम नहीं होता,उसकी रेपुटेशन चली जाए तो उसके पास कुछ नहीं बचता। किस्मत ने कांबली को पता नहीं दूसरा मौका दिया या नहीं, पर राहुल को आज ये मौका मिला था। और सज्जन आदमी की एक और खासियत होती है,जो सज्जन आदमी को खतरनाक बना देती है,वो ये कि, सज्जन आदमी एक गलती दुबारा नहीं करता, उठो अश्वत्थामा ,तुमने अपना शाप खत्म कर लिया है।

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