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Madness for Iphone

​ *आखिर जा कहां रहा है हमारा समाज..* महाराष्ट्र के निम्न मध्यम वर्गीय मां-बाप ने अपनी इकलौती संतान को जैसे-तैसे पाल पोसकर 18 साल का किया। अब उस बेटे को आईफोन की सनक जग गई, पहाड़ के किनारे खड़े होकर 3 घंटे का फुल वोल्टेज ड्रामा चला। संभवतः सभी को लगा होगा कि ड्रामा कर रहा है, इसी बीच बाप सामने आया, शायद उसे अपने भावनात्मक और शारीरिक बल पर भरोसा रहा होगा, कि या तो मैं अपने बेटे को प्यार/डांट से मना/धमका लूंगा, नहीं तो ताकत का प्रयोग करके उसे किनारे से खींच लाऊंगा। बाप का दांव गलत साबित हुआ, बेटा उसकी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से ढीट और बलशाली था, खींचा-तानी में बेटे का बैलेंस बिगड़ा, गिरते बेटे ने वही किया जो वो पिछले 18 साल से करता आ रहा था, (बाप का सपोर्ट लेना), और उसने सपोर्ट लेने के चक्कर में अपने साथ बाप को भी खाई में खींच लिया। मां जो पहले ही बेटे को मनाने के लिए अपना मंगलसूत्र देने की पेशकश कर रही थी, इस दृश्य को देखकर कुछ समझ नहीं सकी, और बदहवासी में 1-2 सेकंड बाद उसने भी खाई में जंप लगा दी। पूरा परिवार एक आईफोन की सनक में कॉल के ग्रास में चले गए।। गलती किसकी है: 1. आईफोन के...

Democracy is in Danger!!! A blogpost by Abiiinabu

 Democracy is in Danger!! लोकतंत्र खतरे में है !!! यह हमारे देश की विडम्बना है कि तमिलनाडु के रामेश्वरम की धनुषकोटि में एक नाव चलाने वाले का एक बेटा लोकतंत्र की बदौलत देश की नैया का खवैया बनता है, और उसी बेटे की पुण्यस्मृति में आयोजित कई कार्यक्रमों में अचानक से यह कहा जाने लगा कि लोकतंत्र खतरे में है। पहले उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और अब भूतपूर्व उप राष्ट्रपति अचानक से चेते और एक असंवैधानिक कदम उठाते हुए सभी को बोलने लगे कि लोकतंत्र विफल हो चुका है , इस देश में लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है और लोकतंत्र अपने जीवन की अंतिम श्वाँसों को बड़ी ही अधीरता से गिन रहा है। पाठकों इस घटना ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। यह घटना एक तमाचा थी मेरे जैसे उस प्रत्येक देशवासी के मुँह पर जो यह सोचता था कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और शानदार लोकतंत्र है जो हर विभाग में दुनिया की महाशक्तियों को बड़ी टक्कर दे रहा है। उस तमाचे से हृदय में एक ऐसी पीड़ा ह...

Harry Potter, Hagrid and Father's Day, a blogpost by Abiiinabu

       जो लोग हैरी पॉटर को जानते हैं, उनके लिए एक सवाल है और जो लोग  हैरी पॉटर को नहीं जानते तो या तो वो 90 के दशक से पहले पैदा हुए हैं या वो इस दुनिया के नहीं हैं। तो वो लोग पहले किताब पढ़ लें, या अगर ये कठिन काम लग रहा हो तो काम से काम मूवीज तो देख ही लें, नहीं तो शायद मामला ऊपर से चला जाये और मैं ये कतई नहीं चाहता कि पूरी रामायण ख़तम होने के बाद आप मुझसे पूछने कि सीता किसका बाप था ( खीं खीं खीं)।  हाँ तो बात ये हैं कि जे के रोलिंग कि लिखी हैरी पॉटर की  सात किताबों के बाद एक और किताब आई थी जिसका नाम था cursed child।  उसमे एक बात पता चली कि हैरी पॉटर ने हॉगवर्ड्स की लड़ाई के बाद जेनी से शादी कर ली थी और उसके तीन बच्चे हुए।  यहाँ तक सब ठीक है, लेकिन नाम मुझे ऐसे लगे जैसे हैरी पॉटर पता नहीं क्यों ये भूल गया कि उसकी लाइफ में कई लोगों के बीच कुछ ऐसे भी लोग थे जो उसपर भरोसा करते थे। बच्चों के नाम रखे गए थे जेम्स सेरियस पॉटर, एल्बस सेवेरस पॉटर और लूना लिली पॉटर।  शायद इन लोगों का हैरी कि जिंदगी पर व्यापक प्रभाव था।  जेम्स, हैरी के प...

पैसा बड़ा या सोच? How to think big and positive by Abiiinabu

 पैसा बड़ा या सोच? How to think big and positive by Abiiinabu अभी थोड़ी देर पहले ही एक किताब पढ़ रहा था। पढ़ क्या रहा था, ये समझ लो चाट रहा था (literally नहीं लेना है)।  पढ़ते पढ़ते कई चीज़ें सामने आईं, कई मुद्दे सामने आये, कई समाधान भी आये दिमाग में, सो सोचा बता दूँ आप लोगों को भी।  वैसे तो मैं फिक्शन पढ़ने का बहुत शौक़ीन हु लेकिन लाइफ रिलेटेड बुक्स पढ़ कर काफी अच्छा लगने लगा है।  वो इसलिए की जो ये किताबें कहती हैं, वो सब हमको पहले से मालूम है।  लेकिन क्या आप लोगों को मालूम है ? ज़िन्दगी में कई बार हम ऐसी जगह खुद को खड़ा पते हैं जहां हमको बेबसी और लाचारी महसूस होने लगती है। और मैंने खुद ये अनुभव किया है कि किताबें सच में हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं।  क्यूंकि वो हमको कभी छोड़ कर नहीं जा सकतीं।        इंसान की ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा महत्तव क्या रखता है ? जब पापा ने मुझसे पूछा तो मैंने हस कर लापरवाही से कहा " पैसा "।  बदले में पापा भी मुस्कुराये लेकिन बाद में समझाते हुए बोले, ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा ज़रूरी अगर कुछ है तो वो है "इंसान की सोच "।...

INDIA NEEDS PLANNING TO BEAT COVID-19 SECOND WAVE कोरोना से निपटने के लिए भारत को प्लानिंग की आवश्यकता ।। A Blogpost by Abiiinabu।।

INDIA NEEDS PLANNING TO BEAT COVID-19 SECOND WAVE कोरोना से निपटने के लिए भारत को प्लानिंग की आवश्यकता       जब छोटा था तब से देखता आ रहा था, कभी अम्मा, कभी नानी, कभी बुआ तो कभी मम्मी को। घर में जितना भी दूध आता था वो कभी पूरा इस्तेमाल नहीं होता था।  हमेशा एक चौथाई या तिहाई हिस्सा ही पीने या चाय या अन्य कामों में लिया जाता था। बाकि का दूध बचा कर रख दिया जाता था। बचपन में तो समझ नहीं आता था ये सब, वो इसलिए कि दूध बहुत ज़्यादा पसंद नहीं था मुझे। मिडिल क्लास घर के बच्चों को दूध को पीने लायक बनाने के लिए हॉर्लिक्स या बोर्नविटा की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। उनके लिए बस मम्मी की मार या पापा की आँखें ही उस बेस्वाद दूध को पीने लायक बना देती थी। खैर ये पीने की प्रक्रिया की चर्चा फिर कभी। अभी फिलहाल, आगे की बात सुनो। हाँ तो एक बार मम्मी को काम करते देखा तो पाया कि जितना भी दूध आता है उसके ज़रूरत के हिसाब से हिस्से किये जाते हैं।  एक पीने के लिए बोले तो रॉ कंसम्पशन, एक हिस्से का पनीर या छास बन जाता है, मतलब प्राइमरी कंसम्पशन। उसके बाद एक हिस्से में तोड़ डालकर उसका दही ज़माने रख ...

बच्चे और कार्टून ।।A blogpost by Abiiinabu ।।

  बच्चे और कार्टून Modern Day cartoons      आज ऑफिस से घर आ रहा था, तो सीढ़ियां चढ़ते हुए पडोसी के टीवी की आवाज बहार से सुनी, किसी भारतीय अभिनेता की आवाज़ में कोई कार्टूनि आवाज लग रही थी। मैं उनके बच्चे को जनता हूँ, शर्त लगा के कह सकता हूँ कि कोई कार्टून ही चल रहा होगा।  ऐसे ही आते आते मन में सवाल आये कि हमारा बचपन शायद अच्छा था।  मैं कोई नई बात नहीं कर रहा हूँ।  अगर आप यह ब्लॉग पढ़ रहे हैं और आपकी उम्र 20 वर्ष या उससे ज़्यादा है, तब तो आप निश्चित ही मेरी बात सही मान रहे होंगे।  और यदि आप प्रौढ़ावस्था में पहुँच चुके हैं तब तो आप निश्चित रूप से कभी न कभी हम सबसे ही परेशान रहे होंगे।  मैं आज एक विश्लेषण करना चाहता हूँ, मैं ये जानना चाहता हूँ कि हमारे बचपन में जो  Cartoon आते थे वो हमको तब ज़्यादा सिखाते थे या आजकल जो कार्टून बच्चों को दिखाए जाते हैं उनसे उनका विकास हो रहा है?      यदि मैं ठीक हूँ तो जो लोग 90s में पैदा हुए हैं उनके लिए 2007 तक, जब तक भारत में एंटरटेनमेंट के नाम पर सिर्फ और सिर्फ टीवी ही था। उस समय के कार्टून...

How to face problems in life ब्रह्मभोज | A problem facing blog by Abiiinabu

How to face problems in life, ब्रह्मभोज       एक बार ब्रह्मा जी ने अपने सभी बच्चों को खाने के लिए बुलाया। नियत समय पर जब सभी लोग खाने के लिए पहुंचे तो ब्रह्मा जी ने खाने के लिए एक शर्त रख दी। "अगर तुम लोग खाते समय अपनी कोहनी न मोड़ो तो तुम खाना खा सकते हो " ब्रह्मा जी ने कहा.  खाने के लिए शर्त देख कर सभी लोग विचार करने लगे कि इस समस्या का कैसे समाधान किया जाए।  सबने अलग अलग तरीके अपनाये। कुछ लोगों ने अपने सर मोड़े और खाने को चाटने लगे जिससे वो खाने का सेवन करने लगे। और शास्त्र बताते हैं की वो पशु बने।  कुछ लोग ब्रह्मा जी के इस व्यवहार से रुष्ट हो गए, वो असुर बने।  कुछ लोगों जो जब Problem का Solution समझ न आया तो वो जितना खाना समेट सकते थे उसको समेट के वहां से भाग गए, शास्त्र बताते हैं ऐसे लोग राक्षस बने।  लेकिन कुछ लोग थे जिन्होंने हार नहीं मानी समस्या का समाधान ढूंढ़ने के प्रयास में वो लोग एक दूसरे के सामने वाले को अपने हाथ से खाना खिलाने लगे, कुछ ही देर में उन सब लोगों ने खाना खा लिया और शास्त्र बताते हैं वो लोग देव कहलाये।  वो लोग देव ...

Oxygen Shortage पहले से पता था क्या होने वाला है || blog by Abiiinabu||

Oxygen Shortage is now common in India, Oxygen Shortage पहले से पता था क्या होने वाला है?      अगस्त 2017 की बात है, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर  में एक सरकारी सहायता प्राप्त अस्पताल में अचानक 63 बच्चों की मौत की खबर सुनकर हाहाकार मच गया।  कारण था BRD हॉस्पिटल   में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी। अस्पताल की सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन सप्लाई में भी 2 घंटे की ऑक्सीजन की मात्रा का अलार्म बजने लगा और उसी के साथ बजने लगी डॉक्टरों को बच्चों को बचाने की उम्मीद।  BRD हॉस्पिटल के स्टाफ को और सरकार दोनों को बार बार अपना बकाया चुकाने के लिए रिमाइंडर के तौर पर लेटर लिखे जा रहे थे। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने, और न अस्पताल प्रशाशन ने किसी भी पत्र का जवाब दिया।  जिससे हार कर अस्पताल को ऑक्सीजन उपलब्ध करने वाली कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी। 10 अगस्त की सुबह ऑक्सीजन ख़तम का अलार्म बजने के साथ, बच्चों की मौत का तांडव शुरू हो गया। इधर इन सब से बेखबर बाकी लोग दिमागी बुखार से ग्रस्त बच्चों को भर्ती करवाने के लिए उनके माता पिता आ रहे थे।  अस्पताल में भीड़ बढ़ रही थी, औ...